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खनिज घोटाले में फंसे रमन सिंह ने छत्तीसगढ़ में ईटीवी पर प्रतिबंध लगाया

रायपुर से खबर है कि अपने खिलाफ खबर दिखाए जाने से नाराज मुख्यमंत्री रमन सिंह ने ईटीवी और राजस्थान पत्रिका अखबार के खिलाफ अभियान छेड़ दिया है. ईटीवी का प्रसारण पूरे राज्य में बंद करा दिया गया है. पत्रिका अखबार के खिलाफ कई तरह की जांच शुरू करा दी गई है. सूत्रों के मुताबिक रमन सिंह पर अपने करीबी लोगों को अवैध तरीके से खदान दिए जाने का आरोप विपक्षी दल के नेताओं ने लगाया.

रायपुर से खबर है कि अपने खिलाफ खबर दिखाए जाने से नाराज मुख्यमंत्री रमन सिंह ने ईटीवी और राजस्थान पत्रिका अखबार के खिलाफ अभियान छेड़ दिया है. ईटीवी का प्रसारण पूरे राज्य में बंद करा दिया गया है. पत्रिका अखबार के खिलाफ कई तरह की जांच शुरू करा दी गई है. सूत्रों के मुताबिक रमन सिंह पर अपने करीबी लोगों को अवैध तरीके से खदान दिए जाने का आरोप विपक्षी दल के नेताओं ने लगाया.

इस खबर को पत्रिका अखबार और ईटीवी चैनल ने जोरशोर से दिखाया. इससे रमन सिंह नाराज हो गए. सत्ता के मद में चूर रमन सिंह ने ईटीवी के प्रसारण को पूरे राज्य में प्रतिबंधित करा दिया. इसके लिए सरकारी मशीनरी का भरपूर दुरुपयोग किया गया. उधर, पत्रिका अखबार ने पूरे प्रकरण में बिना झुके बिना डरे बहादुरी पूर्वक सच का खुलासा किया और सत्ता से टकराने का साहस दिखाया.  

टीवी चैनल ईटीवी और दैनिक अखबार पत्रिका की खबरों के मुताबिक छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री रमन सिंह ने अपने पद का दुरुपयोग करते हुये गलत तरीके से अपने ससुराल पक्ष के रिश्तेदारों को मध्यप्रदेश में खनिज पट्टे दिलाये हैं. रमन सिंह के इस घोटाले की सीबीआई जांच की जाये तो यहां बेल्लारी से बड़ा खनिज घोटाला सामने आ सकता है. छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री रमन सिंह के खिलाफ खनिज घोटाले का यह मामला सबसे पहले मध्यप्रदेश विधानसभा के शीतकालीन सत्र में कांग्रेस विधायक और नेता प्रतिपक्ष अजय राहुल सिंह उठाया. अजय राहुल सिंह का आरोप है कि छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह ने अपने प्रभाव का इस्तेमाल करते हुए अपने रिश्तेदारों को सीधी जिले की गोपाल बनास तहसील के अंधरी गड़ई इलाके में 920 हैक्टेयर जमीन पर सात खदानों का पट्टा दिलाया है.

ईटीवी और पत्रिका के अनुसार अजय राहुल सिंह का आरोप है कि 9 दिसम्बर 2010 को जारी आदेश में मैसर्स नाड प्रा.लि. को सीधी के 2458 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र पर आयरन ओर, मैग्नीज ओर, टाइटेनियम, वेनेडियम एवं निकिल खनिजों की खोज के लिए 4 फरवरी 2009 से 3 फरवरी 2012 तक की अवधि के लिए रिकोनेसेंस परमिट स्वीकृत किया है. यह फर्म विकास सिंह चौहान के नाम से है, जो छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री रमन सिंह के रिश्तेदार है. रमन सिंह के खिलाफ लगे इन आरोपों के बाद छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री अजीत जोगी ने कहा है कि यह बेल्लारी से बड़ा घोटाला है. इस घोटाले में राज्य के मुख्यमंत्री रमन सिंह का नाम सामने आया है, ऐसे में भाजपा नेतृत्व ने जिस तरह कर्नाटक और उत्तराखंड में हिम्मत दिखाई है, छत्तीसगढ़ में भी वही हिम्मत दिखानी चाहिए.

