Amit Tripathi : एक स्क्रिप्ट राइटर हैं.. क्या लिखते हैं वो… लफ्जों में ललकार… आवाज में तड़प… शब्द-शब्द संघर्ष.. उन्हें सुनकर ऐसा लगता है जैसे कोई कानों में दहकते अंगारे छोड़ रहा हो… जैसे दिल में भरा दर्द का प्याला छलका जा रहा हो.. जैसे कोई अंतरात्मा में अचानक घुस जाए… और उन्मत्त होकर तांडव करने लगे… उनके शब्दों में स्वाभिमान की झंकार है, आदर्शों का ज्वार है.. इंसानियत की चीत्कार है… पहली बार मैंने उन्हें STAR NEWS पर सुना था.. राज ठाकरे की करतूत पर लिखा गया था पैकेज… और मैं उस आवाज के प्रति सम्मोहित सा हो गया.. उस कमरे में जितने भी लोग थे सब ठिठक गए.. सुनने लगे गौर से… और जब पैकेज खत्म हुआ तो तारीफ में शब्द कम पड़ रहे थे…
आजकल वो AAJTAK चैनल के लिए लिखते हैं… मैं ऐसे ढेर सारे लोगों को जानता हूं जो केवल उनका पैकेज, उनकी आवाज सुनने के लिए तय समय पर आजतक देखते हैं, जो उनके मुरीद हैं.. मेरा दोस्त अजीत त्रिपाठी तो उन्हें ‘द्रोण’ और खुद को ‘एकलव्य’ कहता है… शायद देशभर में जो जहां भी उन्हें सुनता होगा.. उसका मन खबर लिखने वाले की तारीफ किए बिना नहीं मानता होगा..

लेकिन विडंबना है… कि शब्दों के उस जादूगर का नाम मैंने आज तक किसी चैनल पर नहीं सुना… साइन ऑफ या तो किसी रिपोर्टर का होता है या फिर ‘ब्यूरो रिपोर्ट’.. मैं मीडिया की परंपरा से वाकिफ हूं… लेकिन कुछ लोग होते हैं.. जिन्हें सम्मान देने के लिए ऐसे छोटे-मोटे कायदे-कानून ताक पर रख दिए जाते हैं.. रख दिए जाने चाहिए… जैसे हॉकी में ध्यान चंद, जैसे क्रिकेट में सचिन.. जैसे राजनेताओं में अटल जी… मैं आजतक के प्रबंधन से निवेदन करना चाहता हूं.. कि ‘नवीन कुमार’ जी के लिए भी ऐसा किया जाए.. जिस खबर पर वो लिखते हैं… उसमें ( खबर लाने वाले के साथ जोड़कर ही सही.. ) अंतिम लाइन में ‘नवीन कुमार’ शब्द की गूंज जरुर होनी चाहिए.
अमित त्रिपाठी के फेसबुक वॉल से.





