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प्रसार भारती वसूलेगी निजी चैनलों से शुल्‍क

नई दिल्ली. प्रसार भारती निजी चैनलों पर शुल्क लगाने और घरों में इस्तेमाल होने वाले टीवी सेटों पर लाइसेंस फीस वसूलने पर विचार कर रही है. गांवों में टेलीफोन उपलब्ध कराने के लिए सरकार टेलीकॉम सेक्टर पर यूएसओ यानि सार्वभौमिक सेवा दायित्व कोष शुल्क की तरह प्रसार भारती को घाटे से उबारने के लिए निजी चैनलों पर शुल्क लगाने और घरों में इस्तेमाल होने वाले टीवी सेटों पर लाइसेंस फीस वसूलने पर विचार कर रही है.

नई दिल्ली. प्रसार भारती निजी चैनलों पर शुल्क लगाने और घरों में इस्तेमाल होने वाले टीवी सेटों पर लाइसेंस फीस वसूलने पर विचार कर रही है. गांवों में टेलीफोन उपलब्ध कराने के लिए सरकार टेलीकॉम सेक्टर पर यूएसओ यानि सार्वभौमिक सेवा दायित्व कोष शुल्क की तरह प्रसार भारती को घाटे से उबारने के लिए निजी चैनलों पर शुल्क लगाने और घरों में इस्तेमाल होने वाले टीवी सेटों पर लाइसेंस फीस वसूलने पर विचार कर रही है.

विचार यह भी है कि दूरदर्शन के जो चैनल नहीं दिखाई दे रहे हैं, उन्हें बंद कर दिया जाए और दूरदर्शन और आकाशवाणी के प्रमुख स्थानों की संपत्ति का व्यावसायिक उपयोग किया जाए. दूरदर्शन के टैरेस्ट्रियल ट्रांसमिशन को बंद करने का भी प्रस्ताव है. प्रसार भारती के पुनगर्ठन को लेकर प्रधानंमत्री ने सैम पित्रोदा की अध्यक्षता में एक विशेषज्ञ कमेटी का गठन किया है. कमेटी की पहली बैठक हो चुकी है. बैठक में जिन प्रस्तावों पर चर्चा हुई है, उन पर शिवराज पाटिल के समय भी चर्चा थी. गृह मंत्री रहते हुए पाटिल को जीओएम का प्रमुख बनाया गया था, लेकिन उन्होंने कोई निर्णय नहीं लिया.

प्रस्ताव के अनुसार जिस तरह से ग्रामीण क्षेत्रों में टेलीकॉम सेवा उपलब्ध कराने के लिए यूएसओ फंड एकट्ठा किया जाता है, उसी तरह से दूरदर्शन और आकाशवाणी को दूरदराज के इलाकों में पंहुचाने के लिए प्रसारण क्षेत्र पर शुल्क लगाया जाए यानि पब्लिक सर्विस ब्रॉडकास्टिंग शुल्क वसूला जाए. दूरदर्शन के छह राष्ट्रीय चैनलों के अलावा 11 क्षेत्रीय चैनल हैं. ये सभी घाटे में चल रहे हैं. प्रसार भारती को स्वायत्त बनाने के बावजूद इन्हें केंद्र सरकार के खजाने से मदद देनी पड़ती है.

दूसरा प्रस्ताव है कि दूरदर्शन के उन चैनलों का प्रसारण बंद किया जाए जिन्हें देखने वाला कोई नहीं. डीडी न्यूज, डीडी भारती, डीडी इंटरनेशनल व डीडी स्पोर्ट्स के बारे में दोबारा सोचे जाने की जरूरत है. तीसरा प्रस्ताव है कि दूरदर्शन की संपत्ति का व्यावसायिकरण किया जाए. दूरदर्शन के पास करोड़ों रुपए की जमीन है. इस पर लोगों की नजर लगी हुई है. सैम पित्रोदा ने इसी तरह का सुझाव रेलवे को दिया था, जिस पर काम शुरू हो गया है.

एक प्रस्ताव है कि दूरदर्शन के टैरेस्ट्रियल ट्रांसमिशन को बंद किया जाए. एक जमाने में घरों की छत्तों पर टीवी के एंटीना देखे जाते थे. दूरदराज के इलाकों में इन्हें अब भी देखा जा सकता है. चूंकि अब डिजिटलीकरण अनिवार्य हो गया है और हर घर में टीवी देखने लिए सेटटॉप बाक्स की जरूरत है, ऐसे में टैरेस्ट्रियल ट्रांसमिशन बेकार हो गया है. (पीपीआई)

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