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बिकती मुंबई पुलिस का सच? तीन दर्जन हुए सस्‍पेंड

मुंबई : भ्रष्टाचार देश के लिए कोई अनोखी चीज़ नहीं है, लेकिन ठाणे में एक छोटे से मकान की तामीर के लिए जिस तरह पूरा सरकारी महकमा हाथ फैलाए सर्विस चार्ज मांगने बेशर्मी के साथ पहुंच जाता है उससे देखकर मुंब्रा की सात मंजिला इमारत के गिरने की वजह समझ में आ जाती है.

मुंबई : भ्रष्टाचार देश के लिए कोई अनोखी चीज़ नहीं है, लेकिन ठाणे में एक छोटे से मकान की तामीर के लिए जिस तरह पूरा सरकारी महकमा हाथ फैलाए सर्विस चार्ज मांगने बेशर्मी के साथ पहुंच जाता है उससे देखकर मुंब्रा की सात मंजिला इमारत के गिरने की वजह समझ में आ जाती है.

अवैध निर्माण यानी बारात में बंट रही मुफ्त मिठाई? : मुंबई में एक अवैध निर्माण को रोकने के लिए पुलिस आई और फिर शुरू हुआ वसूली का सिलसिला. आईएएस अफसर बनने की तैयारी करने वाले एक छात्र ने अवैध निर्माण और उसमें शामिल रिश्वत की पूरी गाथा को स्टिंग ऑपरेशन में कैद किया है. उन्होंने रिश्वत की पूरी हकीकत कैद करने के लिए खुद की एक अवैध निर्माण की शुरुआत की और फिर इस तरह पुलिस के छोटे बड़े कुल 95 पुलिसकर्मियों ने उनसे रिश्वत की मांग की.

स्टिंग ऑपरेशन-1 में कैद हकीकत : स्टिंग ऑपरेशन में पुलिसकर्मी निर्माणाधीन इमारत के पास आकर उस को बुलाते हैं जिसे पुलिस को मैनेज करना है. पुलिसकर्मी अपने साथ-साथ अपने साथी और अपने वरिष्ठ के हिस्से का पैसा मांगता है. पुलिसकर्मी कहता है कि उसे सीनियर पुलिस अधिकारी के अर्दली और ऑपरेटर का हिस्सा चहिए. यही नहीं पुलिसकर्मी अपना मोबाइल नंबर और सीनियर की गाड़ी का नंबर भी बताकर मांगता है. यही नहीं मानो खैरात बंट रही हो. मार्निंग शिफ्ट पुलिसकर्मी का अलग हिस्सा और नाईट शिफ्ट पुलिसकर्मी का अलग हिस्सा.

स्टिंग ऑपरेशन-2 में कैद हकीकत : एक हवलदार आता है और अपना हिस्सा लेकर जाता है. दूसरा हवलदार आता और अपना और अपने साथी का हिस्सा लेकर जाता है. हेड कांस्टेबल आता है और अपने और साथी का पैसा लेकर जाता है. मार्निंग शिफ्ट, नाईट शिफ्ट, कार वाली पुलिस, बेकार वाली पुलिस, बड़ी वैन वाली पुलिस, जीप वाली पुलिस, बीट नंबर एक की पुलिस और बीट नंबर 2 की पुलिस अपने रिश्वत का हिस्सा लेती है. एक घंटे के भीतर बारी बारी से दर्जनों पुलिसकर्मी आता और वसूली कर जाते हैं. पुलिसकर्मी गर्व से अपना नाम, अपनी गाड़ी का नंबर और मोबाइल नंबर भी देकर जा रहे हैं मानो उनका हक है जिसे पाने के बाद अपना हस्ताक्षर कर रहे हों.

इस स्टिंग ऑपरेशन में गौर करे तो वसूली के समय को देखकर आप चौक जाएगे. नौ मार्च को घर का काम शुरू हुआ, शाम 5 बजे के आस पास पुलिस वालों का आना शुरू हुआ और घंटे भर के भीतर वसूली की ऐसी कतार लगी रही मानो पुलिसवालों को बोनस बंट रहा हो. पुलिसवाले यह समझा भी रहे हैं कि स्टेशन में कितने अधिकारी होते हैं और उनका कितना हिस्सा होता है. पुलिसवालों की वसूली का सिलसिला यही ख़तम नहीं होता है. पुलिसवालों के मांगने के तरीके भी अहम हैं. पुलिस स्टेशन में झाड़ू लगाने वाले से लेकर वरिष्ठ तक ने अपना हिस्सा खुद या सहयोगी के जरिए मंगाया. जिसका जैसा ओहदा उसकी उतनी कीमत. साहब को चाय पिलाने वाले पुलिसकर्मी की कीमत 300 रुपये तो बड़े साहब की कीमत 5000 रुपए, लेकिन बिकाऊ सभी हैं. किसी ने धौंस दिखाकर वसूले तो किसी ने पूछ लिया ‘बुरा तो नहीं लगा’.

