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निशंक और उमेश कुमार में फिर ‘जंग’ शुरू

रमेश पोखरियाल निशंक जब उत्तराखंड के मुख्यमंत्री हुआ करते थे तो उन्होंने पत्रकार और उद्यमी उमेश कुमार से लंबी-चौड़ी लड़ाई लड़ी. ढेरों मुकदमे दर्ज कराए और पुलिस एसटीएफ पीछे लगा दिया. उमेश कुमार का जीना दूभर हो गया था. वे यहां-वहां बच-बचा के रहा करते थे. पर झुके नहीं. लड़ते रहे. अड़े रहे. बेहद मुश्किल दौर होने और लगभग अकेले जंग लड़ने के बावजूद उमेश कुमार ने मुख्यमंत्री के आगे समर्पण नहीं किया.

रमेश पोखरियाल निशंक जब उत्तराखंड के मुख्यमंत्री हुआ करते थे तो उन्होंने पत्रकार और उद्यमी उमेश कुमार से लंबी-चौड़ी लड़ाई लड़ी. ढेरों मुकदमे दर्ज कराए और पुलिस एसटीएफ पीछे लगा दिया. उमेश कुमार का जीना दूभर हो गया था. वे यहां-वहां बच-बचा के रहा करते थे. पर झुके नहीं. लड़ते रहे. अड़े रहे. बेहद मुश्किल दौर होने और लगभग अकेले जंग लड़ने के बावजूद उमेश कुमार ने मुख्यमंत्री के आगे समर्पण नहीं किया.

निशंक के पास सब कुछ होने के बावजूद वे उमेश कुमार के अरेस्ट न करा सके. हां, मानसिक और प्रशासनिक तरीके से जितना परेशान कर सकते थे किया. बताने वाले बताते हैं कि दोनों पहले अच्छे मित्र हुआ करते थे. निशंक जब सीएम बने तभी किन्हीं कारणों से अदावत जो शुरू हुई तो आजतक जारी है. दोनों ने एक दूसरे के खिलाफ जब भी मौका मिला, वार करने से परहेज नहीं किया.

निशंक के सीएम पद से हटाए जाने के बाद ये माना जा रहा था कि जंग अब खत्म हो गई. पर ऐसा कुछ नहीं हुआ है. निशंक के मन में उमेश कुमार के खिलाफ बदले की आग धधक रही है. निशंक को यह भी लगता है कि उनका सीएम पद जाने में काफी बड़ा हाथ उमेश कुमार और उनके मीडिया मैनेजमेंट का रहा है. बहरहाल ताजी जानकारी ये है कि निशंक ने उत्तराखंड में प्रेस कांफ्रेंस कर उमेश कुमार को गिरफ्तार करने की मांग की. साथ ही उन्होंने कई आरोप लगाए. इसके जवाब में उमेश कुमार ने उत्तराखंड के मुख्यमंत्री बहुगुणा को पत्र लिखकर सारे आरोपों की सीबीआई जांच की मांग की है. उमेश का लिखा गया पत्र इस प्रकार है…

