सोशल मीडिया और न्यू मीडिया अतिवादी ताकतों के हाथ में जा रहा!

सोशल मीडिया ने आज आम जनमानस को अपनी बात कहने का मौका दिया है. जहाँ पहले मुख्यधारा मीडिया का संपादक ही तय करता था की कौन सी बात बाहर आनी है और कौन सी नहीं वहां आज सोशल मीडिया पर सिर्फ खबर बनाने के लिए बातें नहीं हो रही हैं बल्कि उन समस्यायों के निवारण के लिए मिलकर आवाज़ उठाने का भी काम हो रहा है.

स्‍वतंत्र मिश्रा जी, आपके माता पिता इस हालत में देखकर जरा भी खुश न होते

पिछले दो दिन से सहारा मीडिया के एक बड़े पदाधिकारी के क्रेडिट कार्ड की चोरी की खबरे पढ़ कर मजे ले रहा था. आज उसी कड़ी में एक खबर छपी कि भड़ास के संपादक यशवंत को सहारा मीडिया के बड़े पदाधिकारी ने वीडियो प्रकाशन के लिए धमकी दी, खबर देखा तो पढ़ने लगा, तब तक नीचे लिंक भी था ऑडियो का, जिसमें स्वतंत्र मिश्र और यशवंत सिंह के बीच वार्तालाप थी. जिसमें वार्तालाप कम स्वतंत्र जी का प्रलाप ज्यादा सुनाई दिया.