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सहारा में चैनल हेड्स को नहीं भा रहा डिप्‍टी हेडों का पॉवर

सहारा के चैनलों में इन दिनों जबरदस्त उठापटक चल रही है। समय के नेशनल चैनल और समय उत्तर प्रदेश को छोड़कर हर जगह पावर शेयरिंग का खेल जोरशोर से चल रहा है। जाहिर है कि इसका असर चैनल के आउटपुट पर पड़ रहा है और इसके नीचे के लोगों पर इसका बुरा असर पड़ रहा है। बल्कि इन दोनों चैनलों को छोड़कर बाकी सभी जगह एक बार फिर से जबरदस्त साजिश और सियासी माहौल बन गया है। यहां तक कि मीडिया-इंटरटेनमेंट हेड को उर्दू चैनल में आकर स्थिति स्पष्ट करनी पड़ी। सुब्रत राय के छोटे भाई जयव्रत राय ने भी तीन दिन पहले सभी चैनल हेड को बुलाकर चूड़ियां कसी हैं।

सहारा के चैनलों में इन दिनों जबरदस्त उठापटक चल रही है। समय के नेशनल चैनल और समय उत्तर प्रदेश को छोड़कर हर जगह पावर शेयरिंग का खेल जोरशोर से चल रहा है। जाहिर है कि इसका असर चैनल के आउटपुट पर पड़ रहा है और इसके नीचे के लोगों पर इसका बुरा असर पड़ रहा है। बल्कि इन दोनों चैनलों को छोड़कर बाकी सभी जगह एक बार फिर से जबरदस्त साजिश और सियासी माहौल बन गया है। यहां तक कि मीडिया-इंटरटेनमेंट हेड को उर्दू चैनल में आकर स्थिति स्पष्ट करनी पड़ी। सुब्रत राय के छोटे भाई जयव्रत राय ने भी तीन दिन पहले सभी चैनल हेड को बुलाकर चूड़ियां कसी हैं।

दरअसल सहारा के कुछ चैनलों की अच्छी टीआरपी होने के बावजूद रेवेन्यू नहीं आ रहा है। यानी की चैनल भस्मासुर की तरह रुपये खाए चला जा रहा है, लेकिन चैनल कमाई करके नहीं दे रहे हैं। चैनल को घाटे से उबारने और खास तौर से नोएडा कैंपस में फैली अराजकता को खत्म करने के लिए उपेंद्र राय को हटाकर संदीप वाधवा को लाया गया था। कई दौर की मीटिंगों के बाद आउटपुट ये निकलकर आया कि अगर चैनल हेड्स को एडीटोरियल की जिममेदारी से कुछ राहत दी जाए तो वह रेवेन्यू जुटाने में ज्यादा सक्रिय हो सकते हैं।

मीटिंगों में संदीप वाधवा ने जब भी बिजनेस बढ़ाने की बात कही तो सभी चैनल हेड्स एक सुर में यही करते रहे कि उनके ऊपर चैनल की जिम्मेदीर है, उन्हें वक्त ही नहीं मिल पाता है। इसके बाद ही संदीप वाधवा ने फैसला कर लिया था कि एडीटोरियल की जिम्मेदारी डिप्टी हेड या कहें डिप्टी एडीटर बनाकर उन्हें दे दी जाए और चैनल हेड, जिन्हें अब सहारा में एडीटर कहा जाने लगा है, को थोड़ा आजादी दी जाए। हफ्ते भर पहले इसका नोटिस भी लगा दिया गया। उसके बाद ही सहारा के नेशनल चैनल समय और उत्तर प्रदेश चैनल को छोड़कर हर जगह जबरदस्त उठापटक शुरू हो गई है।

अपने अधिकारों में कमी किए जाने से कोई भी चैनल हेड खुश नहीं है। दिलचस्प बात ये है कि संदीप वाधवा का ये नोटिस लगने के दो-तीन दिन बाद ही सुब्रत राय ने अपने छोटे भाई जय व्रत राय को सुपरविजन की जिम्मेदारी दे दी। इस फैसले के आने के बाद सभी चैनल हेड्स ने डिप्टी हेड को किनारे कर दिया और इस बात को हवा दी जाने लगी कि डिप्टी हेड बनाए जाने के फैसले से नाराज होकर सहाराश्री ने उन्हें हटा दिया है।

