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बीबीसी हिंदी से दर्जन भर वरिष्ठ कनिष्ठ पत्रकारों की नौकरी गई, हाहाकार

बीबीसी के दिल्ली ऑफिस में इस समय मातम छाया हुआ है. पिछले महीने छह प्रोड्यूसर निकाले गए थे. अब पांच सबसे वरिष्ठ बीबीसी संवाददाताओं को एक महीने का नोटिस दे दिया गया है कि वे या तो दिल्ली आ जाएं या फिर इस्तीफा दे दें. बृहस्पतिवार सुबह बीबीसी के सबसे वरिष्ठ संवाददाताओं रामदत्त त्रिपाठी (लखनऊ), मणिकांत ठाकुर (पटना), उमर फारूक (हैदराबाद), जुबैर अहमद (मुंबई) और सलमान रावी (रायपुर) को नये सम्पादक निधीश त्यागी की चिट्ठी मिली है जिसमे कहा गया है कि उनका नोटिस पीरियड शुरू हो चुका है. वे इस एक महीने में या तो दिल्ली आफिस आकर ज्वाइन करें या फिर इस्तीफा दे दें. 

बीबीसी के दिल्ली ऑफिस में इस समय मातम छाया हुआ है. पिछले महीने छह प्रोड्यूसर निकाले गए थे. अब पांच सबसे वरिष्ठ बीबीसी संवाददाताओं को एक महीने का नोटिस दे दिया गया है कि वे या तो दिल्ली आ जाएं या फिर इस्तीफा दे दें. बृहस्पतिवार सुबह बीबीसी के सबसे वरिष्ठ संवाददाताओं रामदत्त त्रिपाठी (लखनऊ), मणिकांत ठाकुर (पटना), उमर फारूक (हैदराबाद), जुबैर अहमद (मुंबई) और सलमान रावी (रायपुर) को नये सम्पादक निधीश त्यागी की चिट्ठी मिली है जिसमे कहा गया है कि उनका नोटिस पीरियड शुरू हो चुका है. वे इस एक महीने में या तो दिल्ली आफिस आकर ज्वाइन करें या फिर इस्तीफा दे दें. 

बताया जाता है कि लंदन में बीबीसी की हुई बैठक में फैसला लिया गया कि भारत के किसी स्टेट में बीबीसी का अब कोई करेस्पांडेंट नहीं रहेगा. दो साल पहले बीबीसी ने कोलकात आफिस (सुबीर भौमिक), श्रीनगर आफिस (अल्ताफ हुसैन), जम्मू आफिस (बीनू जोशू), जयपुर आफिस (नारायण बारेठ), चंडीगढ़ आफिस (असिट जाली), अहमदाबाद आफिस (राजीव) को क्लोज कर दिया था. इन आफिसों को बंद कर दिए जाने के बाद पांच आफिस बचे रह गए थे. अब इन्हें भी बंद कर इससे जुड़े लोगों को दिल्ली आने के लिए कह दिया गया है. इसके लिए 15 अप्रैल की डेडलाइन है. अब स्टेट में जो भी होगा उसे एजेंसी या न्यूज चैनल्स से बीबीसी के लोग कवर करेंगे. अगर कुछ बड़ा या स्पेशल होता है तो दिल्ली से डिप्लायमेंट होगा.

उल्लेखनीय है कि सन 1989 में मार्क टली ने बीबीसी का भारत के स्टेट में विस्तार किया था. उनका मानना था कि भारत में दिल्ली के अलावा ढेर सारे रीजनल पावर सेंटर्स हैं. इन्हें दिल्ली में बैठकर नहीं समझा जा सकता. इसीलिए उन्होंने बड़े पैमाने पर रिक्रूट किया था और बियांड दिल्ली विस्तार हुआ था. बीबीसी ने अब फंड क्राइसिस का रोना रोकर पूरी प्रक्रिया को रिवर्स कर दिया है. इसके पहले बीते मार्च महीने में बीबीसी ने दो साल वाले कॉन्ट्रेक्ट पर काम कर रहे छह प्रोड्यूसरों को सिर्फ पंद्रह दिन के नोटिस पर गुडबाय बोल दिया. इनके नाम हैं अनुभा रोहतगी, विधान्शु कुमार, स्वाति अर्जुन, अरविन्द छाबड़ा, तुषार बनर्जी और पवन नारा.

सात नई पोस्टें भी क्रिएट की गई हैं और इसके लिए वैकेंसी निकाली गई है. जिन्हें गुडबाय किया गया है, उनसे कहा गया है कि वे अप्लाई करें. अगर पास हुए तो फिर रखा जा सकता है. सीनियर जर्नलिस्ट टिंकू रे को भी बीबीसी से इस्तीफा देना पड़ा है. वे वैसे तो अंग्रेजी जर्नलिस्ट थीं, लेकिन उन्हें सेलरी हिंदी के बजट से दिया जाता था क्योंकि वे हिंदी की खबरों को साउथ एशिया यूनिट के लिए अंग्रेजी में कनवर्ट करती थीं. अब उनसे कह दिया गया है कि हिंदी के पास सेलरी देने के लिए बजट नहीं, सो, उन्होंने इस्तीफा दे दिया.

चर्चा है कि बीबीसी हिंदी के नए सम्पादक निधीश त्यागी ने सात नई नौकरियों की अधिसूचना निकाली हैं जिनमें वे अपनी पुरानी संस्था दैनिक भास्कर से अपने लोगों को लाने की योजना बना चुके हैं. निधीश त्यागी पहले ही अपने साथ पूर्व में काम कर चुके पांच व्यक्तियों को बीबीसी हिन्दी के दफ्तर में बुलाकर पिछले एक महीने से फ्रीलान्सर के तौर से काम करवा रहे हैं. बीबीसी के सूत्रों ने इस बात की पुष्टि की है कि निधीश त्यागी की योजना भविष्य में पांच और नौकरियां लेने की हैं जिनमे दिल्ली दफ्तर में काम करने वाले कई वरिष्ठ बीबीसी पत्रकार शामिल हैं. जिन तीन वरिष्ठ संवाददाताओं की नौकरियां नए घटनाक्रम के बाद ली गईं हैं. वे वकीलों से बात करके अदालत जाने वाले हैं.

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