बिहार की दामिनियों की इन समाजसेवियों को याद तक नहीं आती

दोस्तों, दिल्ली में “दामिनी” के साथ हुई घटना को अब एक साल बीत गया है। इस एक साल के अंदर देश और प्रदेश में परिस्थितियां बहुत बदली हैं। देश में रेप रोकने का सख्त कानून बन चुका है। दिल्ली में दामिनी के साथ जो कुछ हुआ था, उसके बाद से अबतक 4 और घटनायें हो चुकी हैं। एक तो अभी हाल ही में नयी दिल्ली स्टेशन के पास में हुआ है। देश की कामर्शियल राजधानी मुंबई में एक महिला पत्रकार के साथ गैंगरेप हुआ।
 
वैसे देश के अन्य राज्यों की बात छोड़ केवल अपने राज्य बिहार की बात करें तो शायद ही कोई ऐसा दिन हो, जिस दिन कोई न कोई दामिनी हवस के दरिंदों का शिकार नहीं बनती है। बीते एक साल में बलात्कार की घटनाओं की कुल संख्या 972 हो चुकी है। यह आंकड़ा अक्टूबर 2013 तक का है। अगर इसी सरकारी आंकड़े को आधार मानें तो प्रतिदिन तीन बेटियां “दामिनी” बनती हैं।
 
सवाल उठता है कि आखिर क्या करेगा कानून और उसे क्या करना चाहिए। सरकार के पास अपने तर्क हैं और जैसा कि उसके मुखिया आये दिन कहते रहते हैं कि बिहार में कानून का राज है। कानून अपना काम कर रहा है। हंसी आती है बिहार के इस दुर्भाग्य पर जब बिहार में एक सामाजिक कार्यकर्ता की पत्नी का रेप कर उसके गुपतांग में पत्थर डाल दिया जाता है, वह मर जाती है और फ़िर भी यह खबर पटना से प्रकाशित होने वाले अखबारों के लिए कोई खबर नहीं बनती। हद तो तब हो गयी जब छह महीने की बच्ची के साथ बलात्कार होता है और बिहार के मुख्यमंत्री कहते हैं कानून का राज है। आखिर कैसा है यह कानून का राज?
 
सवाल उठना लाजमी है। एक घटना राजधानी पटना के हृदयास्थली इलाके की है। करीब तीन महीना पहले आयकर गोलंबर के पास वह स्थल जहां पहले बाल श्रमिक आयोग का कार्यालय था उसके ठीक पीछे एक स्लम बस्ती नाले पर बसी थी। एक महिला शौच करने के लिए अपने झोपड़ी से बाहर निकली थी और फ़िर वह हवस के दरिंदों के हाथ लग गयी। जिस दिन यह घटना घटी, पटना पुलिस हाथ पर हाथ धरे बैठी रही। जब कुछ संगठनों ने इस मामले को उठाया तब जाकर पुलिस ने पीड़िता की प्राथमिकी को दर्ज किया और फ़िर अपराधियों को पकड़ने की कार्रवाई शुरु की गयी।
 
बहरहाल, बिहार में रोज बनती “दामिनी” की यह फ़ेहरिस्त बहुत लंबी है। अब चूंकि राज्य के मुख्यमंत्री ही बिहार में कानून के राज की दुहाई दे रहे हैं फ़िर इन 'दामिनियों' की कौन सुने। सबसे अधिक दिलचस्प तो तब होता है जब दिल्ली और मुंबई जैसे महानगरों में 'दामिनी' की घटना पर पटना में कुछ एलीट महिलायें और पुरुष मोमबत्तियां जलाने निकल जाती हैं और वही दामिनी जब बिहार की बेटी होती है तब इन महान समाजसेवियों को उनकी याद तक नहीं आती है।
 
                 लेखक नवल कुमार www.apnabihar.org के संपादक हैं. इनसे nawal.buildindia@gmail.com के जरिए संपर्क किया जा सकता है.

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