आलोक मेहता का विकल्प तलाश रहे हैं शैलेंद्र भदौरिया!

: कानाफूसी : यह चर्चा बहुत तेज है कि नेशनल दुनिया के नए प्रधान संपादक की खोज शुरू हो चुकी है. नेशनल दुनिया अखबार के मालिक शैलेंद्र भदौरिया अब फ्रंट फुट पर आकर खेलने लगे हैं. उन्होंने आलोक मेहता एंड कंपनी को किनारे लगाने के लिए रणनीतिक तरीके से काम शुरू कर दिया है. सबसे पहले तो उन्होंने खुद 26 जनवरी को अपना बयान अपने अखबार में छपवा कर और मेरठ एडिशन की लांचिंग की घोषणा कर इन खबरों को विराम दे दिया कि नेशनल दुनिया अखबार बंद होने वाला है.

नेशनल दुनिया में छपने वाली झूठी खबरों को शैलेंद्र भदौरिया पढ़ते हैं या नहीं? देखिए एक कटिंग

जो लोग पाठकों की स्मृति को कमजोर मानते हैं या खुलेआम अपने पाठकों की आंख में धूल झोंकने को अपना अधिकार मानते हैं उनमें से एक आलोक मेहता भी हैं. आलोक महेता और उनके लोग किस तरीके की एजेंडा पत्रकारिता करते हैं और अनाप-शनाप खबरें छापते हैं, इससे हर कोई वाकिफ है. पर शर्मनाक स्थिति तब पैदा होती है जब अपने ही झूठ को सच साबित करने के लिए ये लोग फिर से एक बड़ा झूठ बोल देते हैं.

नेशनल दुनिया का प्रकाशन 30 मार्च से मेरठ से भी : शैलेंद्र भदौरिया

नेशनल दुनिया हिंदी अखबार के 26 जनवरी के अंक में इस अखबार के मालिक शैलेंद्र भदौरिया का भाषण छपा है. भाषण में उन्होंने ढेर सारी घोषणाएं की हैं. प्रताप यूनिवर्सिटी वाले शैलेंद्र भदौरिया ने जानकारी दी है कि वे 30 मार्च से मेरठ से नेशनल दुनिया का प्रकाशन शुरू करने वाले हैं. 30 मार्च से ही नेशनल दुनिया का दिल्ली कार्यालय नोएडा के सेक्टर 11 में शिफ्ट हो जाएगा. भदौरिया का पूरा लेक्चर नेशनल दुनिया अखबार के पेज नंबर एक पर छपा है.