'मैं अब किसी लड़की को नहीं घूरूंगा, मैं अब किसी लड़की को कभी बदनीयती से छूने की कोशिश नहीं करूंगा, मैं अब ऐसा कुछ नहीं करूंगा जो उन्हें असुविधाजनक लगता हो।' यह बातें भास्कर डॉट कॉम के सीईओ ज्ञान गुप्ता ने अपने ब्लॉग में लिखी है। दिल्ली बलात्कार कांड से आक्रोशित ज्ञान गुप्ता गुस्से में लिखते-लिखते यह भूल गए कि वह क्या लिख रहे हैं? उनकी बातों से यही लगता है कि लड़कियों को घूरने और बदनीयती से छूने का काम पहले करते रहे हैं और अब शपथ ले रहे हैं कि आगे नहीं करेंगे।
हालांकि ब्लॉग (http://www.bhaskar.com/blogs/detail/231.html) 20 दिसंबर 2012 को छपा है लेकिन यह फिलहाल प्रासंगिक है क्योंकि भास्कर डॉट कॉम में पोर्न, सेक्स कंटेंट्स और औरतों को जिस्मों को अश्लील तरीके से प्रदर्शन पर बहस हो रही है। एक कंपनी का सीईओ, औरत के बलात्कार के खिलाफ आग उगलने वाली भाषा लिख रहा है लेकिन खुद अपनी ही वेबसाइट के जरिए लोगों को बलात्कारी बना रहा है। यह पाखंड नहीं तो और क्या है?

भास्कर डॉट कॉम पर वेश्याओं पर फोकस करके और सेक्स शब्द को इस्तेमाल करके कितनी ज्यादा खबरें परोसी जाती हैं, उसे आप इसके होमपेज पर देख सकते हैं। खासतौर से इसके 50 फ्लिकर पर गौर कीजिएगा कि किस तरह से उसमें औरतों के जिस्म को अश्लील एंगल से पेश कर सेक्सुअल हेडलाइंस लगाए जाते हैं। बॉलीवुड हीरोइनों को गंदे ढंग से परोसते हैं तो खैर कोई बात नहीं लेकिन ये तो गांव की औरतों और कॉलेज की लड़कियों तक को गलत एंगल से दिखाना नहीं भूलते। ऐसा लगता है जैसे भास्कर डॉट कॉम पाठकों के सेक्स की भूख बढ़ाने के लिए रोज चारा परोसता है। और यह सब उस सीईओ ज्ञान गुप्ता के इशारे पर होता है, जो औरतों के बलात्कार पर बड़ी-बड़ी डींगे हांक रहे हैं।
वैसे भास्कर कंपनी में ऐसे पाखंडियों की भरमार है। भास्कर आम जनता की भावनाओं से खेलकर अपना कारोबार करता रहा है और इसके बॉस लोग हमेशा तार्किक नहीं बल्कि भावनाओं से भरे अतार्किक, नेताओं को भाषण टाइप आलेख लिखने में माहिर हैं। विश्वास न हो तो भास्कर कंपनी के सुप्रीमो कल्पेश याज्ञनिक का अनर्गल प्रलाप से भरे आलेख भास्कर डॉट कॉम पर ब्लॉग सेक्शन में पढ़ सकते हैं।
एक पत्रकार द्वारा भेजे गए पत्र पर आधारित.





