: कानाफूसी : इस घटना पर किसी को आश्चर्य नहीं हुआ। पिछले साल भर से गोरखपुर दैनिक जागरण की जो स्थितियां हैं यह तो कभी न कभी होना ही था। अपनी पुरानी आदत के अनुसार स्टेट हेड ने मीटिंग में एक समाचार प्रतिनिधि को डांटना फटकारना और नौकरी से निकालने की धमकी देना शुरू किया। मुख्य महाप्रबंधक को बर्दाश्त नहीं हुआ और वे फट पड़े। फिर तो जो जो हुआ उसे बयान नहीं किया जा सकता। मीटिंग में मौजूद लोगों का कहना है कि स्टेट हेड के लिए इस घटना के बाद पुराने ढर्रे पर चलना मुश्किल होगा।
गोरखपुर जनपद के समाचार प्रतिनिधियों और तहसील प्रभारियों की बैठक थी। बैठक कक्ष में महाप्रबंधक लगभग आधा घंटा देर से पहुंचे। इस बीच स्टेट हेड रामेश्वर पाण्डेय उर्फ काका, शैलेन्द्र मणि त्रिपाठी, इनपुट इंचार्ज केके शुक्ला, आउटपुट इंचार्ज राजेश सिंह, डाक प्रभारी सतीश शुक्ला, गोरखपुर ग्रामीण के इंचार्ज श्यामनारायण भट्ट और समाचार प्रतिनिधियों ने अपनी जगह ले ली थी। मुख्य महाप्रबंधक की मीटिंग कक्ष में घुसते ही त्योरियां तन गई जब उन्होंने देखा कि उनकी कुर्सी पर रामेश्वर पाण्डेय विराजमान हैं।
उन्होंने इसे नजरअंदाज करते हुए मीटिंग शुरू कराई। चूंकि उनकी नियुक्ति के बाद प्रतिनिधियों के साथ उनकी पहली बैठक थी लिहाजा पहले उन्होंने अपना परिचय दिया इसके बाद प्रतिनिधियों और बाकी लोगों ने बारी बारी अपना परिचय कराया। सहजनवा तहसील की रिपोर्टिंग से बैठक का आगाज हुआ। मुख्य महाप्रबंधक ने जानना चाहा कि चार महीने पहले वहां के प्रभारी को गोरखपुर बुला लिया गया था यह कहते हुए कि वहां काम ठीक से नहीं हो रहा है। अब क्या वजह हुई कि चार महीने बाद पिफर उसे वापस सहजनवा भेजा गया है। इसके जवाब में स्टेट हेड ने कुछ कहा।
मुख्य महाप्रबंधक को यह अच्छा नहीं लगा। इसके बाद चौरी चौरा तहसील की बारी आई। यहां के प्रभारी भगवानदास दूबे ने अपनी रिपोर्टिंग शुरू की। अभी वह अपनी बात रख ही रहे थे कि स्टेट हेड ने गुस्से में हस्तक्षेप करते हुए उन्हें रोक दिया और कहा कि तुम्हे कुछ आता जाता नहीं, तुम्हारा रवैया ठीक नहीं हुआ तो तुम्हें निकाल बाहर करूंगा।
इसके बाद तो अचानक माहौल ही बदल गया। पहले से भरे बैठे मुख्य महाप्रबंधक भड़क गए। वे उठ खड़े हुए और स्टेट हेड को इंगित करते हुए बोले- शटअप, नान सेंस, इडियट। तुम कौन होते हो यहां किसी को निकालने वाले। एक तो तुम इतने नानसेंस हो कि मेरी कुर्सी पर आकर बैठ गए। जिस पर बैठने का अधिकार या तो मुझे है या फिर निदेशकगण को। तुम डाइरेक्टर बन रहे हो। तुम्हारे पास एक पैसे की तमीज नहीं है। मैं तुमसे उम्र में भी सीनियर हूं, पद में भी सीनियर हूं। पांच पांच यूनिटों का संपादक रह चुका हूं। तुम किसी यूनिट में संपादक रहे हो। ताल तिकड़म करके यहां गोलबंदी कर रहे हो। दो साल से तुम यहां देख रहे हो और पूरी यूनिट को गर्त में पहुंचा दिया है।
मीटिंग में मौजूद लोगों का कहना है कि मुख्य महाप्रबंधक का पारा इतना हाई था कि वे बातचीत के दौरान ही स्टेट हेड की तरफ लपक पड़े। स्टेट हेड भी इसको भांपते हुए पीछे हट गए। यहीं नहीं तत्काल क्षमा मांगने लगे। पर इस पर भी मुख्य महाप्रबंधक का गुस्सा शांत नहीं हुआ। उन्होंने कहना जारी रखा- सीजीएम मैं हूं। यहां प्रसार, विज्ञापन और संपादकीय सब मेरे अंडर में है। तुम कहते हो केके शुक्ला संपादकीय प्रभारी है। जिसको एक पैसे की तमीज नहीं है। जिसने यहां का माहौल खराब कर दिया है। और तुम हो कि यहां आकर उसके पक्ष में लाबीइंग कर रहे हो। तुम्हारे पास प्रधान सम्पादक का कोई आदेश है उसको संपादकीय प्रभारी बनाने का। तुम जिस भी संस्था में रहे हो उसे बरबाद करने के अलावा तुमने किया क्या है। यह सब चल ही रहा था कि प्रबंधक सुनील कुमार लददू धीरे से उठकर बाहर जाने लगे।
मुख्य महाप्रबंधक ने उन्हें रोका और कहा बैठो अभी, सुन लो ध्यान से, जो आदेश, निर्देश सुनोगे, मेरा सुनोगे। बताते हैं कि यह सब लगभग 40 मिनट तक चला। इस दौरान स्टेट हेड ने धीरे से अपनी कुर्सी भी बदल ली। और बार बार क्षमा मांगते रहे। मगर मुख्य महाप्रबंधक ने जैसे सबकुछ कह ही देने का मन बना लिया था। उन्होंने कहा पाण्डेय सुधर जाओ नहीं तो मैं सुधारना बहुत ठीक से जानता हूं।
इस घटना से मीटिंग हाल में मौजूद सभी लोग भौचक थे। मीटिंग तो खैर आगे नहीं हो पाई। अलबत्ता पूरे शहर में इस पूरे प्रकरण की खबर आग की तरह फैल गई। शाम को जागरण कार्यालय में स्टेट हेड ने मुख्य महाप्रबंधक से मिलना चाहा लेकिन उन्होंने मना कर दिया। सूत्रों के अनुसार रात को दस बजे इनपुट इंचार्ज केके शुक्ला के साथ मुख्य महाप्रबंधक के आवास पर देखे गए। यहां भी पैर पकड़ने और मान मनौव्वल का खेल चला लेकिन मामला बना नहीं। इसके बाद स्टेट हेड ने अपने कुछ खास ब्यूरो प्रभारियों, कार्यालय में कार्यरत इंचार्जों और कुछ रिपोर्टरों के साथ एक होटल में 11 बजे रात को गोपनीय बैठक कर मामले को दरहम करने की रणनीति बनाई।
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