Shahnawaz Malik : जब 15 अगस्त 1947 की आधी रात देश आजादी के जश्न में डूबा था, तब महात्मा गांधी बंगाल और पंजाब में जारी कत्लो-ग़ारत से परेशान थे। वे अमन बहाली के लिए बंगाल के बेलियाघाट में उपवास कर रहे थे। हिन्दुस्तान की आजादी के उस ऐतिहासिक क्षण में बीबीसी ने महात्मा गांधी का संदेश प्रसारित करने का फैसला किया, लेकिन गांधी ने मना कर दिया। बीबीसी ने कहा कि गांधी हकीकत में हिन्दुस्तानी आवाम की दुनिया में नुमाइंदगी करते हैं। उनके संदेश को दुनिया की कई भाषाओं में अनुदित किया जाएगा, लिहाज़ा उनका संदेश जरूरी है।
महात्मा गांधी ने जवाब दिया कि मैं अंग्रेजी नहीं जानता, आप नेहरू से बात कर लीजिए। दो सूबों में जारी दंगों से खिन्न महात्मा गांधी ने आजादी का जश्न मनाने की बजाय 24 घंटे का उपवास रखा था। आजादी के मौके पर उन्होंने अपना संदेश बीबीसी को देने की बजाय बेलियाघाट के मैदान में खड़े होकर दिया। 10 से 30 हजार लोगों की भीड़ ने उनका भाषण सुना। इस घटना का ज़िक्र यहां इसलिए जरूरी है क्योंकि केजरीवाल एंड कंपनी की सबसे बड़ी छटपटाहट मीडिया में उनके मुताबिक स्पेस का ना मिल पाना है। उनके नेता, कार्यकर्ता और स्वयंसेवक मीडिया कवरेज ना मिलने पर छाती पीट रहे हैं। केजरीवाल एंड कंपनी के अमल में गांधी नदारद हैं। सिर्फ गांधी टोपी, सत्याग्रह और असहयोग आंदोलन जैसे नाम से केजरीवाल महात्मा गांधी को कैश नहीं करवा पा रहे हैं।
Siddharth Kalhans : केजरी जिसे मीडिया ने पैदा किया वो आज मीडिया को गाली दे रहे हैं। जबकि हम सब जानते हैं कि मीडिया में उनको हीरो बनाने वाले तथाकथित क्रांतिकारी आज भी रोज शाम गलाफाड़ एंकरिंग करते हैं। मीडिया के लिए अब केजरी इस्तेमाल हो चुके कंडोम हैं। खुद केजरी एक दिग्भ्रमित आदमी है जिसे नही पता कि करना क्या है। मुट्ठी भर स्वर्ण, शहरी, सफेदपोश जो वोट डाल देने भर पर –जागो रे जागो जागो रे जागो रे—बड़ी ड्यूटी, बड़ी पत्ती जैसे नारे वाले हैं, इनके दम पर केजरी ने एक सपना देखा था। टूट गया। वैसे भी आईपीएल आ गया, नया सेशन है। केजरी साहब घर बैठो। गरमी बहुत है।
पत्रकार द्वय शाहनवाज मलिक और सिद्धार्थ कलहंस के फेसबुक वॉल से.





