सोशल मीडिया और न्यू मीडिया अतिवादी ताकतों के हाथ में जा रहा!

सोशल मीडिया ने आज आम जनमानस को अपनी बात कहने का मौका दिया है. जहाँ पहले मुख्यधारा मीडिया का संपादक ही तय करता था की कौन सी बात बाहर आनी है और कौन सी नहीं वहां आज सोशल मीडिया पर सिर्फ खबर बनाने के लिए बातें नहीं हो रही हैं बल्कि उन समस्यायों के निवारण के लिए मिलकर आवाज़ उठाने का भी काम हो रहा है.