इलाहाबाद। वो तीन दोस्त घर से निकले थे फुटबाल खेलने। मगर जिंदगी ने उनके साथ ‘खेल’ कर दिया। गंगा नदी नहाते तीन युवक गहरे पानी में डूब गए। तीन घंटे बाद गोताखोरों ने तीनों शव नदी से बाहर निकाला। इलाहाबाद में गंगा-यमुना नदियों में स्नान करते लोगों के डूबकर मर जाने के हादसे बढ़े हैं। खासकर, शिवकुटी में तो गंगा जीवनदायिनी नहीं, ‘मौत-दायिनी’ साबित हो रही हैं। गंगा घाट दुरुस्त नहीं किए जा रहे। गोताखोर और जल पुलिस की तैनाती नहीं की जा रही है। हादसे हो रहे हैं और प्रशासन महज फर्ज अदायगी करने तक सीमित रह गया है। जवान बेटों की मौत से तीन पड़ोसी परिवारों की खुशियां छिन गईं।
इलाहाबाद शहर के शिवकुटी इलाके में सात अप्रैल को उस समय हड़कंप मच गया जब पूरा गड़रिया मोहल्ला के नदीम कॉलोनी में रहने वाले तीन घर के जवान बच्चे रोहित, सिद्धार्थ और शुभम मौत की भेंट चढ़ गए। तीनों आपस में दोस्त थे, और नारायणी आश्रम स्कूल में ग्यारहवीं कक्षा में पढ़ रहे थे। नदीम कॉलोनी में रहने वाले अशोक अग्रवाल, विश्वनाथ और वीरेंद्र प्रसाद पड़ोसी हैं। इनके बेटे रोहित, सिद्धार्थ, शुभम एक ही स्कूल और क्लास होने से आपस में दोस्त बन चुके थे। सात अप्रैल को सुबह तीनों फुटबाल खेलने के लिए घर से निकले। रास्ते में उनके तीन दोस्त और मिले। इस बीच प्लान बदल गया और छह दोस्त सीधे चले गए शिकुटी किनारे सीताराम गंगा तट पर नदी नहाने। वहीं नहाते समय रोहित, सिद्धार्थ और शुभम गहरे पानी में डूबने लगे। पानी में डूबते देख घाट पर हंड़कंप मच गया। चीख पुकार सुन वहां आसपास से लोग आ जुटे। गोताखोरों ने तीनों युवकों के शव बाहर निकाले। अस्पताल ले जाने पर डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। सिद्धार्थ इकलौता बेटा था।
गंगाघाट बने जानलेवा पर प्रशासन गंभीर नहीं : शिवकुटी के गंगाघाट खतरनाक साबित हो रहे हैं। हादसे लगातार हो रहे हैं पर प्रशासन इस तरफ ध्यान नहीं दे रहा है। दो महीने पहले मौनी अमावस्या स्नान पर्व पर शिवकुटी गंगा तट पर दो छात्र सचिन मिश्र और अनुराग वर्मा स्नान करते समय डूब गए थे। गोंडा जिले के अनुराग वर्मा और इलाहाबाद जिले के होलागढ़ के रहने वाले सचिन को उनके गार्जियंस ने पढ़-लिखकर भविष्य बनाने को यहां भेजा था। दोनों एक साथ रहकर प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी कर रहे थे।
इलाहाबाद से शिवाशंकर पांडेय की रिपोर्ट.






