काशी में बजा था पहले स्‍वतंत्रता संग्राम का बिगुल

: शिवाला युद्ध के दो सौ तीस साल : घोड़े पर हौदा-हाथी पर जीन/ चुपके से भागा वारेन हेस्टिंग. यह कहावत आज भी बनारस (काशी या फिर वाराणसी के नाम से जानते हैं) क़ी गलियों में पुराने लोगों के बीच लोकप्रिय है. इसके पीछे एक कहानी है. कहते हैं कि आज से लगभग दो सौ तीस साल पहले काशी राज्य क़ी तुलना देश क़ी बड़ी रियासतों में क़ी जाती थी. भौगोलिक दृष्टिकोण से काशी राज्य भारत का ह्रदय प्रदेश था. जिसे देखते हुए उन दिनों ब्रिटिश संसद में यह बात उठाई गई थी कि यदि काशी राज्य ब्रिटिश हुकूमत के हाथ आ जाये तो उनकी अर्थ व्यवस्था तथा व्यापार का काफी विकास होगा.

आठ साल में 9.18 करोड़ से 365 करोड़ क़ी संपत्ति बनाई जगन रेड्डी ने

प्रदीप श्रीवास्‍तवआन्ध्र प्रदेश के रायलसीमा क्षेत्र के कडप्पा लोकसभा एवं पुलिवेंदुला विधान सभा निर्वाचन क्षेत्र के लिये हो रहे उप चुनाव पर न केवल प्रदेश क़ी जनता क़ी निगाहें लगी हैं अपितु कांग्रेस क़ी प्रतिष्ठा का सवाल भी बना हुआ है. पुलिवेंदुला में जेठ व भयो (जेठ वाईएस राजशेखर रेड्डी के बड़े भाई वाईएस विवेकानंद एवं भयो वाईएस राजशेखर रेड्डी क़ी पत्नी श्रीमती विजय लक्ष्मी) के बीच टक्कर है.  पता हो कि कांग्रेस से नाराज प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री स्व. वाईएस राजशेखर रेड्डी के सांसद बेटे वाईएस जगन मोहन रेड्डी ने कडप्पा लोकसभा सीट एवं उनकी मां श्रीमती वाईएस विजयलक्ष्मी ने पुलिवेंदुला विधान सभा सीट से पार्टी में अनदेखी के चलते त्याग पत्र दे दिया था. जिसके कारण आठ मई को वहाँ पर उपचुनाव हो रहे हैं. इस बार मां एवं बेटे दोनों ही कांग्रेस के झंडे के नीचे चुनाव न लड़कर स्वयं क़ी बनाई वाईएस कांग्रेस पार्टी के बैनर तले ही चुनाव लड़ रहे हैं.

छोटे राज्‍यों का निर्माण होना चाहिए : बाबा रामदेव

प्रदीप श्रीवास्‍तवयोग गुरु बाबा रामदेव का कहना है कि सन 2014 के आम चुनाव के पहले ही मध्यावधि चुनाव होने की पूरी संभावनाएं दिखाई दे रही हैं. यह बात भारत स्वाभिमान यात्रा पर निकले बाबा ने निज़ामाबाद में आयोजित योग शिविर के बाद इन पंक्तियों के लेखक के साथ एक विशेष बातचीत में कही. जब बाबा से यह पूछा गया कि क्या आप अगल चुनाव लड़ने का मान बना रहे हैं? इस पर बाबा रामदेव ने कहा कि मैं स्वयं तो चुनाव नहीं लडूंगा, लेकिन मेरी पार्टी जरुर देश से भ्रष्टाचार मिटने के लिए लडे़गी. बाबा ने यह भी कहा कि बास आप जून तक प्रतीक्षा करें, उसके बाद भारत स्वाभिमान पार्टी के इरादों के बारे में पता चल जायेगा.

