Connect with us

Hi, what are you looking for?

No. 1 Indian Media News PortalNo. 1 Indian Media News Portal
Local News Community

विविध

2जी घोटाले में जेपीसी ने बचा लिया प्रधानमंत्री को!

नई दिल्ली : संयुक्त संसदीय समिति (जेपीसी) ने 2-जी स्पेक्ट्रम आवंटन घोटाले में प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह को क्लीन चिट देते हुए कहा है कि उन्हें तत्कालीन दूरसंचार मंत्री ए राजा ने ‘गुमराह’ किया था। साथ ही जेपीसी ने कहा कि राजा ने जो आश्वासन दिए थे, वे ‘झूठे’ साबित हुए। जेपीसी की रिपोर्ट के मसौदे में नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (कैग) के 1.76 लाख करोड़ रुपये के नुकसान के निष्कर्ष को भी खारिज किया गया है। रिपोर्ट में कहा गया है कि नुकसान का यह आंकड़ा सही अनुमान पर आधारित नहीं है।

नई दिल्ली : संयुक्त संसदीय समिति (जेपीसी) ने 2-जी स्पेक्ट्रम आवंटन घोटाले में प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह को क्लीन चिट देते हुए कहा है कि उन्हें तत्कालीन दूरसंचार मंत्री ए राजा ने ‘गुमराह’ किया था। साथ ही जेपीसी ने कहा कि राजा ने जो आश्वासन दिए थे, वे ‘झूठे’ साबित हुए। जेपीसी की रिपोर्ट के मसौदे में नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (कैग) के 1.76 लाख करोड़ रुपये के नुकसान के निष्कर्ष को भी खारिज किया गया है। रिपोर्ट में कहा गया है कि नुकसान का यह आंकड़ा सही अनुमान पर आधारित नहीं है।

यह रिपोर्ट आज सदस्यों के बीच वितरित की गई। 25 अप्रैल को रिपोर्ट को स्वीकार किया जाएगा। इसमें यह भी आरोप लगाया गया है कि तत्कालीन सालिसिटर जनरल जीई वाहनवति द्वारा 7 जनवरी, 2008 के प्रेस नोट को देखे जाने के बाद राजा ने उससे छेड़छाड़ की थी। रिपोर्ट में कहा गया है, ‘‘समिति यह बताना चाहती है कि पहले आओ पहले पाओ (एफसीएफएस) से संबंधित प्रक्रिया तथ्यों का गलत प्रस्तुतीकरण थी और यह उस समय मौजूद प्रक्रियाओं से अलग थी।’’

2 जी स्पैक्ट्रम के आवंटन संबंधी घटनाओं का ब्यौरा देते हुए रिपोर्ट में कहा गया है, ‘‘समिति इस नतीजे पर पहुंची है कि यूएएस लाइसेंसों को जारी करने में दूरसंचार विभाग द्वारा अपनाई गई प्रक्रिया के संबंध में प्रधानमंत्री को गुमराह किया गया।’’ ‘‘इसके अलावा, संचार और सूचना तकनीक मंत्री (राजा) ने प्रधानमंत्री के साथ हुए सभी पत्राचार में विभाग के सभी स्थापित नियमों और प्रक्रियाओं में पारदर्शिता बरते जाने का जो वादा किया गया था, उसे भी पूरा नहीं किया गया।’’

जेपीसी की अगली बैठक में इस मसौदा रिपोर्ट पर काफी हंगामा होने की आशंका है। इसमें कहा गया है कि दूरसंचार मंत्रालय द्वारा 2-जी आवंटन के संबंध में लिए गए निर्णयों में वित्तमंत्री पी चिदम्बरम के खिलाफ कुछ नहीं है। लाइसेंस आवंटन से ठीक पहले जारी की गई विवादास्पद प्रेस विज्ञप्ति के बारे में जेपीसी रिपोर्ट ने सीबीआई के हवाले से लिखा है कि सात जनवरी 2008 के प्रेस नोट में संचार और सूचना तकनीक मंत्री (राजा) द्वारा छेड़छाड़ की गई थी जिसमें बाद में शब्द जोड़ा गया कि ‘‘प्रेस विज्ञप्ति को संशोधित रूप में मंजूरी दी जाती है।’’

