डिप्रेशन के शिकार हो चुके हैं राहुल गांधी!

वो सुब्रत राय और अम्बानियों से दूर रहते हैं. राजीव शुक्ल और अहमद पटेल जैसों को वो भीतर से पसंद नहीं करते. उनके दरबार में रसूख और रइसजादों की वाकई अहमियत नहीं. प्रधानमंत्री हो या वित्तमंत्री …हर बड़े को उनसे मिलने या बात करने के लिए समय लेना होता है. और हर बड़ा फैसला उनके बिना लेने की आज देश में किसी की हैसियत नहीं है. वो निहायत शरीफ हैं और चकाचौंध छोड़कर सादगी से जीते हैं. लेकिन वो परेशान हैं. वो सहमे हैं, खुद के भविष्य से. उनका आत्मविश्वास उन्हें छल रहा है. और अगर मेरी खबर सही है तो वो एक तरह के मनोवैज्ञानिक दबाव की स्थिति से गुजर रहे हैं. अगर हिम्मत करके लिखूं तो वो एक तरह के डिप्रेशन से घिरते जा रहे हैं.