प्रिय यशंवतजी, आपके माध्यम से नई दिल्ली के वीवीआईपी इलाके राजपथ व राष्ट्रपति भवन के निकट स्थित विजय चौक पर हुई घटना के बारे में बताना चाहते हैं. घटना शुक्रवार यानी 9 दिसम्बर की है. कुछ प्रेस छायाकार पशुओं के हित में आवाज बुलंद करने वाली संस्था पेटा द्वारा आयोजित एक शांतिपूर्ण प्रदर्शन की कवरेज करने के लिए गए थे, मगर विजय चौक पर कोहरे और मौसम को देखकर उसकी तस्वीर लेने लगे.
आमतौर पर कोहरे और मौसम की तस्वीर लेने के लिए तमाम फोटोग्राफर विजय चौक पर आते रहते हैं. छायाकार जब फोटो लेने लगे तभी एएस दहिया नाम के पुलिस एसीपी ने प्रेस छायाकारों को धमकाना शुरू कर दिया कि आप यहां तस्वीर नहीं खींच सकते. जब छायाकारों ने उनसे पूछा कि आखिर ऐसा क्यों है, हम तो प्राय: मौसम की फोटो यहीं से बनाते रहे हैं, इससे पहले हमें कभी रोका भी नहीं गया है. जबकि विदेशी सैलानी भी यहां फोटो खींच सकते हैं तो फिर हमें क्यों रोका जा रहा है?
इतना सुनते ही एसीपी ने सभी छायाकारों को धमकाना शुरू कर दिया. साथ ही चीखने लगा कि सभी सालों को गाड़ी में भरकर थाने ले चलो, वहीं सब सिखाते हैं कि फोटो क्यों नहीं खिंचने दिया जा रहा है. कई प्रेस छायाकारों को जबरन एक पुलिसिया वाहन में ठूंस दिया गया, जिसमें नई दुनिया के रवि बत्रा, ट्रिब्यून के मुकेश अग्रवाल, एशियन एज के प्रीतम, मेल टुडे के शेखर यादव, सहारा के छायाकार एवं हिंदू बिजनेसलाइन के कमल समेत कई अन्य भी शामिल थे. सभी को थाने ले जाया जाने लगा.
थोड़ी देर बाद जब इस घटना की जानकारी अन्य प्रेस के छायाकारों और पत्रकारों को मिली तो वे भागकर वाहन को रुकवाया तथा हिल हुज्जत के बाद अपने साथियों को छुड़वाया. इस घटना से गुस्साए प्रेस छायाकारों ने संसद भवन की तरफ मार्च करना शुरू कर दिया, क्योंकि उस समय संसद का सत्र चल रहा था, जानकारी मिलते ही इलेक्ट्रानिक मीडिया के कैमरामैन और रिपोर्टर भी उनके साथ हो लिए. मामले की नजाकत को समझते हुए कुछ वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों के समझाने-बुझाने और सिरफिरे एसीपी के माफी मांगने के बाद छायाकारों ने मामले को रफा दफा कर दिया.


एक पत्रकार द्वारा भेजा गया पत्र.






