Saumya Sharma : आज दैनिक जनवाणी द्वारा किये गए मेरे शोषण को पूरे ग्यारह महीने हो गए | पारिश्रमिक के इंतज़ार में ना जाने कब से पापड़ बेल रही | अब तो वो लोग मुझ पर हंसने भी लगे हैं, और हाँ, श्री नितिन बाजवा जो गोडविन हाउस और जनवाणी के मालिक हैं, वो तो भीगी बिल्ली बने बैठे हैं | इससे भी अधिक दुःख की बात यह है की इतने सारे पत्रकार एवं लेखक मित्र होने के बाद भी किसी ने अब तक सहायता के लिए हाथ नहीं बढ़ाया |
आज पता चल गया कि भारत में कलम की कोई ताकात नहीं | अब तो मैं चाहूँगी कि साहित्य और मीडिया दोनों देश से जड़ समेत खतम हो जाए | ना रहेगा बांस और ना ही बजेगी बिन मतलब के बांसुरी…
मुंबई की लेखिका सौम्या शर्मा के फेसबुक वॉल से. इस प्रकरण से जुड़ी शुरुआती खबर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें–
'जनवाणी' अखबार वाले पैसा नहीं दे रहे, लेखिका ने अपनी पीड़ा सार्वजनिक की