रिपोर्ट में कहा गया है कि सीबीआई ने दावा किया है कि उसके पास इस बारे में अपने निष्कर्षों को साबित करने के लिए फोरेंसिक सबूत हैं। सरकार के ऑडिटर द्वारा 1.76 लाख करोड़ रुपये के नुकसान संबंधी आंकड़े पर रिपोर्ट में कहा गया है, ‘‘समिति का यह विचारित मत है कि लाइसेंस और स्पैक्ट्रम आवंटन के मद में किसी भी नुकसान की गणना सही तरीके से नहीं की गई है।’’

मार्च 2011 में गठित की गई 30 सदस्यीय समिति ने इस बात पर भी गौर किया है कि स्पैक्ट्रम प्राइसिंग पर ट्राई या सरकार द्वारा गठित की गई समितियों ने कई सिफारिशें की थीं और वित्त मंत्रालय तथा प्रधानमंत्री कार्यालय ने भी विचार जाहिर किए थे, लेकिन ‘‘2-जी स्पैक्ट्रम की नीलामी के पक्ष में सरकार ने कोई नीतिगत फैसला नहीं किया।’’

इसमें कहा गया है, ‘‘अधिकतर समय, ट्राई, दूरसंचार विभाग, वित्त मंत्रालय और योजना आयोग ने तार्किक स्पैक्ट्रम मूल्य बनाए रखने का पक्ष लिया था ताकि उपलब्ध टेलीकॉम सेवाएं उचित मूल्य पर उपलब्ध हों और विभिन्न तकनीकों का इस्तेमाल करते हुए सेवा प्रदाताओं के बीच समान स्तर सुनिश्चित किया जा सके।’’ जेपीसी रिपोर्ट में उन घटनाओं का उल्लेख किया गया है कि इच्छा पत्र (लेटर्स ऑफ इनटेंट) की संख्या का फैसला करते समय इस बात का ख्याल रखा जाना चाहिए था कि केवल गंभीर कंपनियां ही प्रवेश शुल्क जमा कराएं जो अनुपलब्धता या स्पैक्ट्रम आवंटन में देरी को वहन कर सकें।

मसौदा रिपोर्ट कहती है, ‘‘उपरोक्त प्रस्ताव को मंजूरी प्रदान करते हुए संचार और सूचना तकनीक मंत्रालय ने फैसला किया कि एलओआई 25 सितंबर 2007 तक मिले आवेदनों के आवेदकों को जारी की जा सकती है। समिति के विचार में अंतिम तिथि को घटा कर उसे पहले करने का फैसला निष्पक्ष प्रतीत नहीं होता है।’’ रिपोर्ट में कहा गया है कि यह कहने की जरूरत नहीं है कि एक अक्तूबर 2007 की समय सीमा के फैसले को बदलने का निर्णय लेते समय दूरसंचार विभाग को अच्छी तरह से स्पैक्ट्रम की उपलब्धता का अंदाजा लगाना चाहिए था और इसी को प्रकाशित करना चाहिए था ताकि नीति लेने की प्रक्रिया ‘‘तार्किक और पारदर्शी’’ रहती। (एनडीटीवी)

Pahad Ki Dada: Hill Mail Uttarakhand
CosmoQuick: AI Recruitment For Media Jobs
Click to comment

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

… अपनी भड़ास [email protected] पर मेल करें … भड़ास को चंदा देकर इसके संचालन में मदद करने के लिए यहां पढ़ें-  Donate Bhadasमोबाइल पर भड़ासी खबरें पाने के लिए प्ले स्टोर से Telegram एप्प इंस्टाल करने के बाद यहां क्लिक करें : https://t.me/BhadasMedia 

Advertisement

You May Also Like

विविध

Arvind Kumar Singh : सुल्ताना डाकू…बीती सदी के शुरूआती सालों का देश का सबसे खतरनाक डाकू, जिससे अंग्रेजी सरकार हिल गयी थी…

विविध

: काशी की नामचीन डाक्टर की दिल दहला देने वाली शैतानी करतूत : पिछले दिनों 17 जून की शाम टीवी चैनल IBN7 पर सिटिजन...

विविध

पहली बार चुनाव हमने 1967 में देखा था. तेरह साल की उम्र में. और अब पहली बार ऐसा चुनाव देख रहे हैं, जो इससे...

विविध

राजस्थान, कांग्रेस और सेक्स. ये तीन शब्द लगता है आपस में अच्छे से घुल मिल गए हैं. भंवरी कांड में ये तीनों शब्द जुड़े...