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अश्‍लील कार्यक्रम दिखाने वाले चैनलों पर बीसीसीसी कसेगा शिकंजा

नई दिल्ली। इस देश में टीवी चैनलों पर दिखाए जाने वाले कार्यक्रमों, विज्ञापनों में फूहडता, अश्लीलता को लेकर कई बार गंभीरता से सवाल खडे किए जाते हैं। लोकसभा में भी इस पर चिंता जताई जाती रही है। अब चैनलों की प्रसारण सामग्री पर नजर रखने वाली संस्था ब्रॉडकास्टिंग कंटेंट कम्पलेंट्स काउंसिल-बीसीसीसी ने शिकंजा कसना शुरू कर दिया है। बीसीसीसी ने दो म्यूजिक चैनल्स के साथ कई सामान्य मनोरंजन कार्यक्रम प्रसारित करने वाले चैनलों को, उनके आपत्तिजनक कंटेंट को वयस्क टाइम स्लॉट में शिफ्ट करने को कहा है। इन चैनल्स को उसका आदेश ना मानने पर भारी जुर्माना भरने की भी चेतावनी दी गई है।

नई दिल्ली। इस देश में टीवी चैनलों पर दिखाए जाने वाले कार्यक्रमों, विज्ञापनों में फूहडता, अश्लीलता को लेकर कई बार गंभीरता से सवाल खडे किए जाते हैं। लोकसभा में भी इस पर चिंता जताई जाती रही है। अब चैनलों की प्रसारण सामग्री पर नजर रखने वाली संस्था ब्रॉडकास्टिंग कंटेंट कम्पलेंट्स काउंसिल-बीसीसीसी ने शिकंजा कसना शुरू कर दिया है। बीसीसीसी ने दो म्यूजिक चैनल्स के साथ कई सामान्य मनोरंजन कार्यक्रम प्रसारित करने वाले चैनलों को, उनके आपत्तिजनक कंटेंट को वयस्क टाइम स्लॉट में शिफ्ट करने को कहा है। इन चैनल्स को उसका आदेश ना मानने पर भारी जुर्माना भरने की भी चेतावनी दी गई है।

कहा जा रहा है कि बीसीसीसी ने यूटीवी-बिंदास पर प्रसारित हो रहे शो "इमोशनल अत्याचार" पर कडी आपत्ति लेकर चैनल के अधिकारियों को तलब किया था। दिल्ली में हुई इस मीटिंग में चैनल अधिकारियों को बीसीसीसी के अधिकारियों ने कंटेंट को लेकर फटकार लगाई। अधिकारियों ने उन्हें तुरंत शो का टाइम स्लॉट बदलने के आदेश दिए। इस पर जल्दी एक्शन लेते हुए बिंदास ने अपने शो के फॉर्मेट को चेंज कर दिया है। एमटीवी और चैनल वी को भी इसी तरह की चेतावनियां दी गई हैं।

बीसीसीसी को इन शो के बारे में कई शिकायतें मिली थीं। बीसीसीसी ने चैनल्स को रिएलिटी शो के नाम से प्रसारित किए जा रहे कुछ स्क्रिप्टेड शो को बंद करने के भी आदेश दिए हैं। जब एक टीवी कायक्रम के सीन और स्क्रिप्ट उसके निर्माताओं द्वारा तैयार किए गए हों तब उस शो को रिएलिटी शो नहीं कहा जा सकता। यह स्व नियामक संस्था आंखे बंद करके किसी शिकायत को नहीं सुनती। किसी भी अप्रिय कार्यवाही से पहले चैनल्स को तीन बार चेतावनियां दी जाती हैं, अगर वे इस पर अमल नहीं करते तो उन्हें जुर्माना भरने के आदेश दिया जाता है। जुर्माने की राशि फिलहाल तय नहीं की गई है। माना जाता है कि एक बार बीसीसीसी द्वारा चेतावनी मिल जाने के पश्‍चात निर्माताओं के पास अपने शो के कंटेंट को बदलने के अलावा कोई और चारा नहीं रह जाता है।

टीवी चैनल्स के प्रतिनिधि ने बताया कि चैनल्स को बीसीसीसी से ज्यादा सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय द्वारा लाइसेंस रद्द करने का डर रहता है। कई बार चैनल अधिकारियों को मंत्रालय द्वारा भी तलब कर लिया जाता है। मंत्रालय द्वारा सुनवाई का मौका दिया जाना केवल कहने की बात होती है। वे हमें अपनी बात रखने का मौका भी नहीं देते और पहले से ही यह निर्णय ले लेते हैं कि चैनल गलती पर है।

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