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डा. नूतन ठाकुर ने जागरण और उजाला में प्रकाशित सहारा के पेड न्‍यूज की शिकायत पीसीआई से की

बीते 20 मार्च को सहारा समूह के चेयरमैन सु्ब्रत रॉय की पौत्री रौशना का अन्‍नप्रासन समारोह दिल्‍ली में हुआ. इस समारोह के फोटो समेत एक छोटी खबर 25 मार्च को जागरण के एक पूरे पेज पर तथा 26 मार्च को भी इसी तरह का मिलती जुलती फोटो और खबर अमर उजाला में प्रकाशित हुई. यह दोनों खबरें पेड न्‍यूज की शक्‍ल में थीं. ऐसा इसलिए कि यह खबर कार्यक्रम के कई दिन बाद प्रकाशित हुआ था, दूसरे दो अखबारों में एक तरह की खबर प्रकाशित होना संयोग नहीं हो सकता.

बीते 20 मार्च को सहारा समूह के चेयरमैन सु्ब्रत रॉय की पौत्री रौशना का अन्‍नप्रासन समारोह दिल्‍ली में हुआ. इस समारोह के फोटो समेत एक छोटी खबर 25 मार्च को जागरण के एक पूरे पेज पर तथा 26 मार्च को भी इसी तरह का मिलती जुलती फोटो और खबर अमर उजाला में प्रकाशित हुई. यह दोनों खबरें पेड न्‍यूज की शक्‍ल में थीं. ऐसा इसलिए कि यह खबर कार्यक्रम के कई दिन बाद प्रकाशित हुआ था, दूसरे दो अखबारों में एक तरह की खबर प्रकाशित होना संयोग नहीं हो सकता.

दोनों अखबारों में पूरे एक पेज में प्रकाशित इस खबर में कहीं पर भी विज्ञापन शब्‍द नहीं लिखा हुआ था. पेड न्‍यूज के रूप में प्रकाशित इस खबर की शिकायत समा‍जिक कार्यकत्री डा. नूतन ठाकुर ने प्रेस काउंसिल ऑफ इंडिया के चेयरमैन जस्टिस मार्कंडेय काटजू से की है. अब देखना है कि डा. नूतन ठाकुर के इस शिकायत को प्रेस काउंसिल और पत्रकारिता में सरोकार को लेकर लगातार बयान देने वाले जस्टिस काटजू संज्ञान में लेते हैं या नहीं. नीचे डा. ठाकुर द्वारा भेजा गया पत्र.



सेवा में,

अध्यक्ष,
प्रेस काउन्सिल ऑफ इंडिया,
नयी दिल्ली 

विषय- दैनिक जागरण (25/03/2013) एवं अमर उजाला (दिनांक 26/03/2013) के समाचार  विषयक

महोदय,

कृपया निवेदन है कि मैं डॉ नूतन ठाकुर, एक सामाजिक कार्यकर्ता हूँ जो प्रशासन में पारदर्शिता एवं उत्तरदायित्व के क्षेत्र में कार्य करती  हूँ.

मैं आपके सम्मुख दैनिक जागरण समाचार पत्र में दिनांक 25/03/2013 (सोमवार) के लखनऊ नगर संस्करण में पृष्ठ संख्या 19 पर पूरे पृष्ठ में प्रकाशित “रोशना से रोशन हुई सहारा की शाम” शीर्षक समाचार की छायाप्रति प्रेषित कर रही हूँ. इस पृष्ठ में दिनांक 20/03/2013 को नयी दिल्ली के होटल अशोक में सहारा इंडिया परिवार के मुख्य अभिभावक श्री सुब्रत रॉय सहारा के एक व्यक्तिगत/निजी कार्यक्रम का चित्रों के साथ विस्तृत विवरण था. इस सामाचार की भाषा कुछ ऐसी थी कि साफ़ दिख रहा था कि यह कोई निष्पक्ष रूप से लिखा समाचार नहीं है अपितु एक विज्ञापन की तरह है. किसी भी समाचारपत्र में अपने स्वयं के समाचारपत्र से जुडी आयोजनों के अतिरिक्त कभी भी किसी तृतीय पार्टी के लिए इस प्रकार की खबरें कभी भी प्रकाशित नहीं होती हैं. खबरों का स्वरुप यह बता रहा था कि ये समाचार नहीं विज्ञापन है. लेकिन जो महत्वपूर्ण बात देखने योग्य है वह यह कि इस पृष्ठ पर कहीं भी यह अंकित नहीं है कि यह विज्ञापन (एडवर्टिजमेंट/एड) है.
स्वयं प्रेस काउन्सिल ने कई बार माना और कहा है कि इस प्रकार की खबरें पेड न्यूज़ की श्रेणी में आती हैं और पूर्णतया अपवर्जित हैं.

