: पत्रकारिता में भी सफाई हो : देश की आजादी की लड़ाई में पत्रकारिता ने कई मापदण्ड स्थापित किये थे जिसमें भाषाई समाचार पत्रों की बहुत बड़ी भूमिका थी। इसीलिए न्यायपालिका, कार्यपालिका, संसदीय कार्य तथा पत्रकारिता क्षेत्र को चौथा स्तम्भ माना गया है। लेकिन आज जिस तरह से राजनीति और नौकरशाही में भ्रष्टाचार व अपराधीकरण बढ़ा है उससे पत्रकारिता भी अछूती नहीं बची।
एक तरफ हम जहां नौकरशाही व राजनीति से भ्रष्टाचार और अपराधीकरण को समाप्त करने की मुहिम चला रहे हैं वहीं पत्रकारिता क्षेत्र में भी तमाम अपराधी और भ्रष्ट तत्व प्रवेश करते जा रहे हैं। रजिस्ट्रार न्यूज पेपर्स द्वारा जो पुरानी परम्परा चलाई जा रही है उसका अपराधी तत्व खुलकर लाभ उठा रहे हैं और छोटे-छोटे फर्जी पत्र निकालकर भयादोहन व दलाली तथा अपने कुकृत्यों को छुपाने का काम कर रहे हैं।
यह लोग सामाजिक बुराईयों से लड़ने वाले पत्रकारों के खिलाफ गंदी मुहिम चलाने से भी बाज नहीं आ रहे हैं। अब समय आ गया है कि हम सभी पत्रकार अपने अंतर्मन में झांके और इन पत्रकाररूपी काले भेड़ियों की नकाब उतार फेंके। इसके लिए सबसे पहले यह जरूरी है कि हम स्वयं अपने चरित्र, सम्पत्ति को भी जनता के सामने उसी तरह रखे जिस तरह से चुनाव के समय प्रत्याशी घोषणा करते हैं। चूंकि इस मामले में मैं स्वयं लगभग 50 वर्षों से राजनीति व पत्रकारिता में अनवरत लगा रहा हूं और 'क्या खोया क्या पाया' को आम लोगों के सामने सर्वप्रथम लाना चाहता हूं। उसके साथ मेरा एक निवेदन है कि सभी पत्रकार बंधु अपने व अपनी सम्पत्ति के बारे में सार्वजनिक घोषणा करें और मुझे खुशी होगी कि मैं उनके विचारों को भी निरंतर छापता रहूंगा। आगामी अंक से मैं अपने बारे में स्वयं 50 वर्षों का लेखा-जोखा आप जनता जनार्दन व पत्रकार बंधुओं के समक्ष रखना प्रारंभ कर रहा हूं। आशा है कि आप लोग इसे अन्यथा न लें।
जगदीश नारायण शुक्ला
निदेशक और प्रधान संपादक
निष्पक्ष प्रतिदिन अखबार
लखनऊ





