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बरेली

रपड़ा कांड में कोर्ट ने सुनाया ऐतिहासिक फैसला, 16 आरोपियों को उम्र कैद

: छह लोगों की मुकदमें सुनवाई के दौरान मौत, 36 गवाहों ने दी गवाही, एक अभियुक्त बरी : शाहजहांपुर। 23 साल पहले पूरे प्रदेश को हिलाकर रख देने वाले रपड़ा कांड का आज कोर्ट ने फैसला सुना दिया। एडीजे-6 सुरेश चंद्र सैनी ने चार लोगों के सामूहिक हत्याकांड में 16 अभियुक्तों को उम्रकैद की सजा सुनाई। इस जघन्य हत्याकांड में 23 अभियुक्तों के खिलाफ मुकदमा चला। जिनमें से छह लोगों की मुकदमे की सुनवाई के दौरान ही मौत हो गई। एक अभियुक्त को कोर्ट ने साक्ष्यों के अभाव में बरी कर दिया। कोर्ट ने सभी पर पचास-पचास हजार रुपये का जुर्माना भी बोला है, जिसका 60 फीसदी मारे गए लोगों के परिजनों को दिए जाने के आदेश दिए हैं।

: छह लोगों की मुकदमें सुनवाई के दौरान मौत, 36 गवाहों ने दी गवाही, एक अभियुक्त बरी : शाहजहांपुर। 23 साल पहले पूरे प्रदेश को हिलाकर रख देने वाले रपड़ा कांड का आज कोर्ट ने फैसला सुना दिया। एडीजे-6 सुरेश चंद्र सैनी ने चार लोगों के सामूहिक हत्याकांड में 16 अभियुक्तों को उम्रकैद की सजा सुनाई। इस जघन्य हत्याकांड में 23 अभियुक्तों के खिलाफ मुकदमा चला। जिनमें से छह लोगों की मुकदमे की सुनवाई के दौरान ही मौत हो गई। एक अभियुक्त को कोर्ट ने साक्ष्यों के अभाव में बरी कर दिया। कोर्ट ने सभी पर पचास-पचास हजार रुपये का जुर्माना भी बोला है, जिसका 60 फीसदी मारे गए लोगों के परिजनों को दिए जाने के आदेश दिए हैं।

यह चैहरा हत्याकांड थाना जैतीपुर (अब थाना गढि़या रंगीन) थाना क्षेत्र के रपड़ा गांव में 14 जुलाई 1990 को हुआ था। वह शनिवार का दिन था, जो उस गांव के लिए काला साबित हुआ। एफआईआर के अनुसार 14 जुलाई को गांव के राजेश्वर सिंह अपने भाई ओमेंद्र सिंह व परिजन धनपाल और नत्थूसिंह के साथ घर में बैठा था। तभी हथियारबंद लोगों ने हमला कर दिया। हमलावरों ने लूटपाट व फायरिंग करते हुए राजेश्वर, ओमेंद्र, धनपाल व नत्थू को पकड़ लिया और घसीटते हुए ले गए। फायरिंग में गांव का शिवदास और रामपाल की बेटी राजेश्वरी छर्रे लगने से घायल हुई थी। हमलावरों ने चारों लोगों की हत्या कर लाश को बहगुल नदी में बहा दिया। इस घटना ने जिले ही नहीं, पूरे प्रदेश को झकझोर कर रख दिया था। पुलिस ने 15 जुलाई को रपड़ा के राजकिशोर सिंह पुत्र भगवान सिंह की ओर से मावड़ गांव के रामसिंह, नौवत, एबरन, अभिलाख, बनवारी, ननकू, सत्यपाल, बुद्धन, बरी प्रसिद्धपुर के कलुआ, मंगू, रामकिशन, बांके, जगदीश, ओमकार, रामकुमार, नगला देहात माली के ऋषिपाल व रामभरोसे, जलेबी नगला के रघुराई, नरसिंह, निहालुद्दीन और बदायूं जिले के थाना हजरतपुर अंतर्गत ग्राम कुड़रा निवासी नेत्रपाल, झंडू व श्रीकृष्ण के खिलाफ धारा 395, 396, 397, 427, 364, 201, 302, 307, 436, 412 आइपीसी व 27 आर्म्‍स एक्ट के तहत रिपोर्ट दर्ज की थी। विवेचना के बाद पुलिस ने चार्जशीट न्यायालय में प्रस्तुत कर दी।

23 साल तक चली लंबी सुनवाई के दौरान छह अभियुक्तों रामसिंह, नौवत, एबरन, ननकू, रामकुमार व झंडू की मौत हो गई। मुकदमे में 36 गवाहों ने गवाही दी। वादी और बचाव पक्ष को सुनने के बाद एडीजे-6 सुरेश चंद्र सैनी ने सरकारी वकील मनफूल सिंह वर्मा के तर्कों से सहमत होते हुए 16 अभियुक्तों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई। एक अभियुक्त नगला देहात के रामभरोसे को साक्ष्यों के अभाव में बरी कर दिया। एडीजे ने सभी अभियुक्तों पर पचास पचास हजार रुपयें का जुर्माना भी बोला। सत्यापाल, बुद्धपाल, बनवारी और ऋषिपाल पर तीन-तीन हजार रुपयें का अतिरिक्त जुर्माना बोला। इसमें साठ फीसदी रकम मारे गए लोगों के परिजनों को देने के आदेश दिए गए हैं। इस चैहरे हत्याकांड की वजह खून का बदला खून थी। बरी प्रसिद्धपुर का रामचरन यादव रपड़ा गांव में रहता था। 1990 में जाड़ों के दिनों में रामचरन यादव की हत्या कर दी गई। रामचरन की हत्या का आरोप गांव के ठाकुर धनपाल, नत्थूसिंह, राजेश्वर सिंह व ओमेंद्र सिंह पर था। उसी की हत्या का बदला लेने के लिए 14 जुलाई को उन चारों की हत्या कर दी गई।

रपड़ा कांड में 16 को उम्र कैद और पचास-पचास हजार रुपयें के जुर्माने की सजा सुनाई गई है। हमे उम्मीद थी कि इस मामले में सभी को फांसी की सजा मिलेगी। – मनफूल सिंह वर्मा सरकारी वकील

शाहजहांपुर से सौरभ दीक्षित की रिपोर्ट.

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