आप सब जितना मजाक उड़ा लें स्वतंत्र मिश्रा जी का लेकिन आपको ये बात तो माननी पड़ेगी कि आज भी संसार में ऐसे लोग हैं, जो श्राप देने की हिम्मत रखते हैं, ये जानते हुए भी कि इस श्राप का कोई असर नहीं होगा. मैं तो टेप सुन के थोड़े समय के लिए सोच में पड़ गया कि आप ने तो एक ऐसे आदमी की तथाकथित सच्चाई दिखने की कोशिश की जो न जाने कितने गरीब बच्चों के पढ़ाई का खर्च उठाता है, वृद्धा आश्रम जाता है और न जाने कितने ऐसे काम करके पुण्य प्राप्त करने में लगा रहता है ताकि वक़्त आने पे दूसरों को श्राप दे सके.
और तो और मिश्रा जी ने तो ये भी कहा कि उनका कोई बाल भी बांका नहीं कर सकता क्यूंकि उनके पास बहुत अच्छे कर्म और पुण्य हैं. इनकी बात सुनने के बाद मुझे लगा कि फिर तो संजय दत्त और सलमान खान जैसा व्यक्ति तो खामखाह ही वकीलों को इतने पैसे देते हैं खुद का केस लड़ने के लिए, जितना भी हो इनके पास तो मिश्रा जी से ज्यादा पुण्य होगा, दत्त साहब का तो कैंसर हॉस्पिटल है और खान भाई का "BEING HUMAN". और न जाने कितने लोगों का भला किया है इन दोनों ने. मेरे ख्याल से आप अगर मिश्रा जी और इनका संपर्क कर दो ये सितारे भी जान जायेंगे कि कैसे अच्छे कर्मों का "fixed Deposite" तोड़ते हैं.
टेप सुनते वक़्त मुझे लगा कि लगता है आप कल का सूरज नहीं देखोगे. अरिंदम चौधरी का भी आत्म विश्वास डगमगा जाये मिश्रा जी आत्मविश्वास के सामने. मिश्रा जी अगर आप ये पढ़ रहे हैं तो एक निवेदन है कि अगर आपका और आपके परिवार का पुण्य थोड़ा बचा हो यशवंत जी को श्राप देने के बाद तो कृपा कर हम भारतवासियों को इन भ्रष्ट नेताओं के चंगुल से भी बचाएं, इन्हें भी श्राप दे डालो और मेरे हिसाब से इन नेता लोगों का तो पाप का घड़ा लगभग भर चुका होगा, तो आपकी थोड़ी अलौकिक शक्ति में तो ये निपट ही जायेंगे. मानता हूँ कि यशवंत जी के चक्कर में आपका संचित पुण्य काफी खर्च हो गया होगा, क्यूंकि यशवंत जी के अच्छे कर्म भी बहुतेरे हैं तो इनके नाश में तो ज्यादा खर्च आएगा ही, लेकिन थोड़ी सुधि इस देवभूमि, क्रन्तिभूमि की भी कर दें, क्या पता जो काम शहीद-ए-आजम, आजाद और अशफाक उल्ला साहब जैसे लाखों शहीद नहीं कर पाए आपके थोड़े से पुण्य के खर्च पर हो जाये. ध्यान दें और जगत का कल्याण करें.
(नमस्ते यशवंत जी, मैं तो मीडिया का नहीं हूँ. हाँ, आपका शुभचिन्तक जरूर हूँ. 'स्वतंत्र मिश्रा को गुस्सा कब और क्यों आता है?' वाला टेप सुनने के बाद दिल में कुछ भाव उत्पन्न हुये हैं, अगर आपको सही लगे तो प्रकशित कर दें. अभी २७ का ही हूँ इसलिए भाव दिल में ही उत्पन्न होते हैं ह्रदय तक पहुँचने में अभी थोड़ा वक़्त है.)
विवेक कुमार






