इलाहाबाद। श्रृंगी ऋषि की कर्मस्थली व पौराणिक धाम श्रृंग्वेरपुर के गंगा तट पर अविरल गंगा-निर्मल गंगा को लेकर हुई संगोष्ठी में जन जागरूकता पर जोर दिया गया। विषय विशेषज्ञों का कहना था कि आम जनता के जुड़े बगैर सारी कवायद बेकार होगी। आमजन संकल्प के साथ आगे आएं और भगीरथी को बचाने के लिए भगीरथ की तरह प्रयास करें। गौरीशंकर स्मारक संस्कृत महाविद्यालय में चली संगोष्ठी में गंगा प्रदूषण के कारण और निवारण पर टिप्स दिए गए। खास बात यह कि कौशांबी, प्रतापगढ और इलाहाबाद जनपदों के सैकड़ों कर्मकांडी विद्वानों का यहां जुटान हुआ।
संगोष्ठी में ज्यादातर वक्ताओं का जोर इस बात पर रहा कि गंगा मइया को प्रदूषण से बचाने के लिए समाज के सभी वर्गों को सक्रिय भूमिका निभानी होगी। तय किया गया कि तीन जून की शाम से 16 जून की शाम तक पदयात्रियों की टोली गांव-गांव जाकर लोगों को जागरूक करेगी। 17 जून की शाम से चौबीस घंटे तक अखंड कीर्तन, गंगापूजन, गंगा आरती और हवन होगी। गंगा दशहरा को समापन होने वाले कार्यक्रम में हजारों लोग शिरकत करेंगे। गंगा दशहरा पर ही हजारों लोग गंगा तट पर अविरल गंगा-निर्मल गंगा के लिए संकल्प भी लेंगे।
लोकभारती के केंद्रीय संगठन मंत्री बृजेंद्र पाल सिंह, रामसजीवन सुगौटी, रामशंकर शुक्ल, डॉ0 आत्मा राम त्रिपाठी, मंगला प्रसाद त्रिपाठी, करूणा शंकर ओझा, पूर्व प्रधान काली सहाय त्रिपाठी, त्रिपुरारी नाथ शुक्ल, कृष्ण मूर्ति त्रिपाठी, प्राचार्य मोती लाल शुक्ल, हरिश्चंद्र शुक्ल, शीतला प्रसाद त्रिपाठी, जगदीश नारायण शुक्ल, कृष्णकांत त्रिपाठी, विद्या प्रसाद शुक्ल, बृज किशोर त्रिपाठी, अमरनाथ द्विवेदी आदि ने विचार रखे। पूर्व विधायक प्रभाशंकर पांडेय ने विषय की भूमिका प्रस्तुत की। संचालन शेश नारायण मिश्र, अध्यक्षता हरिभजन मणि त्रिपाठी ने किया।
इलाहाबाद से शिवाशंकर पांडेय की रिपोर्ट.






