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बिहार

सिंडिकेट चलाकर रेलवे के राजस्‍व को नुकसान पहुंचा रहा आरपीएफ, अखबार में नहीं छपती खबर

रोसड़ा। पूर्व मध्य रेलवे के रूसेराघाट रेलवे स्टेशन पर अवैध रूप से संचालित ऑटो पड़ाव इन दिनों आरपीएफ, स्थानीय दबंग एवं दोनों के बीच तालमेल करानेवाले बिचौलियों के लिए दहशत फैलाकर कमाने-खाने का जरिया बनकर रह गया है। ऐसा नहीं है कि इन सारी बातों की जानकारी स्थानीय अधिकारी, पुलिस, रेलवे के उच्चाधिकारी समेत रेल प्रशासन को नहीं है। लेकिन ऐसा होने के बावजूद भी रेलवे के समानान्तर सिस्टम बनाकर रेल राजस्व को हानि पहुंचाने वाले गिरोह का कोई कुछ भी नहीं बिगाड़ पा रहा है। यहां तक कि बिहार में नंबर 1 एवं नंबर 2 एवं नंबर 3 पर रहनेवाले समाचार-पत्र भी इस सिस्टम के खिलाफ प्रभावकारी खबर छापने से हिचकाते हैं।

रोसड़ा। पूर्व मध्य रेलवे के रूसेराघाट रेलवे स्टेशन पर अवैध रूप से संचालित ऑटो पड़ाव इन दिनों आरपीएफ, स्थानीय दबंग एवं दोनों के बीच तालमेल करानेवाले बिचौलियों के लिए दहशत फैलाकर कमाने-खाने का जरिया बनकर रह गया है। ऐसा नहीं है कि इन सारी बातों की जानकारी स्थानीय अधिकारी, पुलिस, रेलवे के उच्चाधिकारी समेत रेल प्रशासन को नहीं है। लेकिन ऐसा होने के बावजूद भी रेलवे के समानान्तर सिस्टम बनाकर रेल राजस्व को हानि पहुंचाने वाले गिरोह का कोई कुछ भी नहीं बिगाड़ पा रहा है। यहां तक कि बिहार में नंबर 1 एवं नंबर 2 एवं नंबर 3 पर रहनेवाले समाचार-पत्र भी इस सिस्टम के खिलाफ प्रभावकारी खबर छापने से हिचकाते हैं।

इस स्टेशन का मामला यह है कि अमान परिवर्त्तन के बाद इस रेलखंड पर रेल प्रशासन द्वारा यात्रियों की सुविधा की अनदेखी करते हुए सुविधाओं में कोई वृद्धि नहीं की गई है, जिसका फायदा रेलवे के अधिकारी एवं रेल पुलिस उठाने में कोई कोताही नहीं बरत रहे हैं। यात्री सुविधा पर ध्यान नहीं देने का तात्पर्य स्टेशन परिसर में वैद्य से खाने-पीने का कोई स्टॉल कार्यरत नहीं रहना, विधिवत रूप से रिक्शा एवं ऑटो पड़ाव की व्यवस्था नहीं करना, शीतल पेयजल की व्यवस्था आदि की ओर कोई ध्यान नहीं दिये जाने से स्थानीय बेरोजगार स्टेशन परिसर में यात्रियों की इन जरूरतों को पूरा कर अपनी रोजी-रोटी चला रहे हैं। लेकिन दुःखद पहलू यह है कि इन गरीब बेरोजगारों की मेहनत की कमाई का एक बड़ा हिस्सा आरपीएफ, स्थानीय दबंग एवं दोनों के बीच तालमेल करानेवाले बिचौलिये उनका भयादोहण करते हुए हड़प जाते हैं। जब कभी रेलवे के उच्चाधिकारियों का निरीक्षण आदि के क्रम के रूसेराघाट रेलवे स्टेशन आने का कार्यक्रम तय होता है तो रेल पुलिस बल प्रयोग कर कुछ घंटों के लिए स्थायी एवं अस्थाई अतिक्रमण को खाली करवा देती है लेकिन उसके बाद से ‘माल दो और जो करना है जैसे करना करते रहो………’ का पुराना ढ़र्रा कायम हो जाता है।

