समाज-सरोकार
सब अपनी कहने को व्याकुल, मैं अपनी किसे सुनाऊं, हर घर लंका, हर घर में रावण, इतने राम कहां से लाऊ, सब अपने घाव...
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सब अपनी कहने को व्याकुल, मैं अपनी किसे सुनाऊं, हर घर लंका, हर घर में रावण, इतने राम कहां से लाऊ, सब अपने घाव...