स्टिंग ऑपरेशन-3 में कैद हकीकत : पुलिस स्टेशन के हमाल से लेकर डिटेक्शन अधिकारी सभी अपने आप को इस तरह पहचान कराते नजार आते हैं, मानो उनका गिफ्ट हैंपर रखा गया हो जिसे वो लेने आए हैं. अपना और अपने सहयोगी का नाम और ओहदा बताकर यह रुपए ले जा रहे है. यह भी बताकर अपना नंबर दे जा रहे हैं कि बाद में उनके नाम पर कोई मांगने आए तो यह बता दे कि उन्हें उनका हिस्सा मिल गया है.

स्टिंग ऑपरेशन-4 में कैद हकीकत : जिन पुलिसकर्मियों का पुलिस ठाणे से निकलना नहीं होता वो भी आकर अपनी पहचान बताते हैं. गुमशुदगी विभाग के दो पुलिस कर्मियों की तस्वीरे कैमरे में कैद है. उनकी बातचित सुनकर यह अंदाजा हो जाएगा कि घर का निर्माण किसी मलाईदार दुकान से कम नहीं है. इस स्टिंग ऑपरेशन में एक दो दर्जन नहीं बल्कि 35 से ज्यादा पुलिसकर्मी पैसे लेते कैमरे में कैद हैं. प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से नेहरु नगर पुलिस ठाणे के सैकड़ों पुलिसकर्मी इस घेरे में हैं. यह सिलसिला 18 दिनों तक चलता रहा जब तक इमारत खड़ी न हो गई. इस बंदरबांट को 20 साल के युवक ने अपने कैमरे में कैद कर लिया. युवक ने एक नहीं दो नहीं बल्कि पुलिस की वसूली की 25 सीडियां बनवाईं जिनमें नेहरू नगर पुलिस ठाणे के 35 फ़ीसदी वर्दी के लुटेरे कैद हैं. एक पुलिस स्टेशन में 150 से 200 पुलिसकर्मी होते हैं. सीडी से यह साफ़ होता है कि सभी ने अपने हिस्से लिए. मुंबई के महज एक पुलिस ठाणे की लूट की कहानी है. कल्पना कीजिए मुंबई के 90 पुलिस थाने ने शहर में लूट का क्या हाल बना रखा होगा?

36 पुलिसवाले हुए सस्पेंड : मुंबई चेंबूर स्थित शिवाजी नगर में एक परिवार के स्टिंग ऑपरेशन में घूस लेते कैद हुए 36 पुलिसवाले सस्पेंड हो गए हैं. इनमें एक सीनियर पुलिस इंस्पेक्टर भी शामिल है. महाराष्ट्र के गृह मंत्री आरआर पाटिल ने स्टिंग ऑपरेशन में पुलिसवालों की करतूत देखने के बाद इसकी जांच एंटी करप्शन विभाग को सौंप दी है. पुलिसवालों का पक्ष अभी नहीं मिला है. खुफिया कैमरे में कैद पुलिसवालों पर गिरी है गाज. ये लोग कैमरे में एक परिवार से घूस मांगते कैद हुए थे. इसी परिवार ने घूस मांगते पुलिसवालों का किया था स्टिंग ऑपरेशन. इस स्टिंग में 36 पुलिसवाले रिश्वत लेते कैद हुए थे. खबर दिखाए जाने के बाद महाराष्ट्र के गृह मंत्री आर आर पाटिल ने कैमरे में रिश्वत लेते दिख रहे सभी पुलिस वालों को सस्पेंड कर दिया है. खबर दिखाए जाने के बाद तुरंत बाद पुलिसवालों को सस्पेंड करने का एलान हो गया. महाराष्ट्र के गृह मंत्री ने घूसखोरी की जांच एंटी करप्शन ब्यूरो को सैंप दी है, साथ ही माना है कि सिस्टम में कई खामियां हैं.

मुंबई के चेंबूर इलाके में नौ मार्च को जैसे ही एक जर्जर मकान को दोबारा बनाने का काम एक परिवार ने शुरू किया पुलिसवालों ने शुरू कर दी वसूली. मुंबई के नेहरू नगर थाने के पुलिसवाले ने मकान बनाने वालों से न सिर्फ अपने लिए घूस ली बल्कि अपने साथियों का भी हिस्सा मांगा. जितनी ईंटें इस मकान में लगी होंगी उससे कहीं ज्यादा का सर्विस चार्ज वसूल लिया गया. स्टिंग करने वाले परिवार का दावा है कि उसे 47 पुलिसवालों को रिश्वत देनी पड़ी, जिसमें से 36 पुलिसवाले उनके खुफिया कैमरे में कैद हुए. परिवार ने 35 पुलिसवालों की करतूत की 25 सीडी बनाई. परिवार ने इसकी शिकायत महाराष्ट्र के लोकायुक्त और एंटी करप्शन ब्यूरो से भी की. चार अप्रैल को इनके आधा बना मकान गिरा दिया गया, लेकिन इस परिवार ने स्टिंग के जरिए कर दिया पुलिसवालों की घूसखोरी के जाल को बेनकाब. हम आपको बता दें कि पुलिस वालों और म्यूनिसिपल अधिकारियों की घूसखोरी की बदौलत ही ज्यादातर अवैध निर्माण होते हैं. चार अप्रैल को ठाणे के शिलफाटा इलाके में एक सात मंजिला इमारत गिर गई थी जिसमें 74 लोग मारे गए थे.

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