प्रधानमंत्री कार्यालय रॉबर्ट वाड्रा के खिलाफ इलाहाबाद हाई कोर्ट में दायर याचिका से सम्बंधित तथ्य छिपाना चाहता दिखता है. पीएमओ के जन सूचना अधिकारी ने इस केस की याची सामाजिक कार्यकर्ता डॉ. नूतन ठाकुर को इस केस से जुड़े नोट शीट की प्रति यह कहते हुए देने से मना किया था कि मामला न्यायालय में विचाराधीन है. इस पर ठाकुर ने प्रथम अपीलीय अधिकारी को लिखा था कि आरटीआई एक्ट बिना न्यायालय के स्पष्ट आदेश के कहीं भी विचाराधीन मामलों में सूचना दिये जाने से मना नहीं करता.
हाई कोर्ट में 07 मार्च 2013 को इस याचिका का निस्तारण हो गया था, फिर भी अपीलीय अधिकारी ने पुनः सूचना देने से मना कर दिया है. उन्होंने समीर विजय जावेरी बनाम सीपीआईओ, पीएमओ में केन्द्रीय सूचना आयोग के निर्णय का सहारा लिया है, जहाँ आयोग ने पीएमओ द्वारा सुप्रीम कोर्ट में दायर हलफनामे की प्रति सुप्रीम कोर्ट नियमों के तहत देने से मना किया था. ठाकुर ने आरोपित किया है कि चूँकि पीएमओ इस मामले में सही तथ्य सामने नहीं आने देना चाहता है. अतः अपीलीय अधिकारी ने गलत ढंग से इस निर्णय का सहारा ले कर नोटशीट भी देने से इनकार कर दिया है.