मैं इस सम्बन्ध में प्रेस काउन्सिल के रिपोर्ट दिनांक 30/07/2010 (Report on Paid News) से कुछ महत्वपूर्ण अंश प्रस्तुत करना चाहूंगी- “Paid News can be defined as “Any news or analysis appearing in any media (Print & Electronic) for a price in cash or kind as consideration” इसी रिपोर्ट में कहा गया था-“The guidelines of the Press Council of India that news should be clearly demarcated from advertisements by printing disclaimers, should be strictly enforced by all publications. As far as news is concerned, it must always carry a credit line and should be set in a typeface that would distinguish it from advertisements. The guidelines of the Council, as decided in 1996, are reproduced hereunder and efforts should be made to ensure that these are followed by all media organizations.”

हम सभी जानते और मानते हैं कि प्रत्येक समाचारपत्र को इस प्रकार के विज्ञापन छापने और प्रत्येक निजी व्यक्ति/संस्था को इस प्रकार के विज्ञापन छपवाने का पूरा विधिक अधिकार है लेकिन प्रेस काउन्सिल तथा अन्य संस्थाओं द्वारा विज्ञापनों को समाचार के रूप में छापने की प्रवृत्ति (पेड न्यूज़) पर बार-बार गहरी आपत्ति प्रकट की गयी है और इसे पूर्णतया निषिद्ध किया गया है. यदि किसी भी समाचारपत्र द्वारा अन्य नियमों का पालन करते हुए कोई भी विज्ञापन प्रकाशित किया जाता है तो मुझे अथवा किसी व्यक्ति को उस पर किसी पारकर का ऐतराज़ करने का कोई भी अधिकार नहीं है. लेकिन यदि समाचार बताए जाते हुए कोई विज्ञापन प्रकाशित किया जाए तो उचित नहीं कहा जाएगा.

इस कथित समाचार के प्रकाशित होने के अगले ही दिन दिनांक 26/03/2013 के लखनऊ अमर उजाला में पृष्ठ  15 पर इससे बिलकुल मिलती-जुलती खबर “रोशना की रौशनी से जगमगाती सहारा की शाम” उसी कार्यक्रम के सम्बन्ध में प्रकाशित हुई जहाँ ना सिर्फ समाचार की भाषा लगभग हूबहू दैनिक जागरण समाचार पत्र की भाषा की तरह थी बल्कि उसी प्रकार से पूरे पृष्ठ में तमाम चित्र भी बिखरे हुए थे जिनमे कई चित्र इन दोनों समाचारों में समान थे.

ऐसी दशा में मैं आपके समक्ष ये दोनों प्रकरण प्रस्तुत करते हुए नियमानुसार आवश्यक कार्यवाही किये जाने का अनुरोध करती हूँ ताकि पेड न्यूज़ की प्रवृत्ति पर पूरी तरह अंकुश लग सके. साथ ही मैं निवेदन करुँगी कि इन दोनों प्रकरणों को एक दृष्टान्त के रूप में लेते हुए अन्य सभी समाचारपत्रों को भी उचित निर्देश पारित करने की कृपा करें.

भवदीया,

डॉ. नूतन ठाकुर

5/426, विराम खंड,
 गोमती नगर, लखनऊ
  # 94155-34525

पत्रांक- NT/Paid/PCI/01
दिनांक- 28/03/2013  


इससे संबंधित खबरों को पढ़ने के लिए नीचे दिए गए लिंकों पर क्लिक करें –

दैनिक जागरण ने छापा सहारा समूह का पेड न्‍यूज!

सेबी के झटके से टूट चुके सहारा ने अमर उजाला में भी छपवाया पार्टी का विज्ञापन

सहारा ग्रुप के संकट पर ये दैनिक जागरण का मरहम है या भविष्‍य की तैयारी? 

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