कई न्यूज चैनलों ने राजनाथ सिंह को ईमानदारी का प्रमाणपत्र दे दिया

Rajen Todariya : राजनाथ सिंह का उत्तराखंड से पुराना नाता है। उन्होंने ही मुजफ्फरनगर कांड के खलनायक और तत्कालीन जिलाधिकारी को अपना प्रमुख सचिव बनाकर प्रतिष्ठित किया। उनके पुत्र को भाजपा सरकार ने देहरादून में करोड़ों की सरकारी जमीन दी। उनके पुत्र की कंपनी पर आरोप है कि वह मीटर घोटाले से लेकर कुंभ घोटाले तक में लिप्त है। कांग्रेस सरकार में दम हो तो वह इन आरोपों की जांच कराए और सच जनता के सामने लाए। इसके बावजूद कई न्यूज चैनलों ने राजनाथ सिंह को ईमानदारी का प्रमाणपत्र दे दिया।

Arvind K Singh :  नयी बोतल में पुरानी शराब… दिल्ली की राजनीति में घमासान है…ताज बदल रहे हैं…बीजेपी को अब राजनाथ सिंह संभालेंगे….शिवसेना को उद्धव ठाकरे और कांग्रेस को तो राहुल गांधी ही संभालेंगे…इस बात की नीतिगत फैसला हो जाने के बाद आज से उस पर अमल भी शुरू हो गया है….लेकिन इन चेहरों को देखें तो इनमें नया क्या है..नया एक चीज हो सकती है कि ये अपने पुराने अनुभवों से सबक लेते हुए संगठन को दिशा दें और आम लोगों का दुख दर्द दूर करने की कोशिश करें…लेकिन ऐसा सोचने का समय इनको तब मिलेगा जब ये चारणों से दूर रहे…लोकतंत्र के नए राजाओं महाराजाओं की तरह काम न करें…ये क्या करेंगे नया यह तो सबके सामने आएगा ही…कहते हैं कि किसी को नया जिम्मा मिले तो कुछ समय दिया जाये…दे दीजिए इनको भी कमसे कम छह महीने का समय इस बीच में देखेंगे कि क्या करते हैं ये…

Samar Anarya : ये समझ आया कि आडवाणी साहब संघ से बेईज्जत होने के बाद से ही बदला लेने के लिए गड-करी खाना चाहते थे। पर ये नहीं समझ आया कि आखिर करी पकाने में सफल हो जाने के बाद उन्होंने राजनाथ सिंह को क्यों खिला दी?

Gyasu Shaikh पर आडवाणी जी का सच गडकरी जी के लिए तो यही है की 'मैं न खाऊँ पर तुझे भी न खाने दूँ …'

Priyamvad Ajaat उन्होंने नहीं खिलाई…आडवाणी जी तो अंत अंत तक सुषमा के नाम पर अड़े रहे लेकिन उनकी डाल गली नहीं और गर्मागर्म करी का रायता फ़ैल गया|

Shambhunath Shukla : कांग्रेस का चिंतन शिविर समाप्त होते ही भाजपा ने भी अपना चिंतन-मनन कर डाला और गडकरी की जगह राजनाथ सिंह को अध्यक्ष पद सौंप दिया। यानी एक तरफ राहुल होंगे तो दूसरी तरफ राजनाथ। २०१४ के चुनाव में अपने-अपने लड़ाके और अपने-अपने तीर। इनमें से हर कोई हम्माम में कपड़े पहले भी उतार चुका है और पिद्दी साबित हुए हैं। दरअसल नेता न इधर हैं न उधर। क्या होगा इस तरह बार-बार फिसड्डी साबित हो चुके योद्धाओं से।

Anita Gautam : भाजपा के अध्यक्ष क्या बदले मीडिया तो ऐसे जश्न मनाते दिखा रही है मानों 2014 का लोक सभा चुनाव ही जीत लिया हो । कहीं भाजपा को फिर से 'शाइनिंग इंडिया' न दिखने लगे इस भ्रम में !

Abhishek Srivastava : राजनाथ सिंह धीरे-धीरे भाजपा के नरसिंहराव बनते जा रहे हैं। सेकुलरवाद के हमले से बचने के लिए (मोदी के कारण) और यूपी में अपनी खोई ज़मीन वापस पाने के लिए (कल्‍याण सिंह की वापसी) भाजपा साल भर बाद अगर पीएम पद के लिए राजनाथ का नाम उछाल दे, तो आश्‍चर्य नहीं होगा। (सबक: चुप रहना सबसे बड़ा गुण है।)

फेसबुक से.