इलाहाबाद। शहर के भीड़भाड़ वाली रोड पर प्रिजन वैन चलती रही और एक एक कर दस बंदी वैन से उतरकर फरार हो गए। करीब बीस मिनट तक बड़ी आसानी से यह सब चलता रहा और ड्यूटी में लगे पुलिसकर्मी पूरी तरह बेखबर। थोड़ी देर बाद वैन में बैठे अन्य बंदियों के शोर मचाने के बाद वैन चालक को होश आया। उसने आनन फानन अफसरों को जानकारी दी। मौके पर पहुंचे पुलिस के बड़े अफसर शुरू कर देते हैं जांच-पड़ताल। इसके बाद शुरू हो जाता है लापरवाही के आरोप में लाइन हाजिर, निलंबन। एकदम परंपरागत तरीके वाली फिल्मी पटकथा सरीखा।
आठ अप्रैल को इलाहाबाद में नैनी सेंट्रल जेल से पेशी के लिए कचहरी लाए जा रहे 52 बंदियों में दस बंदी फरार हो गए। वारदात के चौबीस घंटे बीत जाने के बाद अभी तक यह साफ नहीं हो सका है कि इसके पीछे असलियत क्या है। पुलिस के बड़े अफसर इसे अभी तक लापरवाही ही मानकर चल रहे हैं जबकि परिस्थितियां कुछ अलग ही संकेत कर रही हैं। पूरे घटनाक्रम पर निगाह डाली जाए तो इसके पीछे चूक और लापरवाही कम, सोची समझी रणनीति ज्यादा दिख रही है। जानकार लोग इसे दागी वर्दीधारी और राजनीति की खाल ओ़ढ़े बाहुबलियों के गठजोड़ की साजिश का नतीजा मानकर चल रहे हैं। दावा तो यहां तक किया जा रहा है कि उच्च स्तरीय जांच करा दी जाए तो कई चौंकाने वाली सच्चाई सामने आ सकती है।
फरार होने वाले दस जेल बंदियों में छह पर गैंगेस्टर और चार पर हत्या, लूट, आर्म्स एक्ट जैसे संगीन अपराध विभिन्न थानों में दर्ज हैं। फिलहाल, एसएसपी मोहित अग्रवाल ने दरोगा संजय सिंह के साथ तीन सिपाही अजय पांडेय, विजय सिंह और कृष्णपाल सरोज को लापरवाही के आरोप में सस्पेंड कर दिया है। इसके अलावा पुलिस लाइन के आरआई रामनाथ वर्मा की संदिग्ध भूमिका की भी जांच की जा रही है।
जवाब मांगते सवाल : दस बंदियों के एक-एक कर वैन से उतर कर भाग निकलने वाले इस हैरतअंगेज कारनामे पर पुलिस की संदिग्ध भूमिका को लेकर कई सवाल पैदा हो गए हैं। मसलन, प्रिजन वैन में ताला खुला क्यों छोड़ा गया। 54 बंदियों को लेकर जा रही प्रिजन वैन के पीछे एक और वैन सुरक्षा में लगाई गई थी। पुलिसकर्मियों वाली उस वैन को प्रिजन वैन के पीछे-पीछे चलना था पर वो वैन ओवरटेक कर प्रिजन वैन से काफी आगे क्यों चली गई। घटना के पंद्रह मिनट बाद वो वैन वापस घटनास्थल पर पहुंची। बंदियों को पेशी में ले जाने के लिए तीन सिपाहियों की ड्यूटी लगाई गई थी वे तीनों वैन के साथ नहीं आए। घटना के बाद वैन के कचहरी के पहुंचने के पहले ही वे बावर्दी वहां हाजिर मिले। प्रिजन वैन में ताला बंद करने के बजाय खुला ताला क्यों छोड़ दिया गया। एक सिपाही वैन पर बैठा भी तो चालक के बगल वाली सीट पर, आखिर क्यों?
इलाहाबाद से शिवाशंकर पांडेय की रिपोर्ट.