सेवा में,

माननीय मुख्यमंत्री महोदय

उत्तराखंड

विषय – सीबीआई जांच के अनुरोध के संबंध में…

महोदय,

निवेदन है कि मैं, उमेश कुमार विगत डेढ़ दशक से पत्रकारिता में सक्रिय हूं और अपने पत्रकारिता धर्म के निर्वहन में मैंने कभी किसी से समझौता नहीं किया। मैंने हमेशा सत्य का साथ दिया है और इसकी बड़ी कीमत भी चुकायी है। मेरे खिलाफ श्री रमेश पोखरियाल निशंक ने अपनी सरकार के समय ढेरों झूठे मामले दर्ज कराए थे। मेरा अनुरोध है कि मेरे विरुद्ध श्री रमेश पोखरियाल निशंक के मुख्यमंत्रित्व कार्यकाल के दौरान दर्ज हुए मामलों की जांच केंद्रीय जांच ब्यूरो से कराए जाने के संबंध में आदेश निर्गत करने का कष्ट करें। मेरा निवेदन है कि इस जांच में उन विषयों का भी संज्ञान ले लिया जाए जो दिनांक 18.04.13 को अपने संवाददाता सम्मेलन में पूर्व मुख्यमंत्री निशंक ने उठाए हैं। मेरा अनुरोध होगा कि यह जांच समयबद्ध हो ताकि एक निर्धारित समय के भीतर यह सच स्थापित हो सके कि किस तरह से श्री निशंक ने मुख्यमंत्री रहते हुए मेरे और मेरे परिवार के विरुद्ध आधारहीन, असत्य और भ्रामक मामलों में मामले दर्ज कराए। जिस व्यक्ति ने अपने मुख्यमंत्री रहते हुए प्रदेश में जल, जमीन और जंगल तक को बेचने का शर्मनाक कारनामा कर डाला हो वह आखिर सच की आवाज को मंजूर करता भी तो कैसे?  कुछ उदाहरण आप सबके समक्ष रखना चाहूंगा –

1. जिस राइफल को जमा न कराने के कथित मामले में मेरे विरुद्ध श्री निशंक ने मुख्यमंत्री रहते हुए न केवल इनाम घोषित करा दिया था बल्कि मेरे घर की कुर्की भी करवा डाली थी, उस मामले का प्रामाणिक सच यह था कि मैंने अपने जीवन में कभी कोई राइफल खरीदी ही नहीं थी। झूठ की बुनियाद पर खड़ा किया गया यह मामला बाद में भरभरा कर गिर गया।

2. मेरे और मेरी पत्नी के विरुद्ध ैब्ध्ैज् एक्ट के तहत भी निशंक सरकार ने एक मुकदमा दायर कराया था। इस मुकदमे में जिस तारीख घटना बतायी गयी थी। उस तारीख को मैं देश में था ही नहीं लेकिन निशंक की सरकार ने बेशर्मी के साथ मेरे विरुद्ध मामला दर्ज करा दिया था। मैं तीन सितंबर से 17 सितंबर 2010 तक देश से बाहर था और इस बात को प्रामाणित किया मेरे पासपोर्ट और उस पर लगे वीजा ने। फलतः निशंक जी की यह घृणित कोशिश भी बेकार गयी।

3. हरिद्वार के लक्सर थाने में गुमनाम व्यक्ति ने मेरी पत्नी के खिलाफ 420/406 में मुकदमा दर्ज कराया गया। बाद में उसी व्यक्ति ने शपथ पत्र देकर कहा कि वे उमेश शर्मा और उनकी पत्नी को जानता तक नही और न ही दोनो सें कभी मिला। भाजपा के एक स्थानीय नेता अनिल कैड़ा के कहने पर मैने उमेंश शर्मा की पत्नी के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया।

महोदय पूर्व मुख्यमंत्री जिन 14 मुकदमो का प्रचार-प्रसार कर रहे है उनमें से 4 मुकदमें नैनीताल हाईकोर्ट क्वैश कर चुकी है। इसके अलावा 3 मुकदमें राज्य सरकार वापस ले चुकी है। इनमें से दो मुकदमें तो भाजपा शासन ने ही वापस लिए है। इससे साफ होता है कि पूर्व मुख्यमंत्री अपने घोटालो से जनता का ध्यान बटाने के लिए मीडिया को भ्रमित कर रहे है।

मेरा आपसे विनम्र निवेदन है कि मेरे उपर लगाये जा रहे तमाम आरोपो की सीबीआई जाँच कराने की संस्तुति प्रदान करने का कष्ट  करें ताकि जनता के सामने पूरे मामले की हकीकत सामने आ सके।

सादर          

उमेश कुमार

मंदाकनी विहार
सहस्त्रधारा रोड
देहरादून

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