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लोकमत के दीप भव के लोकार्पण पर जुटे मीडिया के दिग्गज

महाराष्ट्र के अग्रणी हिंदी दैनिक ‘लोकमत समाचार’ ने कला, साहित्य और पत्रकारिता के आकाश में नई उड़ान भरते हुए राष्ट्रीय राजधानी से अपनी नई वार्षिकी ‘दीप भव’ का शुभारंभ किया. इस मौके पर जहां लोकमत समाचार की नई पहल का स्वागत किया गया, वहीं कला और साहित्य के क्षेत्र में बढ़ते बाजारीकरण पर चिंता भी व्यक्त की गई.

महाराष्ट्र के अग्रणी हिंदी दैनिक ‘लोकमत समाचार’ ने कला, साहित्य और पत्रकारिता के आकाश में नई उड़ान भरते हुए राष्ट्रीय राजधानी से अपनी नई वार्षिकी ‘दीप भव’ का शुभारंभ किया. इस मौके पर जहां लोकमत समाचार की नई पहल का स्वागत किया गया, वहीं कला और साहित्य के क्षेत्र में बढ़ते बाजारीकरण पर चिंता भी व्यक्त की गई.

इंडिया इंटरनेशनल सेंटर में शनिवार को हुए एक गरिमामय कार्यक्रम में ‘लोकमत समाचार’ की नई प्रस्तुति को रसिकों को अर्पित करने के लिए सुप्रसिद्ध साहित्यकार कृष्णकुमार, कवि, आलोचक अशोक वाजपेयी, जानी-मानी भारतीय शास्त्रीय नृत्यांगना सोनल मानसिंह, चित्रकार जतिन दास, रंगकर्मी कीर्ति जैन, आलोचक कुलदीप कुमार, अपूर्वानंद, लोकमत मीडिया लिमिटेड के चेयरमैन, सांसद विजय दर्डा और कार्यकारी संचालक करण दर्डा मौजूद थे. इस मौके पर वार्षिकी के लोकार्पण के अलावा ‘हमारी स्थिति’ शीर्षक से रचनात्मक क्षेत्र के वर्तमान हालातों पर विचार- विमर्श किया गया.

सुप्रसिद्ध आलोचक अशोक वाजपेयी ने कहा कि युवाओं में ललित कलाओं के प्रति आकर्षण बढ़ा है, लेकिन कुछ क्षेत्रों में विस्फोट हो रहा है, ‘हम सुन कम रहे हैं, देख ज्यादा रहे हैं. आज लोगों को सोचने और विचार करने के लिए प्रवृत्त करने की जरूरत है.’ कार्यक्रम के मुख्य अतिथि कृष्णकुमार ने शिक्षा के क्षेत्र में आ रही बाधाओं पर प्रकाश डालते हुए कहा कि संसद के माध्यम से शिक्षा के अधिकार का कानून बन जाने के बावजूद अनेक बाधाएं दिखाई दे रही हैं. उन्होंने कहा कि बच्चों को लेकर आज भी हमारे देश में स्थिति स्पष्ट नहीं है. उन्होंने सवाल किया – ‘क्या बच्चे महत्वपूर्ण नहीं हैं?’

शास्त्रीय नृत्यांगना सोनल मानसिंह ने नृत्य जगत में मूल्यों के क्षरण पर चिंता जताई. उन्होंने कहा कि नृत्य को बेचे जाने के चलते उसमें खोट आने लगी है. उन्होंने सृजन क्षेत्र में तकनीक को लाए जाने पर भी आपत्ति दर्ज कराते हुए कहा कि कला जगत में आज दिखावा काफी बढ़ गया है. उन्होंने वर्तमान समय में नृत्य चेतना जगाने पर बल दिया.

चित्रकार जतिन दास ने चित्रकला के क्षेत्र में हो रहे बदलावों पर विचार रखते हुए कहा-‘कुछ लोग बचपन से पारंपरिक कलाओं को सिखाने का विरोध करते हैं. वह उसे बाल मजदूरी मानकर विरोध करते हैं. वे पढ़े-लिखे लोग झूठे हैं.’ उन्होंने आज के तकनीकी युग में कला रस गुम होने पर चिंता जताई और उसे जगाने पर बल दिया. रंगकर्मी कीर्ति जैन ने सृजन क्षेत्र में नकारात्मक दृष्टि से बचते हुए कहा कि सारी गड़बड़ियों के बावजूद कुछ नया भी है. लोग नई दिशा में कार्यरत हैं. पहले शिक्षा में रंगमंच को लेकर सवाल उठाए जाते थे, लेकिन आज अभिभावक स्वयं रंगमंच कला सिखाए जाने को लेकर शिक्षकों से संपर्क कर रहे हैं. उन्होंने कहा कि नए प्रयासों से रंगमंच के क्षेत्र में एक नई ऊर्जा आ रही है.

