: भास्कर ने प्रकाशित की आधी-अधूरी खबर : मध्य प्रदेश के भाजपा के मुख पत्र चरैवेति को लेकर बवाल हो गया है। मुख पत्र के संपादक अनिल सौमित्र और भाजपा के मीडिया प्रभारी डा. हितेश बाजपेयी के बीच एक खबर को लेकर पैदा हुए वैचारिक टकराव ने व्यक्तिगत टकराव का रूप ले लिया है। इसमें भास्कर ने भी मीडिया प्रभारी का पक्ष लेते हुए अनिल सौमित्र के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। अब चरैवेति के असली और नकली वेबसाइट को लेकर मामला गरमा गया है।
भास्कर में प्रकाशित खबर में कुछ अधूरे सत्य और बयान के कारण कई प्रकार भ्रम पैदा हों रहे हैं। कई शंकाएं भी उत्पन्न हो रही है, मसलन- कौन-सी वेबसाइट अधिकृत है, किस वेबसाइट को सरकारी विज्ञापन मिल रहा है, किसे नहीं और कौन बोगस या फर्जी बेबसाईट है आदि। सबसे पहली बात – वेबसाईट के पंजीकरण की एक निश्चित प्रकिया होती है। उसके लिए सम्बंधित सर्वर पर स्पेस और नाम की उपलब्धता होनी चाहिए। निर्धारित शुल्क देकर कोई भी व्यक्ति उपलब्ध नाम और स्पेस पंजीकृत करा सकता है। नाम को लेकर पेटेंट का अभी तक कोई प्रावधान नहीं है।
दूसरी बात किसी भी वेबसाईट को विज्ञापन आदेश देने और भुगतान करने की भी एक निश्चित प्रक्रिया है। मध्यप्रदेश शासन का जनसंपर्क विभाग किसी ऐसे वेबसाइट को शायद ही विज्ञापन आदेश दे जो सालभर से अपडेट ही न हुआ हो। बात जहाँ तक सरकार का विज्ञापन छापने या प्रकाशित करने की बात है अगर आपको पैसे प्राप्त करने का लोभ न हो तो आप सरकार के सैकड़ों विज्ञापन सामग्री का प्रकाशन किजिये आपको कोई रोकने-टोकने वाला नहीं है। यहाँ समाचार पत्र के रिपोर्टर और बयानवीर भाजपा संवाद प्रमुख दोनों ने मूर्खता का परिचय दिया है।
कोई भी व्यक्ति http://www.whoismydomain.in पर जाकर किसी भी वेबसाइट के ओनर के बारे में जानकारी ले सकता है। आप चाहें तो इसपर जाकर www.charaiveti.in और www.charaiveti.net दोनों की जानकारी प्राप्त करा सकते हैं। इसी में आपको कौन-सी वेबसाइट वैध, असली और अधिकृत है इसकी जानकारी हो जायेगी| हाँ इतना जरूर है कि एक वेबसाइट www.charaiveti.in तकनीकी और आर्थिक दिक्कतों के कारण सालभर से अपडेट नहीं हुई, जबकि दो लाख रुपये खर्च कर बनवाई गयी वेबसाईट www.charaiveti.net सामग्री की दृष्टि से पाठकों को मूर्ख ही बना रहा है। कमोबेश यही हाल भाजपा मध्यप्रदेश की साइट www.bjpmp.org का भी है।








