Mukesh Kumar : कविता संग्रह 'साधो! जग बौराना' का लोकार्पण समारोह अत्यधिक सफल रहा। उम्मीद से ज़्यादा लोग आए। साहित्य अकादमी का सभागार खचाखच भरा रहा। मुझे खेद है कि बहुत से लोगों को दो घंटे तक खड़े रहकर हिस्सेदारी करनी पड़ी। मुझे छोड़कर सभी वक्ता बहुत अच्छा बोले। खरा-खरा, दो टूक। वर्तिका जी ने तो कमाल किया ही, प्रियदर्शन जी भी बेलाग बोले। अशोक वाजपेयी जी और नामवर जी का कहा सिर-माथे पर।



राजेंद्र यादव जी हमेशा की तरह कविता-विरोध का झंडा उठाए रहे, लेकिन मैं जानता हूँ कि यह उनकी विवादप्रियता का ही एक अंदाज़ है। असल में वे भी कविता-प्रेमी हैं। सुशील शर्मा एवं उनके साथियों द्वारा कविताओं की संगीतमयी प्रस्तुति ने तो कार्यक्रम में चार चाँद ही लगा दिए। बहुतों के इस आग्रह पर ध्यान देना पड़ेगा कि अब इसकी ऑडियो सीडी भी तैयार की जाए। कार्यक्रम में आए सभी लोगों का आभारी हूँ। उन लोगों का भी जो आना चाहते थे मगर किन्हीं वजहों से नहीं आ पाए। उनका भी जो सिर्फ़ इसी कार्यक्रम के लिए दूसरे शहरों से भागे चले आए। मुख-पुस्तकियों (फेसबुकियों) का भी बहुत-बहुत ऋणी हूँ, जो इस बीच लगातार अपनी प्रतिक्रियाओं से मेरा हौसला बढ़ाते रहे हैं।
वरिष्ठ पत्रकार मुकेश कुमार के फेसबुक वॉल से.





