हिंदुस्‍तान विज्ञापन घोटाला : पुलिस ने कालेजों को नोटिस भेजकर प्रकाशित विज्ञापन का ब्‍यौरा मांगा

मुंगेर। पटना उच्च न्यायालय के आदेश के आलोक में विश्वस्तरीय 200 करोड़ के दैनिक हिन्दुस्तान विज्ञापन घोटाले में अनुसंधान (जांच) पूरी करने की निर्धारित तिथि ज्यों-ज्यों नजदीक आ रही है, पुलिस अनुसंधान की गति ‘राकेट‘ की रफ्तार में दौड़ रही है और अनुसंधान में नए-नए दस्तावेजी साक्ष्य पुलिस के समक्ष सामने आ रहे हैं। साक्ष्य चौंकाने वाले हैं, सरकारी सूत्रों ने इस संवाददाता को बताया है।

इस बीच, बिहार की आर्थिक अपराध इकाई (पटना) ने मुंगेर के पुलिस अधीक्षक पी. कन्नन को सरकारी विज्ञापन प्रकाशन से संबंधित ब्योरा एकत्रित करने का कड़ा निर्देश दिया है। बिहार आर्थिक अपराध इकाई ने मुंगेर पुलिस को दैनिक हिन्दुस्तान के मुंगेर, भागलपुर और मुजफ्फरपुर के अवैध संस्करणों के प्रकाशन में आखिर कितने करोड़ की सरकारी राशि अवैध ढंग से सरकारी विज्ञापन प्रकाशन -मद में अभियुक्तों की ओर से निकाली गईं, का ब्यौरा एकत्रित करने का निर्देश जारी कर दिया है? पटना उच्च न्यायालय के आदेश के आलोक में मुंगेर पुलिस को हर हालत में दैनिक हिन्दुस्तान विज्ञापन घोटाला में पुलिस अनुसंधान को 17 मार्च, 13 के पूर्व पूरा कर देना है।

विज्ञापन घोटाला में सरकारी राजस्व की वास्तविक राशि का आंकड़ा जुटाने में जुटी मुंगेर पुलिस : पुलिस अधीक्षक पी. कन्नन के आदेश पर दैनिक हिन्दुस्तान विज्ञापन फर्जीवाड़ा कांड के अनुसंधानकर्ता सह आरक्षी निरीक्षक (कोतवाली) वीरेन्द्र कुमार ने मुंगेर के अंगीभूत आरडी एण्ड डीजे कालेज के प्राचार्य को दंड प्रक्रिया संहिता 91 के तहत ‘नोटिस‘ भेजी है और उनसे वर्ष 2001 से अब तक दैनिक हिन्दुस्तान के मुंगेर संस्करण को भेजे गए कालेज के विज्ञापन का (1) विज्ञापन आदेश, (2) प्रकाशित विज्ञापन की छायाप्रति, (3) अखबार की ओर से समर्पित विज्ञापन-विपत्र और (4) विज्ञापन विपत्र के विरूद्ध जारी भुगतान आदेश और चेक नम्बर सहित भुगतान की राशि का पूरा ब्‍यौरा उपलब्ध कराने का लिखित आदेश जारी किया है।

अनुसंधानकर्ता सह आरक्षी निरीक्षक (कोतवाली) ने महाविद्यालय के प्राचार्य को यह भी बताने कहा है कि उन्होंने दैनिक हिन्दुस्तान को किस आधार पर कालेज का विज्ञापन प्रकाशन हेतु भेजा? पुलिस की इस नोटिस से मुंगेर जिले के सरकारी विभागों में हड़कंप मचा हुआ है। केन्द्र और राज्य सरकारों के सरकारी विभागों में पुलिस नोटिस मिलने के बाद सरकारी पदाधिकारी भी बेचैन हो उठे हैं। उनकी बेचैनी का कारण यह है कि उन्हें जवाब इस बिन्दु का नहीं सूझ रहा है कि उन्होंने किस आधार पर दैनिक हिन्दुस्तान के मुंगेर संस्करण को सरकारी विज्ञापन प्रकाशन हेतु जारी किया?