श्रीकृष्‍णा समिति की रिपोर्ट को लेकर सरकार चौकस

प्रदीप अपने समय सीमा के भीतर ही पृथक तेलंगाना राज्य के लिये गठित श्री कृष्ण समिति ने गुरुवार की दोपहर बाद केंद्रीय गृह मंत्री पी.चितम्बरम  को  अपनी रिपोर्ट सौंप दी. जिसमे कमेटी ने पृथक राज्य के लिये चार से पांच सुझाव दिए हैं. रिपोर्ट लेने के बाद गृह मंत्री ने दिल्ली में पत्रकारों से कहा की सरकार रिपोर्ट के सन्दर्भ में पांच जनवरी को आन्ध्र प्रदेश की सभी 6 प्रमुख राजनितिक पार्टियों की बैठक में इस बात पर विचार-विमर्श करेंगे, उसके बाद 6 जनवरी की शाम तक इस रिपोर्ट को सार्वजानिक कर दिया जायेगा. आंध्र प्रदेश में अचानक तैनात किये गए सुरक्षा सैनिकों के जवाब में कहा कि यह केवल एहतियात के तौर पर ऐसा किया गया है. गृह मंत्री ने यह भी कहा कि मुझे आन्ध्र प्रदेश के लोगों पर पूरा विश्वास है कि वे शांति व्यवस्था बनाये रखेंगे. उधर, दूसरी तरफ रिपोर्ट सौपने के बाद विज्ञान भवन से बाहर आने के बाद कमेटी के अध्यक्ष अवकाश प्राप्त न्यायमूर्ति श्री कृष्ण ने कहा कि रिपोर्ट दो भागों में है, जिसे सभी पहलुओं पर गंभीरता से विचार के बाद तैयार किया गया है. अब सरकार के हाथ में है कि वह उसे किस तरह से लागू करती है.

चंद्रबाबू के समर्थन में कई पार्टियां एकजुट

प्रदीपजीनिज़ामाबाद : आन्ध्र प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री एवं तेलगु देशम पार्टी के मुखिया एन चन्द्रबाबू नायडू की अचानक हालत बिगड़ जाने के कारण देर रात टास्क फ़ोर्स ने उन्हें अपने कस्‍टडी में लेकर हैदराबाद स्थित निम्स (निजाम इंस्टीट्यूट आफ मेडिकल साइंस) में भर्ती करवाया. जहां पर उनकी हालत स्थिर बनी हुई थी. गौरतलब है कि बाबू प्रदेश में प्राकृतिक आपदाओं के कारण अपनी फसल खो देने वाले किसानों को सरकार से उनका मुआवजा बढ़ाने और देने की मांग को लेकर पिछले तीन दिनों से एमएलए क्वार्टर के बाहर अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर बैठे थे. इस दौरान जब डाक्टरों ने उनके स्वास्थ का नियमित परीक्षण किया तो पाया कि बाबू के ब्लड प्रेशर में गिरावट होने के साथ-साथ ब्लड सुगर की मात्रा में काफी कमी है. जिसकी सूचना तुरंत सरकार को दी गई. जिसके बाद देर रात बाबू को अनशन छोड़ने का अनुरोध किया गया, लेकिन बाबू जब नहीं माने तो टास्क फ़ोर्स ने उन्हें गिरफ्तार कर निम्स में भर्ती करवा दिया. जहां पर उनकी हालत ठीक बताई गई.

कुरान की सबसे छोटी प्रति उस्‍मानाबाद में!

