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जागरण, कानपुर में यौन उत्‍पीड़न मामले में महिला आयोग ने मांगी रिपोर्ट

: इसी खबर में पक्ष लेने के लिए किए गए फोन पर जागरण ने रंगदारी का फर्जी मामला दर्ज कराया था : दैनिक जागरण, कानपुर की एक महिला कर्मचारी रवीना मिश्रा (बदला हुआ नाम) के यौन उत्‍पीड़न के आरोपों के मामले में महिला आयोग ने एक महीने में जवाब-रिपोर्ट मांगी है. पिछले साल जून में दैनिक जागरण में कार्यरत रवीना मिश्रा ने आरोप लगाया था कि यूनिट हेड नितेंद्र श्रीवास्‍तव, सीजीएम सतीश चंद्र मिश्रा तथा आईटी सेक्‍शन के हेड प्रदीप अवस्‍थी ने उनका यौन शोषण किया. इसकी शिकायत भी उन्‍होंने महिला पुलिस थाने तथा महिला आयोग के अलावा कई जगहों पर की थी.

: इसी खबर में पक्ष लेने के लिए किए गए फोन पर जागरण ने रंगदारी का फर्जी मामला दर्ज कराया था : दैनिक जागरण, कानपुर की एक महिला कर्मचारी रवीना मिश्रा (बदला हुआ नाम) के यौन उत्‍पीड़न के आरोपों के मामले में महिला आयोग ने एक महीने में जवाब-रिपोर्ट मांगी है. पिछले साल जून में दैनिक जागरण में कार्यरत रवीना मिश्रा ने आरोप लगाया था कि यूनिट हेड नितेंद्र श्रीवास्‍तव, सीजीएम सतीश चंद्र मिश्रा तथा आईटी सेक्‍शन के हेड प्रदीप अवस्‍थी ने उनका यौन शोषण किया. इसकी शिकायत भी उन्‍होंने महिला पुलिस थाने तथा महिला आयोग के अलावा कई जगहों पर की थी.

इसी मामले की पूरी शिकायत कानपुर के स्‍वरूप नगर थाने में की गई है. स्‍वरूप नगर इस मामले की जांच कर रहा है लेकिन जागरण के दबाव में इस पर तेजी से कार्रवाई करने की बजाय इसे टालता जा रहा है. अब खबर है कि महिला आयोग ने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए एक महीने के अंदर जांच और कार्रवाई की रिपोर्ट मांगी है. गौरतलब है कि इसी खबर के प्रकाशन के समय महिला कर्मचारी द्वारा आरोपी बनाए गए दैनिक जागरण के यूनिट हेड नितेंद्र श्रीवास्‍तव का पक्ष लेने के लिए फोन किया गया था, जिसके चार दिन बाद जागरण ने भड़ास के एडिटर यशवंत सिंह और कंटेंट एडिटर अनिल सिंह पर रंगदारी मांगने का फर्जी मामला दर्ज करा दिया था.

दैनिक जागरण भड़ास पर छंटनी एवं समूह के अंदर चल रहे गोरखधंधे की खबरों के बाहर आने से इतना डर गया था कि उसने दोनों लोगों के खिलाफ एफआईआर करा दी, जो एफआईआर लिखाई वो भी पूरी तरफ फिल्‍मी था. सबसे दिलचस्‍प बात यह रही कि यह रिपोर्ट कानपुर में दर्ज ना कराकर नोएडा में कराई गई ताकि ऐन केन प्रकारेण भड़ास को बंद कराया जा सके. इसमें सत्‍ता से लेकर पुलिस के आला अधिकारियों तक की मदद ली गई, फिर भी जागरण की मंशा के बावजूद भड़ास का संचालन और प्रकाशन बंद नहीं हो सका, बल्कि और दुगुने जोश के साथ संचालन-प्रकाशन जारी है.

खैर, मुद्दे पर आते हैं. महिला आयोग ने इस मामले में सख्‍त रवैया अपनाया है. रवीना ने महिला आयोग के अलावा मानवाधिकार एवं अन्‍य संवैधानिक संस्‍थाओं को अपने साथ घटित हुए यौन उत्‍पीड़न के मामले की जानकारी भेजी है, परन्‍तु मामला अखबार प्रबंधन से जुड़ा होने के चलते ज्‍यादातर जगहों पर सुनवाई नहीं हुई, परन्‍तु महिला आयोग इसका संज्ञान लेते हुए म‍हीने भर के भीतर सारी कैफियत तलब की है. आयोग के निर्देश के बाद पुलिस म‍हकमा में हड़कम्‍प है.

इन मामलों से संबंधित खबरों को पढ़ने के लिए नीचे दिए गए शीर्षकों पर क्लिक करें.

जागरण, कानपुर में यूनिट हेड, सीजीएम एवं आईटी हेड पर महिलाकर्मी ने लगाया यौन शोषण का आरोप

इन खबरों से चिढ़ा जागरण प्रबंधन बेताब है भड़ास बंद कराने के लिए

Pahad Ki Dada: Hill Mail Uttarakhand
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