इन दिनों समस्तीपुर आरपीएफ इंस्टपेक्टर अनिल कुमार सिंह की नजर रूसेराघाट स्टेशन परिसर के इर्द-गिर्द ऑटो रिक्शा लगाकर कमा-खा रहे लोगों पर टिकी है। इन्होंने रेलवे के समानान्तर अपना एक सिण्डिकेट बना रखा है जिसमें बिचौलिये की भूमिका दैनिक यात्री संघ नामक संगठन से जुड़ा एक व्यक्त्ति निभा रहा है। उसने स्थानीय दबंगों के एक गिरोह को प्रति माह 15000 रुपये आरपीएफ इंस्पेक्टर को देते हुए टैम्पू चालकों एवं अनाधिकृत रूप से रेलवे परिसर में रोजी-रोजगार से जुड़े लोगों से मनमानी उगाही कर सकता है।

इस सिस्टम के मुताबिक हर ऑटो चालक को 10 रुपये प्रति खेप की दर से अवैध राशि देनी पड़ती है। हाल के दिनों में इस राशि को बढ़ाकर जब 20 रुपया कर दिया गया तो ऑटो चालकों ने अपने हाथ खड़े कर दिये और जबरन मांगी जा रही राशि देने से इनकार करने लगे। इसके बाद से आरपीएफ की मनमानी कार्यशैली ऑटो चालकों के लिए पेट पर लात मारने के समान है। इसके पूर्व भी कई बार अचानक धावा बोलकर आरपीएफ द्वारा अवैध वेंडरों एवं ऑटो चालकों को गिरफ्तार किया जा चुका है लेकिन बाद में उन्हें उनके द्वारा मांगी जा रही अवैध राशि नियमित रूप से दिये जाने की शर्त पर छोड़ दिया जाता है। अगर आरपीएफ की मंशा सही और वह सचमुच में स्टेशन परिसर में वैध व्यवस्था के पक्षधर है तो गिरफ्तार किये गये लोगों को बिना कार्रवाई के रिहा क्यों कर दिया जाता है?

मोटरवाहन कर्मचारी संघ के महामंत्री का कहना है : स्टेशन परिसर में ऑटो पड़ाव की वैध व्यवस्था करने हेतु 11.04.2013 को मंडल रेल कार्यालय के वाणिज्य प्रशाखा को संगठन के पत्रांक-44 के द्वारा ज्ञापन दिया गया। जब जब स्टेशन परिसर में ऑटो चालकों के साथ बदसलूकी हुई तब तब संगठन द्वारा मंडल रेल प्रबंधक, समस्तीपुर के अलावे अन्य विभागीय अधिकारियों को ज्ञापन सौंपकर विधिवत रूप से ऑटो पड़ाव की मंजूरी देने के साथ ही ऑटो चालकों के मानसिक एवं आर्थिक शोशण पर रोक लगाने हेतु आवेदन देकर मांग की गई। पिछले वर्ष भी संगठन ने अपने पत्रांक 53 दिनांक 04.09.2012 को फिर से मंडल रेल प्रबंधक, समस्तीपुर को आरपीएफ एवं स्थानीय दबंगों द्वारा किये जा रहे भ्रष्‍टाचार की जानकारी देते ऑटो पड़ाव की मांग को दोहराया गया। हाल के दिनों में भी 05.04.2013 को संगठन द्वारा पत्रांक 59 द्वारा जारी ज्ञापन में मंडल रेल प्रबंधक को उपर्युक्त बातों की जानकारी दी गई है। लेकिन आश्चर्य की बात है कि जब यह प्रमाणित है कि आरपीएफ की मनमानी कार्यशैली रेल राजस्व की हानि के साथ साथ प्रतिष्‍ठा भी धूमिल हो रही है, लेकिन बावजूद इसके किसी प्रकार की कार्रवाई नहीं होने से सहजता से अंदाजा लगाया जा सकता है कि नाजायज वसूली का बंटवारा किस तरह होता होगा, जो गलत करनेवालों का हौसला दिन-प्रतिदिन बुलंद होता जा रहा है। जब आरपीएफ की अवैध वसूली का विरोध किया गया तो संगठन के महामंत्री रामबाबू सिंह को मुकदमे में फंसाकर बबार्द करने की धमकी आरपीएफ इंस्पेक्टर द्वारा दी गई। इसके अलावा बिचौलिये की भूमिका निभानेवाले द्वारा देख लेने की धमकी दी जा रही है।

समस्‍तीपुर से विवेक कुमार सिन्‍हा की रिपोर्ट.

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