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तानाशाह है एफएम गोल्ड का कार्यक्रम अधिशासी दानिश इकबाल

: पीड़ित कैजुवल प्रजेंटर दुष्यंत ने की लिखित शिकायत : सूचना एवं प्रसारण मंत्री को भेजा गया पत्र इस प्रकार है… : सेवा में, माननीय केन्द्रीय सूचना एवं प्रसारण मंत्री, भारत सरकार, शास्त्री भवन , नई दिल्ली -110001, विषय– आकाशवाणी दिल्ली केंद्र द्वारा प्रार्थी (ऍफ़. एम. गोल्ड प्रस्तोता) पर गैरकानूनी ढंग से प्रतिबंध लगाए जाने की शिकायत और प्रार्थी को न्याय दिए जाने तथा दोषियों पर सख्त कार्रवाई किए जाने की मांग,

: पीड़ित कैजुवल प्रजेंटर दुष्यंत ने की लिखित शिकायत : सूचना एवं प्रसारण मंत्री को भेजा गया पत्र इस प्रकार है… : सेवा में, माननीय केन्द्रीय सूचना एवं प्रसारण मंत्री, भारत सरकार, शास्त्री भवन , नई दिल्ली -110001, विषय– आकाशवाणी दिल्ली केंद्र द्वारा प्रार्थी (ऍफ़. एम. गोल्ड प्रस्तोता) पर गैरकानूनी ढंग से प्रतिबंध लगाए जाने की शिकायत और प्रार्थी को न्याय दिए जाने तथा दोषियों पर सख्त कार्रवाई किए जाने की मांग,

महोदय,

मैं, दुष्यंत, एफ़ एम गोल्ड रेडियो चैनल, दिल्ली पर कई वर्षों से प्रस्तोता के रूप में कार्य कर रहा हूँ. मैं गर्व के साथ कह सकता हूँ कि मैं आज तक आकाशवाणी की सेवा पूरी निष्ठा से करता आया हूँ. लेकिन मुझे यह खेद के साथ कहना पड़ रहा है कि पिछले कुछ वर्षों से इस रेडियो चैनल पर पूरी एकाग्रता और उत्साह से काम करना मुश्किल हुआ है जिसकी वजह से मुझे अक्सर मानसिक परेशानी से गुजरना पड़ा है.

अब जबकि पानी सिर पर से गुजरने लगा है, मैं यह शिकायत आपको प्रेषित करने को बाध्य हो रहा हूँ. मेरे साथ हाल ही में जो घटना घटी वह मुझे तो बुरी तरह पीड़ित और अपमानित कर ही रही है बल्कि यह आकाशवाणी की छवि पर भी सवाल खड़े कर रही है. मैं जिस घटना का उल्लेख करने जा रहा हूँ वह निश्चित रूप से किसी संवेदनशील और निष्पक्ष चरित्र के व्यक्ति को सोचने पर मजबूर कर सकती है. घटना इस प्रकार है-

गत 12 नवंबर, 2011 दिन शनिवार को रात 7-8 बजे के बीच मेरे पास ऍफ़ एम गोल्ड, दिल्ली के कार्यक्रम अधिशासी दानिश इकबाल का फोन आया. उन्होंने मुझसे कहा कि आपको अब ऍफ़एम गोल्ड  चैनल पर आने की जरूरत नहीं क्योंकि आप के ऍफ़एम गोल्ड पर कार्यक्रम करने पर हमेशा के लिए प्रतिबंध लगा दिया गया है. मैंने चौंककर इस प्रतिबंध की वजह पूछी जिसका कोई भी संतोषजनक उत्तर वे न दे सके.

यह घोर आश्चर्य का विषय है और तानाशाही की हद है कि वर्षों से आकाशवाणी की सेवा कर रहे एक Casual Presenter को उसकी कोई ग़लती बताए बगैर, लिखित रूप में उससे कोई जवाब तलब किए बगैर उस पर प्रतिबन्ध लगाए जाने का तानाशाही फ़रमान उसे सुना दिया जाता है. आकाशवाणी के अधिकारीयों के इस अफसोसनाक और अराजक रवैये से मैं बुरी तरह आहत हूँ.

मुझे इस पूरी घटना के पीछे किसी षड्यंत्र की आशंका हो रही है क्योंकि मैं, आकाशवाणी के एफ़ एम गोल्ड चैनल को हर दृष्टि से बेहतर बनाने की दिशा में इसके प्रस्तोताओं द्वारा कटिबद्धता के साथ चलाए जा रहे एक ऐसे आंदोलन का हिस्सा हूँ जिसकी सार्थकता को माननीय सूचना एवं प्रसारण मंत्री, भारत सरकार के कार्यालय द्वारा भी सहयोग और सहानुभूति की दृष्टि से देखा गया है. और पिछले दिनों केन्द्रीय मंत्री भारत सरकार को दिए गए एक अति महत्वपूर्ण Representation पर भी मेरे हस्ताक्षर थे इसी वजह से कुछ अधिकारी मुझे हटाने का षड्यंत्र कर रहे हैं.