सबसे ज्यादा उठापटक एमपी चैनल और उर्दू चैनल में है। एमपी चैनल में डिप्टी हेड नीरज कुमार को बनाया गया था, लेकिन चैनल हेड मनोज मनु को ये बात पसंद नहीं आई। उन्होंने नीरज को हटाने का प्रेशर बनाया और वह इसमें कामयाब भी हो गए। नोटिस लगने के तीसरे ही दिन नीरज को हटाकर मनोज मनु के दाहिने हाथ नौशाद अली को चैनल का डिप्टी एडीटर बना दिया गया। इसका खामियाजा नीरज को बड़ी कीमत देकर चुकाना पड़ा। वह डिप्टी हेड के ओहदे से तो हटाए ही गए, उन्हें एंकरिंग की जिम्मेदारी से भी हटा दिया गया। यानी उन्हें आफ एयर कर दिया गया है।

उर्दू चैनल आलमी सहारा में लईक रिजवी को डिप्टी हेड बनाया गया है। ये बात चैनल के एडीटर सैय्यद फैसल अली को रास नहीं आई। उन्होंने अगले ही दिन मीटिंग बुलाकर साफ कह दिया कि यथा स्थिति बरकरार रहेगी। जो जैसे जहां काम कर रहा था, करता रहेगा। कोई किसी के काम में दखल नहीं देगा। उन्होंने मीटिंग में धमकाते हुए ये भी कहा कि उनका लिखा कोई काट नहीं सकेगा, चाहे जितनी सिफारिश कर ले कोई। इसलिए कहीं कोई दखल न दे। ये सीधा इशारा लईक रिजवी के लिए था। ये बात जब संदीप वाधवा तक पहुंची तो अगले ही दिन वह न्यूज फ्लोर पर पहुंचे और फैसल अली के बारे में मालूम किया। उनके ना मिलने पर उन्होंने साफ तौर पर मैसेज दिया कि लईक रिजवी को डिप्टी हेड की जिम्मेदारी सोच-समझ कर दी गई है, न कि किसी को खुश करने के लिए। एडीटोरियल का सारा काम वही देखेंगे और हर कोई उन्हें कोआपरेट करेगा। अगर किसी ने अडंगा लगाने की कोशिश की तो उस पर सख्त कार्रवाई की जाएगी।

ऐसे ही कुछ हालात बिहार चैनल के भी हैं। वहां चैनल हेड प्रभुराज के तेवरों के आगे डिप्टी हेड खुद ही हाशिये पर चले गए हैं। नेशनल चैनल के हेड संदीप वाधवा के दाहिने हाथ राव वीरेंद्र सिंह हैं इसलिए वहां के हालात ठीक हैं। यूपी में स्वतंत्र मिश्रा को इन सब बातों से ज्यादा असर नहीं पड़ता, इसलिए वहां भी हालात शांत हैं। दो दिन बाद ही जयव्रत राय को सुपरविजन के लिए लाया गया और ये माहौल बन गया कि संदीप वाधवा को हटा दिया गया है।

बाकी चैनलों में जारी साजिश और सियासत के हालात देखने के बाद तीन दिन पहले सोमवार की रात 11.30 बजे जयव्रत राय ने सभी चैनल हेड और डिप्टी चैनल हेड्स की मीटिंग बुलाकर साफ कर दिया कि संदीप वाधवा ही मीडिया के सारे मामले देखेंगे। उन्हें सिर्फ सुपरविजन के लिए लाया गया है। उन्होंने सभी का ये भ्रम भी दूर कर दिया कि संदीप वाधवा को निकट भविष्य में नहीं हटाया जाएगा। साथ ही उन्होंने ये चेतावनी भी जारी कर दी है कि तीन महीने में सभी अपना आउटपुट बेहतर कर लें। यही नहीं चैनल हेड से कहा गया कि जयव्रत राय की बात मातहतों को भी मीटिंग में बता दें। और इसके बाद हर चैनल की मीटिंग में आब्जर्वर भेजे गए ताकि इस बार चैनल हेड बहकने ना पाएं। इसके बावजूद डिप्टी हेड्स पर संकट कायम है और उन्हें काम करने का मौका नहीं मिल पा रहा है। चैनल हेड्स तरह-तरह से उन पर दबाव बनाने में कामयाब हैं। (कानाफूसी)


तो क्या अगली बारी सहाराश्री की है!

