क्या आपका पाला भी ऐसे कमीने-कुत्तों से पड़ा है या पड़ता है…?

किसी ने कहा कि 14 फरवरी पर कोई आलेख लिख डालूँ। वही वैलेन्टाइन डे यानि प्रणयोत्सव पर। जी हाँ वह दिन आ भी गया था, मेरे अन्दर के वैलेन्टाइन ने उबाल नहीं मारा क्योंकि मैं क्रोध की आग में झुलसने पर विवश थी। जब मुझे क्रोध आता है तब सम्बन्धित लोगों को कुत्ते-कमीना शब्दों से अलंकृत करना शुरू कर देती हूँ। मेरा क्रोध बेकाबू है। मेरा कोई वैलेन्टाइन नहीं और न मैं किसी की। भाड़ में जाए वैलेन्टाइन डे।