दस दिसंबर, 12 को नाम वापसी की तिथि समाप्त होने के बाद सभी उम्मीदवारों को चुनाव चिह्न का इंतजार था। जनसंपर्क में सभी उम्मीदवार जुटे हुए थे। लेकिन चुनाव चिह्न के साथ जनता के बीच जाना हर कोई चाह रहा था। वोटर चुनाव चिह्न के आधार पर ही वोट डालता है। चुनाव के दौरान वही पहचान बन जाता है उम्मीदवार की। सिंबल को लेकर चुनाव में नारे भी बन जाते हैं और कई बार ये नारे चुनाव के माहौल को बदल देते हैं। नाम वापसी के दिन सिंबल का वितरण नहीं किया। सबको अपने सिंबल और क्रम संख्या का इंतजार था।
राज्य निर्वाचन आयोग ने पंचायत चुनाव में पद के हिसाब से क्रमानुगत रूप से चुनाव चिह्नों का निर्धारण किया है। इसका मकसद है कि एक साथ होने वाले विभिन्न पदों के चुनाव में सिंबल पहचानने में वोटरों को दिक्कत नहीं हो। सिंबल का निर्धारण क्रम के अनुसार तय है। कुछ लोग उम्मीदवारों के वर्णानुसार क्रम के आधार सिंबल का अनुमान लगा रहे थे। प्रखंड कार्यालय में चुनाव का काम देख रहे संजय कुमार किसी काम से 11 दिसंबर, 12 को कार्यालय में नहीं थे। इस कारण सिंबल का आवंटन नहीं हो सका। 12 दिसंबर को वह कार्यालय में पहुंचे। मैंने उनको फोन किया। उन्होंने कहा कि आप अपना प्रचार कीजिए, शाम तक सिंबल मिल जाएगा। शाम को फिर फोन किया। उन्होंने कहा कि आपका क्रम संख्या 10 और चुनाव चिह्न मोमबतियां हैं। मैंने सोचा अब बिजली विहीन पंचायत में मोमबत्तियां जलाने का मौका आ गया है। करीब तीन दिनों का इंतजार समाप्त हो चुका था।
अगले दिन सुबह प्रखंड कार्यालय पहुंचा। वहां से चुनाव चिह्न लिया। सिंबल एक परची पर बना हुआ था। उसे पॉकेट में रखा। अपना पर्चा बनवाने के लिए ओबरा से दाउदनगर प्रस्थान किया। दाउदनगर में साथी हैं ओम प्रकाश। उनसे मैंने
पूछा कि पोस्टर, पर्चा कहां बनता है। हालांकि ओम प्रकाश से इस संबंध में कोई मदद नहीं मिली। मैंने पोस्टर छपवाने के बदले पर्चा बनवाना ही बढ़िया और सस्ता समझा। इस संबंध में मैंने एक अन्य साथी शंकर जी से संपर्क किया। उनका छपाई का कारोबार भी है। उन्होंने एक कंप्यूटर इंस्टीट्यूट का नाम बताया। यह गर्ल्स हाइ स्कूल के पास था। वहां पहुंचा और परचा छपवाने के बात हुई। दाम भी तय हो गया। ए फोर साइज में चार पर्चा बनवाया और घर चला आया।
(जारी )
लेखक वीरेंद्र कुमार यादव बिहार के वरिष्ठ पत्रकार हैं. प्रभात खबर समेत कई अखबारों को अपनी सेवा दे चुके हैं.
इसके पहले के भागों के बारे में पढ़ने के लिए क्लिक करें : वीरेंद्र यादव की चुनाव यात्रा