कोतवाली के आरक्षी निरीक्षक वीरेन्द्र कुमार ने प्राचार्य को चेतावनी भी दी है और कहा है कि यदि प्राचार्य निर्धारित समय सीमा के अन्दर मांगे गए विज्ञापन से संबंधित दस्तावेज पुलिस पदाधिकारी के समक्ष उपलब्ध नहीं कराते हैं, तो पुलिस उनके विरूद्ध भारतीय दंड संहिता की धारा 175 के तहत कानूनी कार्रवाई करने को विवश होगी। पुलिस की ओर से भेजी गई नोटिस में आरक्षी निरीक्षक ने कोतवाली कांड संख्या-445/2011 का भी संक्षिप्त ब्‍यौरा दिया है और बताया कि दैनिक हिन्दुस्तान के अवैध प्रकाशन और जालसाजी कर सरकारी विज्ञापन प्राप्त करने के मामले में कोतवाली पुलिस अनुसंधान कर रही है। इस कांड में पुलिस ने मेसर्स हिन्दुस्तान मीडिया वेन्चर्स लिमिटेड (नई दिल्ली) की अध्यक्ष श्रीमती शोभना भरतिया, मुद्रक एवं प्रकाशक अमित चोपड़ा, दैनिक हिन्दुस्तान के प्रधान संपादक शशि शेखर, पटना संस्करण के स्थानीय संपादक अकु श्रीवास्तव और भागलपुर संस्करण के स्थानीय संपादक बिनोद बंधु को भारतीय दंड संहिता की धारा 420/471/476 और प्रेस एण्ड रजिस्ट्रेशन आफ बुक्स एक्ट, 1867 की धारा 8 (बी),14 और 15 के तहत नामजद अभियुक्त बनाया गया है।

कोतवाली के आरक्षी निरीक्षक वीरेन्द्र कुमार ने ऐसी ही पुलिस नोटिस मुंगेर और जमालपुर के अंगीभूत महाविद्यालय क्रमशः बीआरएम कालेज (मुंगेर), जेआरएस कालेज (जमालपुर) और जेएमएस कालेज (मुंगेर) के प्राचार्यों को भी भेजी है और उन्हें भी पुलिस नोटिस के आलोक में विज्ञापन प्रकाशन से संबंधित दस्तावेज पुलिस को सुपुर्द करने का आदेश दिया है।

विश्वस्तरीय 200 करोड़ के दैनिक हिन्दुस्तान विज्ञापन घोटाला में पुलिस उपाधीक्षक एके पंचालर ने पर्यवेक्षण टिप्पणी (रिपोर्ट-वन) और पुलिस अधीक्षक पी. कन्नन ने भी अपनी  ‘पर्यपेक्षण-टिप्पणी‘ (रिपोर्ट-टू) अभियोजन के पक्ष में जारी कर दी है। पटना उच्च न्यायालय के आदेश के आलोक में अब मुंगेर पुलिस को सभी नामजद अभियुक्तों के विरूद्ध ‘आरोप-पत्र‘ मुंगेर के मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी के न्यायालय में समर्पित करना शेष रह गया है।

मुंगेर से श्रीकृष्‍ण प्रसाद की रिपोर्ट. इनसे संपर्क मोबाइल नं. -09470400813 के जरिए किया जा सकता है.


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जांच से बौखलाए हिंदुस्‍तान तथा जागरण ने नीतीश कुमार की खबरों को पहले पेज से उतारा

मुंगेर। पटना उच्च न्यायालय की न्यायमूर्ति माननीय अंजना प्रकाश के 17 दिसंबर, 2013 के ऐतिहासिक अदेश के आलोक में विश्वस्तरीय 200 करोड़ के दैनिक हिन्दुस्तान विज्ञापन घोटाला में बिहार की मुंगेर पुलिस की कार्रवाई तेज होने के बाद आर्थिक अपराध में लिप्त दैनिक हिन्दुस्तान का प्रबंधन और संपादकीय टीम ने बिहार राज्य में विकास के नारा को अमलीजामा पहनाने वाले ईमानदार मुख्यमंत्री नीतीश कुमार पर आंख तरेरना शुरू कर दिया है।

नामजद अभियुक्तों ने साजिश के तहत बिहार सरकार के मुखिया नीतीश कुमार के प्रतिदिन की खबरों को राज्य के जिलावार अवैध संस्करणों के प्रथम पृष्ठ से करीब-करीब हटा दिया है। मुख्यमंत्री के समाचार-कवरेज के मामले में दैनिक जागरण प्रबंधन भी दैनिक हिन्दुस्तान की तर्ज पर काम कर रहा है। दैनिक जागरण ने भी मुख्यमंत्री के कवरेज को प्रथम पृष्ठ पर प्राथमिकता देना बन्द कर दिया है। बताते चलें कि बिहार के मुजफ्फरपुर जिला स्थित मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी के न्यायालय में दैनिक जागरण के सरकारी विज्ञापन फर्जीवाड़ा से जुड़ा विश्वस्तरीय मुकदमा विचाराधीन है।

