बख्‍श दीजिए दीपक चौरसिया को, उन्‍हें इंडिया न्‍यूज चलाने दीजिए!

फेसबुक पर दीपक चौरसिया के खिलाफ घुमड़ रहे तमाम पोस्टों को पढ़ा। मुझे एक पुरानी बात याद आ गयी कि इस दुनिया में लोग अपने दुःख से दुखी नहीं हैं बल्कि दूसरों के सुख को देख उससे ज्यादा दुखी हैं। पिछले कुछ दिनों से दीपक चौरसिया के "इंडिया न्यूज" ज्वाइन करने बाद से लोगों ने उनके खिलाफ निगेटिव कमेंट्स की झड़ी लगा दी है। मैं खुद मीडिया इंडस्ट्री में हूँ और मैं ये अच्छी तरह जानता हूँ कि आज के दौर में कितनी ईमानदारी से खबरें लिखी या बनायीं जाती हैं।