Nadim S. Akhter : ये सन्नाटा सालता है…गुजरात में नए टाइप का लोकायुक्त बनाया गया है…ऐसा लोकपाल जिसे नरेंद्र मोदी दिन कहे तो वह कहे दिन और जिसे मोदी कहे कि कान पकड़ो तो वह नाक-कान दोनों पकड़ ले…पूरा सरकारी लोकपाल…लेकिन 'मजबूत लोकपाल की अलख' जगाने वाले अन्ना हजारे एंड टीम का कोई रिएक्शन नहीं आया इस पर…सब चुपचाप हैं…अरविंद केजरीवाल तो अब राजनीतिज्ञ बन गए हैं, सो उनसे कुछ expect करना वैसे भी बेइमानी है…लेकिन अन्ना की खामोशी बहुत कुछ कहती है…
नरेंद्र मोदी ने लोकपाल के मुद्दे पर गुजरात हाई कोर्ट से लेकर सुप्रीम कोर्ट तक लड़ाई लड़ी लेकिन हार गए…अंत में नया कानून ही बना डाला, जिसके मुताबिक लोकपाल उनकी जेब में रहे…आश्रचर्य नहीं कि बीजेपी वाहवाही कर रही है और कांग्रेस चुप है क्योंकि मजबूत लोकपाल की वकालत अगर कांग्रेस करेगी, तो उनका भी तो गला फंसेगा…ईमानदार कौन है यहां…'आ बैल मुझे मार" कौन कहेगा भला…
एक वक्त था, जब 'मजबूत लोकपाल' को लेकर अन्ना हजारे ने पूरे देश में हायतौबा मचा रखी थी…मैं भी गया था वहां…लेकिन अंततः वही हुआ, जो होना था…अन्ना को जोश ठंढा पड़ गया…पब्लिक ने हाथ-पैर समेट लिया और अरविंद केजरीवाल को राजनीति के शहद की मिठास लुभा गई…किरण बेदी से लेकर सब आपस में ही उलझ पड़े, कि मलाई कौन खाएगा…यानी तथाकथित आंदोलन चारों खाने चित….
अब अन्ना देशभ्रमण पर निकले हैं…क्या होगा इससे…पब्लिक भाव नहीं देने वाली….उसका भरोसा आप पर से भी उठ गया है…ये जो पब्लिक है, वह बलिदान मांगती है, फिर गुणगान करती है…क्या जरूरत थी आधा-अधूरा अनशन करके उसे बीच में तोड़ने की…जान दे देते तो आप शहीद कहलाते और पब्लिक मूर्ति बनाकर किसी चौराहे पर टांग देती….अब तो खुमार उतर चुका है…डरी सरकार अब सीना ताने खड़ी है…कौन सी सिविल सोसायटी और कैसी सिविल सोसायटी…कैसी जनता…सब सरकार की जूती के नीचे !!!
तेजतर्रार पत्रकार नदीम एस. अख्तर के फेसबुक वॉल से.





