अभी नहीं तय हो सका कांडा और अरुणा पर आरोप, सुनवाई टली

दिल्ली : पूर्व एयर होस्टेस गीतिका शर्मा आत्महत्या मामले में अदालत में सुनवाई टल गई। इसमें हरियाणा के पूर्व मंत्री एवं हरियाणा न्‍यूज के मालिक गोपाल गोयल कांडा तथा उनकी सहयोगी अरुणा चड्ढा आरोपी हैं। इस मामले में रोहिणी कोर्ट स्थित जिला जज एसके सरवरिया की अदालत में आरोपियों के खिलाफ आरोप तय करने पर सुनवाई चल रही है। शुक्रवार को दोनों पक्षों की ओर से आरोप तय करने को लेकर बहस होनी थी, लेकिन विशेष लोक अभियोजक राजीव मोहन के नहीं आने के कारण अदालत ने सुनवाई को अगली तारीख तक के लिए टाल दिया। अब मामले की सुनवाई 2 मार्च को होगी।

सुनवाई के दौरान मामले में आरोपी एमडीएलआर कंपनी की वरिष्ठ प्रबंधक अरुणा चड्ढा को जहां तिहाड़ जेल से अदालत में पेश किया गया था, वहीं आरोपी हरियाणा के पूर्व गृह राज्यमंत्री गोपाल गोयल कांडा की तबियत खराब होने के कारण पेश नहीं किया जा सका। सुनवाई के दौरान गीतिका शर्मा का भाई अंकित शर्मा अदालत में मौजूद था। उसकी मां अनुराधा शर्मा ने भी हाल में ही अशोक विहार स्थित अपने घर में पंखे से लटक कर आत्महत्या कर ली थी। इस मामले में भी पुलिस ने कांडा तथा चड्ढा के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया है।

बता दें कि गीतिका शर्मा आत्महत्या मामले में भारत नगर थाने में 5 अगस्त 12 को कांडा व अरुणा के खिलाफ आत्महत्या के लिए उकसाने, धमकी देने, अपराधिक साजिश रचने व आईटी एक्ट की धाराओं में मामला दर्ज किया गया था।

गीतिका पर ही नहीं, बीस महिलाओं पर बरसी थी गोपाल कांडा की कृपा

हरियाणा न्‍यूज के मालिक गोपाल कांडा की रंगीनमिजाजी ही उसकी मुसीबत बन गई है. पहले गीतिका और अब उसकी मां ने आत्‍महत्‍या कर के इसकी पूरी जिम्‍मेदारी कांडा एवं उसकी सहायक अरुणा चड्ढा पर डाल दी है. पुलिस की जांच में कांडा के कई छिपे सच, उसकी रंगीनमिजाजी और सरकार को चूना लगाने का प्लानिंग भी सामने आ गई है. गोपाल कांडा ने अपनी 39 कंपनियों में 20 महिलाओं को डायरेक्टर के पद तक पहुंचाया.

ये महिलाएं भले ही उनकी रिश्तेदार, जानकार या दोस्त रही हों, लेकिन कांडा ने 38 कंपनियों में 17 महिलाओं को प्रतिनिधित्व दिया. बताया जाता है कि एकेजी इंफ्राबिल्ड तो गोपाल कांडा ने केवल अरुणा चड्ढा और गीतिका शर्मा के लिए ही खड़ी की है. और इसके कई कारण भी बताए जाते हैं. हालांकि पुलिस का मानना है कि ज्‍यादा से ज्‍यादा महिलाओं को अपने नजदीक लाने के लिए ही गोपाल कांडा ने उनको महत्‍वपूर्ण पद दे दिए थे.

इसके अलावा कई सवाल अब भी खड़े हैं कि क्या कांडा को ये भय रहता है कि उसकी कंपनी के डायरेक्टर वफादार नहीं हैं? क्या गोपाल कांडा अपनों से ज्यादा बेगानों पर यकीन करता है, क्योंकि ज्यादातर डायरेक्टर उसके रिश्तेदार नहीं बल्कि दोस्त या जानकार हैं? क्या कांडा ने सरकार को रेवेन्यू का चूना लगाने के लिए ही इतनी कंपनियां खड़ी की थीं? इन सवालों के जवाब दिल्ली पुलिस भी जानने की कोशिश कर रही है. जिन महिलाओं को कांडा ने महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां दी थीं उनमें सरोज अलंकार, सुधा पवार, प्रेरणा, कंचन भल्ला, सरिता देवी, सुशीला गोयल, गरिमा चावला, सरस्वती गोयल, सरिता अग्रवाल अरुणा चड्ढा और खुशबू शर्मा का नाम सबसे आगे है.