Dilnawaz Pasha : आज शाम शहीद डीएसपी जिया उल हक की बेवा परवीन आजाद का एसएमएस मिला। एसएमएस से पता चला कि कल जिया उल हक साहब का चालीसवां है। यानि कल उनके शहादत को पूरे चालीस दिन हो जाएंगे। इन बीते चालीस दिनों में उत्तर प्रदेश के सियासी रहनुमा जिया उल हक की कब्र पर गए और फातेहा पढ़ी।
राहुल गांधी, नसीमुद्दीन सिद्दीकी, मुख्यमंत्री अखिलेश यादव…और न जाने कौन-कौन। सभी ने जिया उल हक की रूह को इंसाफ दिलाने की बात की। मैं जिया के गांव गया था, उनकी जवान बेवा और बूढ़ी मां से मिला था।….उनकी कब्र पर जाकर फातेहा भी पढ़ी थी…और फातेहा पढ़ते वक्त यह दुआ भी मांगी थी कि उनकी शहादत ईमानदार लोगों में नया जज्बा पैदा करे और उनकी मरहूम रूह को इंसाफ मिले।

वह न सिर्फ एक बेहद ईमानदार अफसर, अच्छे शौहर और प्यारे बेटे थे बल्कि एक अहम भारतीय नागरिक भी थे। उनकी मौत से जितना नुकसान उनके परिवार को हुआ है उससे ज्यादा हमारे समाज और देश को हुआ है। वक्त की जरूरत है कि हम इस नुकसान की भरपाई करने की कोशिश करें… और इन बीते चालीस दिनों में बहुत कुछ हुआ है। सीबीआई ने लगभग यह कह ही दिया है कि राजा भैया का हाथ जिया उल हक की मौत में नहीं है….हाईकोर्ट ने सरकार से पूछ लिया है कि जिया उल हक के परिवार को दो नौकरियां किस आधार पर दी गईं… और न जाने क्या-क्या कहा और सुना गया है….
खैर इस सबके बीच बस यही दुआ है कि जिया उल के असली कातिल अपने अंजाम तक पहुंचे, उनकी शहादत कौम और देश में नया जज्बा पैदा करे…ईमानदारों को हौसला दे…. ये जिया उल हक की कब्र है…हो सके तो इस कब्र को देखकर दुआ पढ़ लीजिए….और एक सवाल खुद से कर लीजिये कि हमारे मुल्क में हालात ऐसे क्यों हैं कि ईमानदार और अच्छे लोग कब्र में सो रहे हैं और बुरे और बेईमान लोग राज कर रहे हैं? इस सवाल का जबाव मिले तो जरूर साझा कीजियेगा…हो सकता है आपका जबाव ही हम जैसों को नई रोशनी दे दे…
भास्कर के पत्रकार दिलनवाज पाशा के फेसबुक वॉल से.





