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जिन पर है सुरक्षा की जिम्‍मेदारी, उनके संरक्षण में ही बिक रहा है जहर

इटावा : दिल्ली हावड़ा रेल लाइन पर स्थित माडल स्टेशन इटावा में यात्रियों को 10 रुपये में मिलती है मौत। मौत का सामान रेल प्रशासन व जी.आर.पी. और आर.पी.एफ. की मिली भगत से प्लेटफार्म पर बेचा जाता है। इतना ही नहीं नाबालिग बच्चे भी इस काम को बखूबी अंजाम देते हैं। रेलवे के बडे़-बडे़ दावे इस माडल स्टेशन पर खोखले साबित होते हैं, क्योकि रेल की सुरक्षा के जिम्मेदारों की शरण मे होता है मौत का काला कारोबार।

इटावा : दिल्ली हावड़ा रेल लाइन पर स्थित माडल स्टेशन इटावा में यात्रियों को 10 रुपये में मिलती है मौत। मौत का सामान रेल प्रशासन व जी.आर.पी. और आर.पी.एफ. की मिली भगत से प्लेटफार्म पर बेचा जाता है। इतना ही नहीं नाबालिग बच्चे भी इस काम को बखूबी अंजाम देते हैं। रेलवे के बडे़-बडे़ दावे इस माडल स्टेशन पर खोखले साबित होते हैं, क्योकि रेल की सुरक्षा के जिम्मेदारों की शरण मे होता है मौत का काला कारोबार।

दिल्ली हावड़ा रेल लाइन पर स्थित माडल स्टेशन का दर्जा प्राप्त इटावा रेलवे स्टेशन, जहां पर शताब्दी जैसी महत्वपूर्ण गाडियों का ठहराव है, उस माडल स्टेशन के प्लेटफार्मों पर अवैध वेंडरों की मदद से गंदगी के ढेर पर बनने वाला खान पान का सामान खुले आम बेचा जाता है, जिसको इंसान तो क्या जानवर भी खाना पसन्द नहीं करेंगे। रेलवे परिसर के बाहर कूडे़ के ढेर पर बनता है यह खान पान का सामान, जिसको बिना लाइसेन्स के अवैध वेंडरों द्वारा आऱ.पी.एफ. व जी.आर.पी. की मदद से ट्रेन मे यात्रा करने वाले यात्रियों को खुले आम बेचा जाता है। इतना ही नहीं रेलवे द्वारा बेचा जाने वाले जनता खाना भी इन अवैध वेंडरों द्वारा नकली डिब्बे बनवा कर खुले आम बेचा जाता है।

माडल स्टेशन इटावा पर आये दिन सीधे साधे यात्रियों के साथ जहर खुरानी की घटनायें होती रहती हैं, जिनके जिम्मेदार ये अवैध वेंडर होते हैं, जो कि कथित ठेकेदारों व रेलवे के सुरक्षा तंत्र की मिलीभगत से संचालित किये जाते हैं, जबकि रेलवे द्वारा बेस किचन मे बना हुआ सामान रेलवे के अधिकृत वेंडरों के द्वारा ही बेचा जाना चाहिये लेकिन ऐसा नहीं होता और सैकड़ों की संख्या में अवैध वेंडरों को सुरक्षा बल व रेलवे प्रशासन की मदद से संचालित किया जाता है, जिनमें नाबालिग पढ़ने वाले बच्चे भी शामिल होते हैं। जबकि रेलवे यात्रियों को शुद्ध और कैलोरी युक्त खान पान का सामान मुहैया कराने के बडे़-बडे़ दावे करता है।

माडल स्टेशन पर रेलवे के सारे नियम कानूनों की उड़ायी जाती हैं धज्जियां। इस माडल स्टेशन पर कोई नियम लागू नहीं होते, यहां पर रेलवे के स्टेशन प्रशासन व आर.पी.एफ. और जी.आर.पी. की चलती है तानाशाही, जिनकी मदद से संचालित होते है प्लेटफार्म पर काले कारोबार और यात्रियों को पैसे के बदले बेची जाती है मौत। इसके साथ ही इन अवैध वेंडरों के खान पान का सामान घरेलू गैस सिलेन्डरों से खुले आम रेलवे परिसर से सटे इलाकों मे बनाया जाता है और रेलवे की पेन्ट्रीकार में भी अवैध रूप से गैस सिलेन्डरों की आपूर्ति की जाती है, और जब भी रेलवे का कोई बड़ा अधिकारी आता है तो इन कथित ठेकेदारों और वेंडरों को उस अधिकारी के आने की सूचना पहले ही मिल जाती है। अगर यही है रेलवे का माडल स्टेशन तो अन्य स्टेशनों की क्या हालत होगी इसका तो भगवान ही मालिक है।

समय समय पर जी.आर.पी.और आर.पी.एफ. अवैध वेंडरों पर कार्रवाई तो करती है लेकिन उसके बाद भी अवैध वेंडरों का काला कारोबार नहीं रूकता, क्योकि इन वेंडरों से जी.आर.पी. व आर.पी.एफ. हफ्ता वसूली कर निर्भीक होकर काम करने का लाइसेन्स दे देते हैं। प्लेटफार्म पर जब भी गाड़ी आकर रुकती है तो इन अवैध वेंडरों का हुजूम ट्रेन की बोगियों में बड़ी तादाद में टूट पडता है, वर्दी के नाम पर तरह तरह की वर्दी पहनते हैं और किसी भी वेंडर के पास उसके नाम की प्लेट नहीं होती है, जबकि रेलवे इस बात का प्लेटफार्म पर एनाउंसमेंट भी करता है कि किसी भी अनजान व्यक्ति से कोई सामान न खरीदें। उसके बाद भी अवैध वेंडरों का सैकड़ों की संख्या मे प्लेटफार्म पर जमा होना भारतीय रेलवे की सुरक्षा व्यवस्था की पोल खोलता है क्योकि रेलवे का सुरक्षा तंत्र चाहे तो पत्ता भी इधर से उधर नहीं हो सकता। 

लेखक विकास मिश्रा इटावा में टीवी पत्रकारिता से जुड़े हुए हैं.

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