किन्हीं सज्जन ने एक आडियो टेप भेजा है. इसमें मीडिया वालों के एक खेल-तमाशे का खुलासा है. जैसे ये कि आप अगर बैकडेट में कोई विज्ञापन छपवाना चाहते हैं तो पीछे के डेट में पूरा अखबार छप जाएगा और वह विज्ञापन भी. साथ ही उस दिन के अखबार को आरएनआई आफिस भी नहीं भेजा जाएगा क्योंकि आरएनआई आफिस में कभी कंप्लेन जाए तो उसे मिलना करने के लिए उस दिन का कोई अखबार ही न मिल पाए. इसी सब पर बातचीत है इसमें.
यह नहीं पता चल पाया है कि किसने किससे बातचीत की है. हां, बातचीत सुनने के दौरान यह पता लग पा रहा है कि यह मामला उत्तर प्रदेश के महराजगंज जिले का है. तो आइए, हम सब मीडिया के इस पुराने और प्रचलित गोरखधंधे को सुनें. इस गोरखधंधे के कारण देश भर में अरबों रुपये का वारा न्यारा होता है. जैसे ये कि अगर किसी बड़े ठेके का टेंडर न निकला हो और यूं ही आपने अपने किसी करीबी को ठेका दे दिया… इसके खिलाफ कोई कोर्ट में गया कि बिना टेंडर निकालने ठेका कैसे दे सकते हैं तो आप रातों रात पैसे देकर अखबार विज्ञापन टेंडर सब छपवा सकते हैं बैकडेट में और उसे कोर्ट में पेश कर सकते हैं कि देखिए साहब, हमने तो टेंडर छपवाया था, जब इन्होंने भरा ही नहीं तो हम क्या करें.. 🙂