पिछले साल 15 अगस्त को सहारा समूह के चेयरमैन सुब्रत राय नोयडा कैंपस आए थे। वहां से जाने के बाद ही खबरें आने लगी थीं कि वह नोयडा में फैली अराजकता से काफी नाराज हैं। हालांकि इससे पहले उन्होंने समरीन जैदी को भेजकर भी इनपुट मंगाया था और नोयडा आने के बाद वह सब कुछ प्रैक्टिकल रूप में भी देख लिया था। उसके बाद से ही ऐसे कयास लगाए जा रहे थे कि नोयडा में कुछ लोगों पर गाज गिर सकती है।

ऐसा हुआ भी, और विजय राय सहित कुछ लोगों को यहां से हटाया भी गया। उसके कुछ महीनों बाद ही उपेंद्र राय के ऊपर संदीप वाधवा को बैठा दिया गया। उस वक्त भी सुब्रत राय की तरफ से जारी सर्कुलर में नोयडा कैंपस में फैली अराजकता, खास तौर से यहां फैली गुटबाजी और साजिशी माहौल पर सख्त टिप्पणी की गई थी। समझा गया था कि संदीप वाधवा इसे दुरुस्त करेंगे, लेकिन कई महीने गुजरने के बाद भी यहां के हालात नहीं बदले।

फरवरी में हुए इंडक्शन प्रोग्राम में भाषण देते हुए भी सुब्रत राय ने इस बारे में काफी सख्त टिप्पणी की थी। उन्होंने कहा था, “निकम्मे, कामचोर और साजिश करने वालों को बाहर जाना होगा। वह माहौल खराब करते हैं। अब उन्हें बख्शा नहीं जाएगा।” उन्होंने इंडक्शन प्रोग्राम में वर्कर केयर को हेड कर रहीं समरीन जैदी को सहारियन फोरम का सर्वेसर्वा बनाते हुए कहा था, “सभी कर्तव्ययोगी माहौल बेहतर करने में योगदान दें और उनके साथ अगर सीनियर कुछ भी गलत कर रहे हैं तो वह तुरंत शिकायत भेजें, उन्हें इन्साफ मिलेगा। अगर नाम जाहिर न करना चाहें तो वह गुमनाम चिट्ठी भेजें।” सुब्रत राय ने उस वक्त ये भी कहा था कि अगर शिकायत करने के बाद किसी को परेशान करते हैं तो ऐसे सीनियर के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।

सुब्रत राय ने हर चैनल हेड और यूनिट हेड से दस निकम्मे और नाकारा लोगों की सूची भी 28 फरवरी तक मांगी थी, लेकिन ऐसी सूची कइयों ने नहीं दी और दी तो उसमें विरोधियों के नाम भेज दिए गए।

इसके बाद सहारा में एक आन लाइन सर्वे भी कराया गया। जिसमें 90 प्रतिशत दो ही तरह के सवाल थे कि कंपनी कैसी है और सीनियरों का व्यवहार कैसा है।

इतनी प्रैक्टिस के बाद भी माहौल में कोई खास फर्क नहीं आया। खास तौर से मीडिया हाउस में कोई सुधार नहीं आया। हालांकि सहारियन फोरम में ढेरों शिकायतें की गईं, लेकिन वहां से भी न तो किसी के खिलाफ जांच हुई और ना ही कार्रवाई। तमाम लोग करने भी लगे कि सहारा में कुछ भी नहीं बदलेगा। यहां सिर्फ बातें होती हैं, कार्रवाई नहीं। दरअसल सुब्रत राय सकारात्मक बदलाव तो चाहते हैं, लेकिन उनके इर्द-गिर्द के लोग, जिनपर इस बदलाव के क्रियान्वयन की जिम्मेदारी है, वह सुब्रत राय को सहयोग नहीं करते हैं।

मीडिया में संदीप वाधवा को लाने के बाद भी जब कोई सुधार नहीं हुआ तो अब सुब्रत राय अपने छोटे भाई जयव्रत राय को लेकर आए हैं। इस उम्मीद के साथ कि वह मीडिया से खास तौर से नोयडा आफिस से गंदगी साफ करेंगे, लेकिन उन्हें करीब से जानने वाले लोगों का मानना है कि वह ज्यादा कुछ हस्तक्षेप नहीं करेंगे। इससे एक दिन पहले समरीन जैदी का नोटिस भी आया है, जिसमें उन्होंने शिकायतें मांगी हैं। अलबत्ता पहले की गईं शिकायतों का क्या हुआ, इस बारें किसी को कुछ भी पता नहीं है। अहम सवाल ये है कि अगर जयव्रत राय भी मीडिया की गंदगी साफ नहीं कर सके तो क्या सुब्रत राय खुद मैदान में उतरेंगे। (कानाफूसी)

एक पत्रकार द्वारा भेजे गए पत्र पर आधारित.

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