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इंडिया टीवी में हर शख्स परेशान सा क्यूं है… ( दो महीने में दर्जन भर से ज्यादा लोगों ने क्यों इस्तीफा दिया)

इंडिया टीवी का हाल बेहाल है. यहां काम करने वाला हर शख्स परेशान सा है. इसी कारण जिसे ज्यों कहीं मौका मिल रहा है, निकल ले रहा है. यहां सेलरी काफी कम मिलती है. सेलरी में वृद्धि भी काफी कम हुई है. काम के घंटे बहुत ज्यादा हैं. आफिस इतना दूर है कि लोग अपने घर से आफिस पहुंचते पहुंचते आधी एनर्जी खो देते हैं. काम करते वक्त बात बात पर डांट मिलती है. टीआरपी में नंबर वन पोजीशन न मिलने से परेशान संपादक विनोद कापड़ी हर वक्त एग्रेसिव मोड में रहते हैं और सामने पड़ने वाले पर शख्स को धो कर रख देते हैं. यही वजह है कि हर कोई यहां एक एक दिन गिन कर काम करता है.

इंडिया टीवी का हाल बेहाल है. यहां काम करने वाला हर शख्स परेशान सा है. इसी कारण जिसे ज्यों कहीं मौका मिल रहा है, निकल ले रहा है. यहां सेलरी काफी कम मिलती है. सेलरी में वृद्धि भी काफी कम हुई है. काम के घंटे बहुत ज्यादा हैं. आफिस इतना दूर है कि लोग अपने घर से आफिस पहुंचते पहुंचते आधी एनर्जी खो देते हैं. काम करते वक्त बात बात पर डांट मिलती है. टीआरपी में नंबर वन पोजीशन न मिलने से परेशान संपादक विनोद कापड़ी हर वक्त एग्रेसिव मोड में रहते हैं और सामने पड़ने वाले पर शख्स को धो कर रख देते हैं. यही वजह है कि हर कोई यहां एक एक दिन गिन कर काम करता है.

पिछले दो महीने में जिन कुछ लोगों ने इंडिया टीवी को अलविदा कहा है, उनके नाम इस प्रकार हैं… कुन्दन श्रीवास्तव ने इस्तीफा देकर तेज चैनल ज्वाइन किया. पशुपति शर्मा न्यूज नेशन गए. अजय आजाद ने इंडिया न्यूज ज्वाइन किया. अभिषेक भी इंडिया न्यूज गए हैं. आनन्द कुमार ने न्यूज एक्स के साथ नई पारी शुरू की. मनीष कुमार भी इंडिया न्यूज के साथ जुड़ गए हैं. सत्य प्रकाश भी इंडिया न्यूज के साथ हो लिए. सुधांशु वत्स ने भी मौका मिलते ही इंडिया टीवी छोड़कर इंडिया न्यूज के साथ नाता जोड़ लिया. रिमझिम कुमार इस्तीफा देकर सहारा के साथ हो लिए. आशुतोष शुक्ल ने इंडिया न्यूज ज्वाइन किया. मयंक मिश्र इन दिनों इंडिया टीवी में नोटिस पीरियड पर चल रहे हैं.  कुन्दन शशिराज ने भी इंडिया टीवी छोड़ा पर वे गए कहां हैं, यह पता नहीं चल सका है. विकास कुमार ने तेज चैनल के साथ जुड़ना पसंद किया. आलोक पांडे ने इंडिया टीवी छोड़कर न्यूज एक्सप्रेस के साथ नई पारी शुरू की. डोभाल भी न्यूज एक्सप्रेस वाले हो गए हैं. सनद कुमार ने जी न्यूज ज्वाइन किया.

इतने सारे लोगों के चले जाने से सबसे ज्यादा परेशानी विनोद कापड़ी को हो रही है. वे जिस तरह की स्क्रिप्टिंग, पैकेजिंग, प्रोग्रामिंग चाहते हैं, उसे कोई समझने वाला रह नहीं गया. यही कारण है कि उन्हें फिर से नए लोगों को ट्रेंड कर अपने अनुकूल बनाना पड़ रहा है. इस प्रक्रिया में डांट फटकार चिल्लाना हड़काना आम बात है. जिन कुछ नए लोगों ने इंडिया टीवी के साथ नई पारी शुरू की है, उनके नाम इस तरह हैं.. मोहित शंकर तिवारी ने इंडिया टीवी में इनपुट हेड के बतौर ज्वाइन किया. दीप उपाध्याय ने आउटपुट हेड के तौर पर इंडिया टीवी में अपनी पारी शुरू की. शीतल तिवारी, सुधाकर भी इंडिया टीवी के साथ जुड़ गए हैं. राजीव रंजन और अभिषेक उपाध्याय इंडिया टीवी में रिपोर्टिंग टीम के नए सदस्य बने हैं.

जानकार बताते हैं कि रजत शर्मा की संपादकीय पालिसी से सबसे ज्यादा नुकसान विनोद कापड़ी का हो रहा है क्योंकि अच्छे लोगों के चले जाने से चैनल की टीआरपी पर सीधा असर पड़ रहा है. उधर, आजतक ने इंडिया टीवी को दो नंबर पर लगातार धकेले रखने के साथ ही दोनों के बीच का फासला भी काफी बड़ा कर दिया है. ऐसे में अब आजतक को नंबर एक की कुर्सी से हिला पाना विनोद कापड़ी के लिए असंभव हो चुका है. पर विनोद कापड़ी इंडिया टीवी को नंबर वन चैनल बनाने की जिद में खुद का और अपने सहकर्मियों के दिमाग व शरीर के स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ कर रहे हैं. लोग कहने लगे हैं कि इंडिया टीवी और उसकी स्टाइल से लोगबाग अब उब चुके हैं. वो कहते भी हैं न कि काठ की हांड़ी बार बार आग पर नहीं चढ़ाई जा सकती. (कानाफूसी)

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