आकाशवाणी के अधिकारियों का यह रवैया पूरी तरह असंवैधानिक है, तानाशाही पूर्ण है, लोक तंत्र के मुंह पर तमाचा है और कोई भी स्वाभिमानी और ईमानदार व्यक्ति के लिए स्वीकार्य नहीं है. यह निरीह प्रस्तोताओं का गला घोंटने के लिए आकाशवाणी के चंद निरंकुश अधिकारियों द्वारा अक्सर अंजाम दी जाने वाली घटनाओं में से एक भयंकर शर्मनाक और भर्त्सना पूर्ण घटना है. यह एक गंभीर मामला है और मेरी आपसे विनम्रता से प्रार्थना है कि इस प्रकरण की निष्पक्ष जांच कराई जाए और दोषी अधिकारियों के नाम सामने लाए जाएँ और उनके विरुद्ध अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाए ताकि ऎसी निंदनीय और आकाशवाणी की छवि को मलिन करने वाली घटनाओं की पुनरावृति न हो सके. इस संबंध में मैंने आरटीआई एक्ट, 2005 के अंतर्गत भी कुछ सवाल पूछे हैं जिसकी प्रति मैं संलग्न कर रहा हूँ. आशा है इस मामले में आपके द्वारा त्वरित और निष्पक्ष कारवाई की जाएगी और प्रार्थी को शीघ्रातिशीघ्र न्याय दिलाया जाएगा.  

भवदीय

दुष्यंत

प्रति :

1- मुख्य कार्यकारी अधिकारी, प्रसार भारती
2- महानिदेशक, आकाशवाणी

…आरटीआई के तहत पूछे गए सवाल…

सेवा में  
केन्द्रीय जन सूचना अधिकारी
दिल्ली केंद्र,
आकाशवाणी,
नई दिल्ली
पिन– 110001

विषय : सूचना के अधिकार अधिनियम, 2005 के अंतर्गत जानकारी प्राप्त करने हेतु  

महोदय,

अधोहस्ताक्षरी आकाशवाणी दिल्ली केंद्र के ऍफ़ एम् गोल्ड चैनल में कैजुअल प्रस्तोता के तौर पर कार्यरत है. इस चैनल के कार्यक्रम अधिशासी श्री दानिश इकबाल ने अधोहस्ताक्षरी को 12 नवंबर 2011 शनिवार को फोन कर बताया कि उसके एफ एम गोल्ड चैनल पर कार्यक्रम करने पर आजीवन प्रतिबंध लगाया गया है. मगर इस प्रतिबन्ध का कोई कारण अधोहस्ताक्षरी को नहीं बताया गया न ही लिखित रूप में उससे कोई जवाब तलब किया गया और उसकी नवंबर 2011 माह की शेष duties को तानाशाही अंदाज़ में काट दिया गया.  

उक्त के संबंध में सूचना के अधिकार अधिनियम, 2005 के तहत कृपया अधोहस्ताक्षरी को निम्न प्रश्नों के लिखित उत्तर प्रेषित करें :

प्रश्न: 1  क्या यह सही है कि अधोहस्ताक्षरी (दुष्यंत) को आकाशवाणी के एफ एम गोल्ड चैनल पर कार्यक्रम करने से रोकने के लिए आजीवन प्रतिबंधित किया गया है?  

प्रश्न: 2  यदि उपरोक्त प्रश्न 1 का उत्तर ‘हाँ’ हैं, तो क्या इसके लिए कोई लिखित आदेश जारी किया गया था? यदि हाँ तो आदेश की सत्यापित फोटो प्रति अधोहस्ताक्षरी को उपलब्ध कराई जाए।

प्रश्न: 3  उक्त आदेश किस आधार पर जारी किया गया? इस आदेश के संबंध में कार्यालय द्वारा की गई समस्त नोटिंग की फोटो प्रतिलिपि अधोहस्ताक्षरी को उपलब्ध कराई जाए।

प्रश्न: 4 इस प्रतिबन्ध की कार्रवाई में आकाशवाणी के जो जो अधिकारी शामिल हैं उनके नाम बताए जाएं.  

प्रश्न: 5 कार्यक्रम अधिशासी श्री दानिश इकबाल ने जिस लिखित सूचना/ आदेश के आधार पर अधोहस्ताक्षरी को इस प्रतिबंध की सूचना दी थी उस लिखित सूचना / आदेश की सत्यापित प्रतिलिपि अधोहस्ताक्षरी को उपलब्ध कराएं.

भवदीय  
दुष्यंत

संलग्न: दस रुपए मूल्य का भारतीय पोस्टल आर्डर संख्या:

प्रति:

1 ) माननीय सूचना एवं प्रसारण मंत्री , भारत सरकार
2) मुख्य कार्यकारी अधिकारी , प्रसार भारती  
3 ) महानिदेशक आकाशवाणी

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