उस झूठे और करप्ट आईजी की फर्जी प्रेस रिलीज को किसी पत्रकार ने नहीं छापा

Himanshu Kumar : जब हम दंतेवाड़ा में काम करते थे तब एक बार वहाँ एक आई जी साहब की नियुक्ति हुई. एक बार उन्होंने पत्रकारों को अपने आफिस में बुलाया. अपने एक पत्रकार मित्र के साथ मैं भी वहाँ चला गया. आईजी साहब के कार्यालय में एक आदिवासी लड़का जिसकी उम्र करीब सोलह साल की होगी और साथ में एक आदिवासी लड़की जिसकी उम्र करीब पन्द्रह की रही होगी, सहमे हुए बैठे थे. दोनों ने नक्सलियों वाली एकदम नई हरी वर्दी पहनी हुई थी. मुझे शक हुआ कि जंगल से आने वाले नक्सली के पास एकदम नए साफ़ कपडे कहाँ से आये?