नई दिल्ली। हिन्दी कालेज की हिन्दी साहित्य सभा द्वारा आयोजित वार्षिक संगोष्ठी अभिधा का विषय 'विधाओं का अर्थ' था। उद्घाटन भाषण में दिल्ली विश्वविद्यालय के हिन्दी विभाग के अध्यक्ष प्रो गोपेश्वर सिंह ने विस्तार से विधाओं के अंत:संबंधों और वैशिष्ट्य पर चर्चा की। कविता, कहानी, उपन्यास और नाटक अजिसी विधाओं के साथ साथ उन्होंने अन्य विधाओं के महत्त्व को प्रतिपादित करते हुए कहा कि साहित्य के विद्यार्थियों को साहित्येतर कारणों को जानने समझने की कोशिश करनी चाहिए जिनके कारण बड़े परिवर्तन होते हैं।
प्रो सिंह एवं अतिथियों ने विभाग की हस्तलिखित पत्रिका 'हस्ताक्षर' के नए अंक का लोकार्पण भी किया। पहले सत्र में कवि और पब्लिक अजेंडा के साहित्य सम्पादक मदन कश्यप ने बताया कि हिंदी में किस तरह 'विधा’ का इस्तेमाल 'फॉर्म’ और'जेनर’ दोनों अर्थों के लिए होता है। उन्होंने इस विषय पर लिखी गई कुछ महत्त्वपूर्ण पुस्तकों का उल्लेख करते हुए विधाओं के रूप बंध और सामाजिक परिस्थितियों के आपसी संबंधों की चर्चा की। इसी सत्र में विख्यात कवि असद जैदी ने अपनी कुछ चर्चित कविताओं यथा ' 1857 : सामान की तलाश', 'खाना पकाना', 'अप्रकाशित कविता','संस्कार' और 'हलफनामा ' का पाठ किया। इस सत्र में मदन कश्यप ने भी अपनी कुछ कविताओं का पाठ किया।

दूसरे सत्र में इन्द्रप्रस्थ विश्वविद्यालय के अंग्रेजी विभाग के प्रो आशुतोष मोहन ने कथा विधा पर अपने व्याख्यान में कहा कि उपन्यास ही वह विधा है जो आम आदमी को साहित्य के केंद्र में ले आती है। प्रो मोहन ने पश्चिम में उपन्यास के उदय तथा वर्तमान परिदृश्य का सिंहावलोकन करते हुए गद्य विधाओं की प्रासंगिकता पर विचार रखे। इस सत्र में चर्चित उपन्यासकार भगवानदास मोरवाल ने अपनी रचना प्रक्रिया का हवाला देते हुए नए लिखे जा रहे उपन्यास के एक अंश का पाठ किया।
दूसरे दिन के पहले सत्र में तीन साहित्यकारों ने रचना पाठ किया। रचना उत्सव के नाम से यह सत्र साहित्य अकादेमी के सौजन्य से आयोजित किया गया जिसमें मंगलेश डबराल, विष्णु नागर तथा प्रभात थे। नागर ने अपनी बहु प्रशंसित कथा श्रृंखला 'ईश्वर की कहानियाँ' की कुछ प्रतिनिधि कहानियों का पाठ किया। वहीं डबराल ने अपनी कुछ कविताओं 'टार्च', 'निराला और ब्रेख्त', 'नया बैंक' जैसी अपनी प्रतिनधि कविताओं का पाठ किया। प्रभात ने अपने चर्चित गीतों 'बंजारा नमक लाया', 'मुनिया का नाटक देखे दुनिया', 'सईदन अम्मा', 'जमीन की बटायी' तथा 'सुआ' के साथ प्रेम कविताओं का पाठ भी किया। इस सत्र से पहले विष्णु नागर और प्रभात ने विभाग की भित्ति पत्रिका 'अभिव्यक्ति' के नए अंक का विमोचन भी किया। अंतिम सत्र में भावना तलवार की प्रशंसित फिल्म 'धर्म' का प्रदर्शन किया गया। इस पर हुई परिचर्चा में मीडिया विशेषज्ञ विनीत कुमार और आशु मिश्रा ने भाग लिया। संयोजन प्राध्यापक रविरंजन ने किया।
सभी सत्रों के अंत में रचनाकारों से सीधे संवाद करते हुए विद्यार्थियों ने अपनी विभिन्न जिज्ञासाएं भी रखीं जिनका समाधान रचनाकारों ने किया। इस दो दिवसीय आयोजन के अंत में सभा के परामर्शदाता पल्लव ने सभी का आभार माना।आयोजन स्थल पर साहित्य अकादेमी द्वारा लगाईं गयी पुस्तक प्रदर्शनी का युवा विद्यार्थियों ने भरपूर लाभ लिया। आयोजन में विभाग के प्राध्यापकों डॉ रामेश्वर राय, अभय रंजन, डॉ हरीन्द्र कुमार, डॉ रचना सिंह, डॉ विमलेन्दु तीर्थंकर, डॉ अरविन्द संबल सहित बड़ी संख्या में विद्यार्थी व शोध छात्र भी उपस्थित रहे।
नितिन मिश्रा की रिपोर्ट.