प्रदीपधार्मिक ग्रन्थ कुरान की सबसे छोटी मुद्रित प्रति महाराष्ट्र के उस्मानाबाद जिले में रहने वाले साधारण परिवार के अलिमोदीन काजी साहब के पास है. जिनको यह प्रति उनके पर दादा से मिली थी, जो हैदराबाद के निजाम के यहाँ काम करते थे. बताते हैं कि कुरान कि यह प्रति लगभग ईसा पूर्व 610 से 632 के बीच है. जिसकी लम्बाई 2.5 सेंटी मीटर एवम चौड़ाई 1 .7 सेंटी मीटर है. जिस सफ़ेद कागज पर कुरान कि आयते छपी हैं.  उसकी मोटाई 0.6 सेंटी मीटर है. अलिमोदीन के अनुसार इस छोटे से कागज पर कुरान कि आयते लिखी गयी है वह 1.9 सेंटी मीटर ऊंचाई एवं 1.3 सेंटीमीटर चौड़ाई का भाग है. जिसमे सभी सुरह एवं आयतें छपी हैं, मसलन सभी 114 सुराहा एवं 30 आयतें.

विश्‍व क्षितिज पर चमकेगा हिन्‍दी का सूर्य

प्रदीप  श्रीवास्‍तव संविधान का जैसा उल्लंघन भारत में होता है, वैसा दुनिया में कहीं नहीं होता. 14 सितम्बर 1949 को संविधान में हिंदी को राजभाषा बनाया गया और कहा गया कि धीरे-धीरे अंग्रेजी को हटाया जायेगा, लेकिन संविधान को लागू हुए 61 वर्ष हो गए हैं, इन 61 सालों में हुआ क्या? यही ना कि अंग्रेजी को जमाया जाय और अंग्रेजी जम गयी. ऐसी जमी कि राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री तक हिंदी में बोलने से कतराते हैं. उन्हें अंग्रेजी का लफ्ज प्रयोग करने में जरा सी भी शर्म नहीं आती है. वे जरा भी नहीं सोचते कि हम आजाद भारत देश के जनप्रतिनिधि हैं. जब वे अंग्रेजी में बोलते हैं तो उन्हें देश की सौ करोड़ से ज्‍यादा गूंगी-बहरी जनता सुन रही होती है? क्योंकि वे तो केवल पांच से सात प्रतिशत जनता के लिये रेडियो या टेलीविजन पर बोल रहे होते हैं.

नई-पुरानी सभ्‍यताओं का समागम है कटक

कटक : एशिया का एकमात्र चावल अनुसंधान केन्‍द्र यहीं पर स्थित है : ‘कटक’ उड़ीसा की प्राचीन राजधानी. जिसका इतिहास हजार वर्षों से भी पुराना बताया जाता है. जो वर्तमान राजधानी ‘भुवनेश्वर’ से लगभग 35 किलोमीटर दूर हावड़ा रेल मार्ग पर स्थित है. कटक में आपको पुरानी और नई संस्कृति का समागम कभी भी देखने का मौका मिल जायेगा. जनवरी माह का अंतिम सप्ताह, कटक के थियेटर मूवमेंट द्वारा आयोजित पंद्रह दिवसीय नाट्य एवम नृत्य समारोह के आमंत्रण पर में सिकंदराबाद से विशाखा एक्सप्रेस से सपरिवार भुनेश्वर पहुंचे, अठारह घंटे के सफ़र ने थका दिया था. कटक रेलवे स्टेशन के पास के एक होटल में हम लोगों ने डेरा डाला. विश्राम करने के बाद कार्क्रम में भाग लिया.

कौन जानता है पिंगली वेंकैय्या को!

[caption id="attachment_2360" align="alignleft" width="96"]प्रदीप श्रीवास्‍तवप्रदीपजी[/caption]: राष्‍ट्रीय ध्‍वज के निर्माता हैं पिंगली : वेंकैय्या द्वारा किये गए कार्य की न तो भारत सरकार ने और ना ही कांग्रेस ने सही ढंग से आदर दिया है : पंद्रह अगस्त को जहां हम स्वतंत्रता दिवस कि 63 वीं वर्षगांठ मना रहे होंगे वहीं दूसरी ओर अपने राष्ट्रीय झंड़े की संरचना करने वाले पिंगली वेंकैय्या को कोई भी याद तक नहीं करेगा. राष्‍ट्रीय ध्वज की डिजाईन तैयार करने वाले स्वर्गीय पिंगली वेंकैय्या का जन्म आन्ध्र प्रदेश के कृष्‍णा जिले के “दीवी” तहसील के “भटाला पेनमरू” नामक गाँव में दो अगस्त 1878 को हुआ था. उनके पिता का नाम पिंगली हनमंत रायडू एवं माता का नाम वेंकटरत्‍न्‍म्‍मा था. पिंगली वेंकैय्या ने प्रारंभिक शिक्षा भटाला पेनमरू एवं मछलीपट्टनम से प्राप्त करने के बाद 19 वर्ष कि उम्र में मुंबई चले गए.