चर्चा में आलोचक कुलदीप कुमार ने संगीत में घरानों के टूटने को अच्छा बताया, मगर यह भी कहा कि आज कौन क्या गा रहा है, यह भी पता नहीं चल पा रहा है. उनके अनुसार आज नकल की बढ़ती प्रवृत्ति पर भी विचार करने की जरूरत है. उन्होंने संगीत में तकनीक को अधिक दोष न देते हुए उसके सही इस्तेमाल पर बल दिया और कहा कि तकनीकी परिवर्तन अपरिहार्य है. एक अन्य आलोचक अपूर्वानंद ने समाज और संस्कृति से शिक्षा का संबंध जोड़ते हुए रेखांकित किया कि विद्यार्थियों की नाकामी के पीछे बहुत हद तक शिक्षक जिम्मेदार हैं. उन्होंने संस्कृति और शिक्षा के तालमेल में चल रहे घालमेल पर भी सवाल खड़े किए. उन्होंने शिक्षा के क्षेत्र में उत्तरदायित्व निर्धारित करने पर बल दिया.

शुरुआत में लोकमत मीडिया लिमिटेड के अध्यक्ष व सांसद विजय दर्डा ने स्वागत भाषण करते हुए कहा, ‘हम मराठी भाषी क्षेत्र में हिंदी की अलख लंबे अरसे से जगा रहे हैं. हमारे लिए महात्मा गांधी की वह सोच अनुकरणीय है, जिसमें उन्होंने कहा था कि हिंदी ही देश की एकता और अखंडता को सुरक्षित और संवर्धित कर सकती है.’ उन्होंने कहा कि ‘दीप भव’ साहित्य कला वार्षिकी हर एक सुर को जोड़ने की अभिव्यक्ति है. उन्होंने कहा कि देश की राजधानी में ‘दीप भव’ का विमोचन समारोह सबको जोड़ने और एक साथ लेकर चलने का परिचायक है. उन्होंने कहा कि लोकमत परिवार के पितृ पुरुष, वरिष्ठ स्वतंत्रता संग्राम सेनानी स्व. जवाहरलाल दर्डा ने महात्मा गांधी की रहनुमाई में हिंदी के प्रति जो पहल की, आज भी लोकमत परिवार उन्हीं आदर्शो, मूल्यों और संस्कारों को अपनी पूंजी मानता है.

कार्यक्रम के आरंभ में सभी अतिथियों का स्वागत लोकमत मीडिया लिमिटेड के कार्यकारी संचालक करण दर्डा, लोकमत समाचार के संपादक गिरीश मिश्र, विकास मिश्र, लोकमत के दिल्ली ब्यूरो प्रमुख शीलेश शर्मा, आशीष जैन, प्रलय नंदा और लोकमत समाचार के प्रोडक्ट हेड मतीन खान ने किया. गिरीश मिश्र ने कार्यक्रम की भूमिका रखी और संचालन किया.

इस मौके पर दिल्ली प्रेस के प्रमुख परेशनाथ, ‘दैनिक भास्कर’ के समूह संपादक श्रवण गर्ग, जी-न्यूज के संपादक पुण्य प्रसून वाजपेयी, भारत के पूर्व राजदूत और लेखक गौरीशंकर राजहंस, न्यूज एक्सप्रेस टीवी के प्रधान संपादक मुकेश कुमार, वरिष्ठ पत्रकार बनारसी सिंह, अवधेश कुमार, हरीश गुप्ता, अजय झा, राज्यसभा टीवी के सहायक संपादक अरविंद कुमार सिंह, आउटलुक की फीचर संपादक गीताश्री, ‘अमर उजाला’ के सहयोगी संपादक संजय देव, लेखक प्रदीप सरदाना, वर्ग पहेली स्तंभकार हरीश सांसी, डीप वाटर ड्रिलिंग इंडस्ट्रीज के चेयरमैन नरेश कुमार, मध्य प्रदेश फाउंडेशन के महासचिव हरीश भल्ला, न्यूज-24 के ग्राफिक डिजाइनर माधव जोशी सहित पत्रकारिता, कला और उद्योग जगत से जुड़ी अनेक हस्तियां मौजूद थीं. प्रेस रिलीज

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