गौरतलब है कि इससे पहले छत्तीसगढ़ कांग्रेस कमेटी ने राष्ट्रपति को एक ज्ञापन सौंप कर आरोप लगाया था कि राज्य के मुख्यमंत्री रमन सिंह अपात्र उद्योगपतियों को अवैध रूप से माइनिंग लीज आबंटित कर रहे हैं. नेताओं का आरोप था कि मेसर्स पुष्प स्टील एंड माइनिंग प्रा. लिमिटेड को माइनिंग लीज एवं प्रास्पेक्टिंग लायसेंस देते हुए राज्य की खनिज सम्पदा का दोहन किया गया. इसी तरह मेसर्स नवभारत फ्यूल्स प्रा.लि. नामक कंपनी को उसके स्वयं के उपयोग के लिए कोल ब्लॉक्स के आबंटन की अनुशंसा केन्द्र सरकार को भेजी. छत्तीसगढ़ सरकार की अनुशंसा पर केन्द्र सरकार ने उक्त कंपनी को कोल ब्लॉक आबंटन किया, जिसे बाद में कंपनी के संचालक जो प्रदेश भाजपा के नेता हैं, उक्त कंपनी को अन्य कंपनी को बेच दिया, जिसमें लगभग 100 करोड़ का लेन-देन हुआ. इसी तरह प्रदेश में निको जायसवाल लिमिटेड जैसे कई उद्योगों को उनकी पात्रता से कई गुना अधिक लौह अयस्क खदानों का आबंटन किया गया है.

रमन सिंह पर आरोप लगाया गया था कि मे. भारत एल्युमीनियम कंपनी लि. कोरबा को सरगुजा एवं कबीरधाम जिलों में बाक्साइट की कैप्टिव खदानें आबंटित की गई. भारत सरकार के पर्यावरण मंत्रालय द्वारा उक्त खदानों से सीमित मात्रा में उत्खनन की शर्तों के साथ पर्यावरणीय स्वीकृति प्रदान की गई थी. परंतु कंपनी प्रबंधन द्वारा करीब 20 अरब रुपयों का अवैध उत्खनन किया गया है. इसी तरह देवभोग क्षेत्र में भाजपा के पदाधिकारियों के संरक्षण में हीरे का अवैध उत्खनन जारी है.

इसी तरह प्रदेश कांग्रेस कमेटी ने 29 मई 2008 को 10 हजार करोड़ के एन्यूटी रोड घोटाले में मुख्यमंत्री सहित कई अधिकारियों के खिलाफ शिकायत की गई थी. मामले की गंभीरता को देखते हुए लोक आयोग ने प्रकरण भी दर्ज किया था. इसके अलावा कांग्रेस ने आरोप लगाया था कि सरप्लस विद्युत उत्पादन वाले राज्य में भाजपा सरकार ने विद्युत खरीदी-बिक्री को व्यापार बनाकर 10 हजार करोड़ के घोटाले को अंजाम दिया. समझौता वार्ता के नाम पर निजी कंपनी आईएल एण्ड एफएस को लगभग 825 करोड़ रुपए अतिरिक्त भुगतान की साजिश रची गई थी. लोक आयोग ने इस मामले में शिकायतों की जांच नहीं करवाई, बाद में अनुबंध की अवधि समाप्त होने पर शिकायत की जांच बंद कर दी गई.

मध्य प्रदेश विधानसभा में नेता विरोधी दल अजय सिंह ने बुधवार को कहा कि छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री रमन सिंह पर अपने रिश्तेदारों को मध्य प्रदेश के सीधी जिले में खदान दिलाने के मामले का खुलासा वह अपने भाषण में पहले ही कर चुके हैं. हालांकि उन्होंने अविश्वास प्रस्ताव पर बहस के दौरान रमन सिंह का नाम लेने के बजाए संकेतों में अपनी बात रखी थी. मगर अब वही बात सबके सामने आ गई है.

छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री व कांग्रेस नेता अजीत जोगी ने आरोप लगाया है कि रमन सिंह ने मध्य प्रदेश के सीधी व विंध्य इलाके में अपने रिश्तेदारों को खदानें आवंटित कराई हैं. इस आरोप के बारे में पत्रकारों से अनौपचारिक बातचीत में अजय सिंह ने कहा कि शिवराज सरकार के खिलाफ पेश अविश्वास प्रस्ताव पर चर्चा के दौरान अपने भाषण में मैंने छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री का नाम नहीं लिया था लेकिन अब उनका नाम सामने आ रहा है तो इसकी उच्चस्तरीय जांच होना चाहिए. वैसे हमने सरकार से रिटायर्ड जज से अवैध उत्खनन मामलों की जांच कराने की मांग की थी पर मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने इसका कोई उत्तर ही नहीं दिया.

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