09 फरवरी, 13 को मुंगेर संस्करण में हिन्दी दैनिक ‘प्रभात-खबर‘ ने अपने प्रथम पृष्ठ पर दो कालम में ‘लोक सेवकों के चयन पर बोले नीतीश‘ शीर्षक से मुख्यमंत्री की खबर छपी है। जबकि 09 फरवरी, 13 के मुंगेर संस्करण में दैनिक हिन्दुस्तान में प्रथम पृष्ठ पर मुख्यमंत्री की खबर गायब है। सरकार को छलने के लिए दैनिक हिन्दुस्तान ने मुंगेर संस्करण के पृष्ठ – 02 पर मात्र दो कालम में लोक सेवा आयोग के अध्यक्षों के सम्मेलन का मात्र फोटो मुख्यमंत्री के भाषण करते हुए प्रकाशित किया है। संबंधित समाचार गायब है।

09 फरवरी, 13 के मुंगेर संस्करण में दैनिक जागरण में लोक सेवा आयोग के अध्यक्षों के सम्मेलन से जुड़ा समाचार ही पूरा गायब है। प्रथम पृष्ठ पर सिंगल कालम में गया की खबर छोटे फोटो के साथ छपी है जिसमें मुख्यमंत्री श्रीलंका के राष्‍ट्रपति को महाबोधि मंदिर का प्रतीक चिन्ह भेंट कर रहे हैं। दैनिक जागरण ने श्रीलंका के राष्‍ट्रपति और मुख्यमंत्री की खबर को छापकर केवल औपचारिकता मात्र पूरा की है, ऐसा स्वतंत्र राजनीतिक पर्यवेक्षकों का कहना है।
 
दैनिक अखबारों के अवैध संस्करण और सरकारी विज्ञापन फर्जीवाड़ा को न्यायालय के माध्यम से पूरी दुनिया के समख लाने में अहम भूमिका निभाने वाले 85 वर्षीय व्योवृद्ध पत्रकार, अधिवक्ता और आर0टी0आई0 ऐक्टिविस्ट काशी प्रसाद ने मुख्य मंत्री नीतीश कुमार से विगत सात दिनों के 38 जिलों के संस्करणों को पटना मंगाकर सूक्ष्मता से निरीक्षण करने का अनुरोध किया है। आर्थिक भ्रष्टाचार में लिप्त दैनिक हिन्दुस्तान, दैनिक जागरण और अन्य अखबार पटना में कुछ छाप रहा है और राजधानी के बाहर के 37 जिलों में कुछ और ही छाप रहा है। जांच और छानबीन सरकार का विषय है।

अखबार के मालिकों और संपादकों को क्यों गुस्सा आया है? न्यायालय के आदेश से दैनिक हिन्दुस्तान के लगभग दो सौ करोड़ के विज्ञापन फर्जीवाड़ा में पटना उच्च न्यायालय के आदेश से कोतवाली कांड संख्या-445/2011 में पुलिस अनुसंधान की गति ‘सम्पूर्ण क्रांति एक्सप्रेस ट्रेन की गति की रफ्तार से इनदिनों चल रही है। पटना उच्च न्यायालय ने इस कांड में पुलिस अनुसंधान हर कीमत में तीन माह में पूरा करने का स्पष्ट आदेश दे दिया है। इस कांड में पुलिस अधीक्षक पी. कन्नन और पुलिस उपाधीक्षक एके पंचालर पहले ही अपनी-अपनी पर्यवेक्षण-टिप्पणियां समर्पित कर चुके हैं। उन्होंने अपनी पर्यवेक्षण-टिप्पणियों में अभियुक्तों के विरूद्ध लगाए सभी आरोपों को प्रथम दृष्टया ‘सत्य‘ घोषित कर दिया है। पुलिस के समक्ष अब नामजद अभियुक्तों को गिरफ्तार करने और उनके विरूद्ध न्यायालय में ‘आरोप-पत्र‘ समर्पित करने की काररवाई शेष रह गई है।

मुंगेर से श्रीकृष्‍ण प्रसाद की रिपोर्ट. इनसे संपर्क मोबाइल नं. -09470400813 के जरिए किया जा सकता है.


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