नई दिल्ली : नई दिल्ली। सहारा समूह ने गुरुवार को भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (सेबी) पर पलटवार करते हुए निवेशकों को 20000 करोड़ रुपए लौटाने के अपने दावे को सही ठहराया। सहारा समूह ने सेबी को अमीरों का नियामक करार देते हुए कहा कि उसे छोटे निवेशकों की स्थिति के बारे में अंदाजा नहीं है। इस बहुचर्चित मामले में अपने निवेशकों के आधार का ब्योरा देते हुए कंपनी ने कहा कि उसके कुल निवेशकों की संख्या 3.07 करोड़ है, जिसमें से 2.99 करोड़ लोग अधिकतम 20,000 रुपए तक के निवेशक हैं। इनमें से करीब 90 फीसदी निवेशकों का पैसा लौटा दिया गया है, जो पूरी तरह उचित है।
सहारा समूह ने दावा किया कि 1.33 करोड़ निवेशक ऐसे हैं जिन्होंने 5,000-5,000 रुपए जमा कराए थे। वहीं 88 लाख निवेशक 10,000 रुपए प्रत्येक, 42 लाख 15,000 रुपए प्रत्येक तथा 36 लाख 20,000-20,000 रुपए जमा कराने वाले हैं। सहारा समूह का नाम लिए बिना सेबी प्रमुख यूके सिन्हा ने बुधवार को एक संगोष्ठी में सहारा समूह द्वारा निवेशकों के 20,000 करोड़ रुपए लौटाने के दावे पर सवाल उठाया था। सिन्हा ने कहा था इस पर सोचें कि यह कितना व्यावहारिक है, उनकी यह कहानी कितनी विश्वसनीय है।
सेबी प्रमुख के बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए सहारा ने आज जारी बयान में कहा है कि सेबी गरीब निवेशकों की स्थिति के बारे में नहीं जानता और न ही उनको पहचानता है। सेबी प्रमुख को इस प्रकार का गैर जिम्मेदाराना बयान नहीं देना चाहिए कि किस तरह चार महीनों में 20,000 करोड़ रुपए का भुगतान किया गया। पिछले साल उच्चतम न्यायालय ने सहारा समूह की दो कंपनियों को निवेशकों का 24,000 करोड़ रुपए लौटाने का निर्देश दिया था। सेबी को निवेशकों के धन लौटाने के काम को पूरा करवाना है।
हालांकि समूह ने दावा किया कि इसमें से ज्यादातर राशि लौटाई जा चुकी है और निवेशकों का कुल बकाया 5,120 करोड़ रुपए से कम है। समूह द्वारा यह राशि सेबी के पास जमा कराई गई है। सहारा ने बयान में कहा कि सेबी के चेयरमैन पिछले एक साल से उसके चेयरमैन को मिलने का समय नहीं दे रहे हैं और न ही वे टीवी पर बहस के लिए तैयार हैं। निवेशकों का पैसा नकद लौटाने को उचित ठहराते हुए सहारा ने कहा कि हमने सेबी को कई बार लिखा है कि हमारे निवेशक काफी छोटे हैं जो छोटे कस्बों या ग्रामीण इलाकों में रहते हैं। ये निवेशक बैंक के पास नहीं जाते, न ही बैंक उनके पास आता है। सेबी के चेयरमैन से माफी मांगने की मांग करते हुए सहारा समूह ने कहा कि 20,000 करोड़ रुपए का नकद भुगतान देश के कानून के तहत किया गया है और उसके खातों में कोई भी जाली या नकली निवेशक नहीं है। समूह ने स्पष्ट किया है कि यह ज्यादातर राशि पिछले 5 माह से अधिक समय के दौरान लौटाई गई है। (भाषा)





