किसी मित्र ने मुझे मेरठ में यह सुनाया. लगभग एक घंटे के आसपास का यह टेप है. मैं सुना तो सुनता ही गया. हंसता गया. मुस्कराता रहा. तब सोचा था कि इसे भड़ास पर अपलोड करके सभी को सुनाउंगा. पर काम के दबाव और अन्य चिरकुट उलझनों के कारण भूल गया.
इन दिनों जब लखनऊ आया तो संयोग से यह रिकार्डिंग मेरे मोबाइल में थी और एक लंबी यात्रा के दौरान कार के आडियो से
अपना मोबाइल ब्लूटूथ के जरिए कनेक्ट किया और इसे फिर से सुना और सुनाया. रास्ते भर हंसते रहे हम लोग. तो, मैंने तय किया कि अब इसे भड़ास पर अपलोड कर ही दिया जाए.
क्या खूब हैं कुमार विश्वास. सब सुनने के बाद समझ में आया कि आखिर क्यों पब्लिक कुमार विश्वास को पसंद करती है, प्यार करती है. यह रिकार्डिंग एक कवि सम्मेलन की है. कुमार विश्वास माइक पकड़ते हैं तो फिर बोलते-गाते-हंसाते-सुनाते रहते हैं. गद्य में ज्यादा बातें कहीं, पद्य दाल में तड़के की तरह है.
जो मजेदार मजेदार जोक सुनाए, उसे सुनकर आप भी कह पड़ेंगे कि यार, इस बंदे ने तो किसी को नहीं छोड़ा. क्या अटल बिहारी वाजपेयी और क्या मायावती.. मुलायम सिंह यादव हों या लालू यादव… सबकी चुटकी ली. मनमोहन सिंह और सोनिया की खूब बैंड बजाई…. आप सुनेंगे तो सुनते चले जाएंगे और बिना हंसे मुस्कराए रह ना सकेंगे. -यशवंत, एडिटर, भड़ास4मीडिया
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