उपचुनाव परिणाम नहीं, जन आक्रोश है

प्रदीप श्रीवास्‍तव: पृथक राज्‍य का मुद्दा केन्‍द्र सरकार के पाले में : हाल में तेलंगाना के 119 विधान सभा सीटों में से 12 बारह सीटों के लिये हुए उप चुनाव में 11 सीटों पर तेलंगाना राष्ट्र समिति के उम्मीदवारों ने सफलता हासिल की. एक मात्र निज़ामाबाद शहर की सीट पर( तेलंगाना राष्ट्र समिति द्वारा समर्थित ) भारतीय जनता पार्टी के उम्मीदवार वाई लक्ष्मीनारायण की झोली में गया. इस चुनाव परिणाम को पूरे तेलंगाना क्षेत्र की जनाभिव्यक्ति नहीं माना जा सकता है, लेकिन इस बात से इनकार भी नहीं किया जा सकता है कि बारह सीटों के लिये हुए यह चुनाव केवल विधान सभा की खाली हुई बारह सीटों कों भरने का उपक्रम नहीं, बल्कि तेलंगाना क्षेत्र में कराया गया एक जनमत संग्रह था. क्योंकि इन बारह सीटों के चुनाव से तेलंगाना क्षेत्र की सभी 119 सीटों की जन भावनाएं सिमटी हुईं थीं.

पैसे से मतदाता के मन को नहीं खरीद सकते : कविता

तेलंगाना राष्‍ट्र समिति के अध्‍यक्ष के चंद्रशेखर राव की पुत्री एवं तेलंगाना जन जागृति की प्रदेश अध्‍यक्ष कविता से प्रदीप श्रीवास्‍तव ने बातचीत की. कविता से पार्टी की भावी योजना, उनकी खुद के भविष्‍य की योजना तथा तेलंगाना राज्‍य के मुद्दे पर कई बातें हुई. प्रस्‍तुत है कविता से हुई बातचीत के प्रमुख अंश- एडिटर

[caption id="attachment_2349" align="alignleft" width="99"]कविताकविता[/caption]कविता ने कहा तेलंगाना के मुद्दे ने दिलाई उपचुनाव में टीआरएस को भारी जीत : उपचुनाव में मिली तेलंगाना राष्ट्र समिति की सफलता ने केवल आंध्र प्रदेश की जनता को ही नहीं बल्कि पूरे देश को यह दिखला दिया है कि तेलंगाना की जनता चाहती है कि पृथक तेलंगाना राज्य का गठन हो. यह विचार इस सवांददाता के साथ एक बातचीत में टीआरएस मुखिया के चन्द्रशेखर राव की बेटी एवं तेलंगाना जन जागृति की प्रदेश अध्यक्ष सुश्री कविता ने कही. उन्होंने आगे कहा कि इस बार के चुनाव में कई प्रदेश के कई रिकार्ड भी टूटे हैं. प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष का एक ही प्रत्याशी से दो बार हारना, तेदेपा जैसी बड़ी पार्टी के उम्मीदवारों की जमानतें जब्त हो जाना मुख्य है. सुश्री कविता ने आगे कहा कि इस उपचुनाव से एक बात और सिद्ध हो गई कि पैसे से आप मतदाता के मन को नहीं खरीद सकते हैं